MHD-14 · June 2021 · हिन्दी
IGNOU MHD-14 June 2021 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
हिन्दी उपन्यास (प्रेमचंद का विशेष अध्ययन) (Hindi Novel - Special Study of Premchand)
Structured previous year question paper for MHD-14, June 2021 session (Hindi medium).
Questions: 6
Verified: 26 Jul 2026
हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)
सत्रांत परीक्षा
जून, 2021
एम.एच .डी.-14 : हिन्दी उपन्यास-1 (प्रेमचंद का विशेष अध्ययन)
समय : 2 घण्टे अधिकतम अंक : 50
qe: पहला और छठा ग्रशन अनिवार्य है / शेष ग्रसनों में से किन्हीं
दो उ्श्नों के उत्त दीजिए /
Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं क्षो की संदर्भ-सहित व्याख्या कीजिए : 2x10=20
(क) इसमें संदेह नहीं कि वह विलास की सामग्रियों पर जान देती थी, लेकिन इन सामग्रियों की प्राप्ति के लिए जिस बेहयाई की ज़रूरत थी, वह उसके लिए असह्ा थी और कभी-कभी एकान्त में वह अपनी वर्तमान दशा की पूर्वावस्था से तुलना किया करती थी । वहाँ यह टीमटाम न थी, किन्तु वह अपने समाज में आदर की दृष्टि से देखी जाती थी । वह अपनी पड़ोसिनों के सामने अपनी कुलीनता पर गर्व कर सकती थी, अपनी धार्मिकता और भक्तिभाव का रोब जमा सकती थी । किसी के सम्मुख उसका सिर नीचा नहीं होता था । लेकिन यहाँ उसके ard हृदय को पग-पग पर लज्जा से मुँह छिपाना पड़ता
(ख) अपने सदकार्यों को सफल होते देखकर उनका चित्त उल्लसित हो जाता था और हृदय-कणों में किसी ओर से मन्द स्वरों में सुनायी देता था - मैंने कितना अच्छा काम किया ! लेकिन ऐसे प्रत्येक अवसर पर एक ही क्षण के उपरान्त उन्हें कोई ऐसी चेतावनी मिल जाती थी, जो उनके अहंकार को चूर-चूर कर देती थी । मूर्ख ! तुझे अपनी सिद्धान्त-प्रियता का अभिमान है ! देख, वह कितने कच्चे हैं । तुझे अपनी बुद्धि और विद्या का घमण्ड है ? देख, वह कितना श्रांतिपूर्ण है । तुझे अपने ज्ञान और सदाचार का ग़रूर है ! देख, वह कितनी अपूर्ण और भ्रष्ट है । क्या तुम्हें निश्चय है कि तुम्हारी ही उत्तेजनाएँ गौस खाँ की हत्या का कारण नहीं हुई ? तुम्हारे ही कटूपदेशों ने मनोहर की जान नहीं ली ? तुम्हारे ही वक्र नीतिपालन ने ज्ञानशंकर को, श्रद्धा को तुम से विमुख नहीं किया ?
(ग) हम जीवन में शांति की इच्छा रखते हैं, प्रेम और मैत्री के लिए जान देते हैं । जिसके सिर पर नित्य नंगी तलवार लटकती हो, उसे शांति कहाँ । अंधेर तो यह है कि मुझे चुप भी नहीं रहने दिया जाता । कितना कहती थी कि मुझे इस बहस में न घसीटिए, इन काँटों में न दौड़ाइए, पर न माना । अब जो मेरे पैरों में काँटे चुभ गए, दर्द से कराहती हूँ, तो कानों पर उँगली रखते हैं । मुझे रोने की स्वाधीनता भी नहीं । ज़बर मारे और रोने न दें | आठ दिन गुज़र गए बात भी न पूछी कि मरती हो या जीती । बिल्कुल उसी तरह पड़ी हूँ जैसे कोई सराय हो । इससे तो कहीं अच्छा था कि मर जाती । सुख गया, आराम गया, पल्ले क्या पड़ा, रोना और झींकना । जब यही दशा है, तो कब तक निभेगी, बकरे की माँ कब तक ख़ैर मनाएगी ? दोनों के दिल एक-दूसरे से फिर जाएँगे, कोई किसी की सूरत भी न देखना चाहेगा ।
(घ) न जाने किस पापी ने यह क़ानून बनाया था । अगर ईश्वर कहीं है और उसके यहाँ कोई न्याय होता है, तो एक दिन उसी के सामने उस पापी से पूछूँगी, क्या तेरे घर में माँ-बहनें न थीं ? तुझे उनका अपमान करते लज्जा न आई ? अगर मेरी ज़बान में इतनी ताक़त होती कि सारे देश में उसकी आवाज़ पहुँचती, तो मैं सब स्त्रियों से कहती - बहनों, किसी सम्मिलित परिवार में विवाह मत करना और अगर करना तो जब तक अपना घर अलग न बना लो, चैन की नींद मत सोना । यह मत समझो कि तुम्हारे पति के पीछे उस घर में तुम्हारा मान के साथ पालन होगा । अगर तुम्हारे पुरुष ने कोई तरका नहीं छोड़ा, तो तुम अकेली रहो चाहे परिवार में, एक ही बात है । तुम अपमान और मज़दूरी से नहीं बच सकतीं ।
Q2.“प्रेमचंद साहित्य के क्षेत्र में बहुमुखी प्रतिभा के रचनाकार थे ।” इस कथन की समीक्षा कीजिए ।
Q3.सेवासदरन के औपन्यासिक शिल्प पर विचार कीजिए |
Q4.SHR? के आधार पर तत्कालीन कृषक-समाज में व्याप्त शोषण के विविध रूपों पर प्रकाश डालिए |
Q5.उपन्यास के रूप में रंगभूमि' का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए |
Q6.निम्नलिखित में से किन्हीं को पर टिप्पणियाँ लिखिए: 96510
(क) सूरदास की चारित्रिक विशेषताएँ
(ख) “बन का मध्यवर्ग
(ग) प्रेमचंद की उपन्यास कला
(घ) सेवासदन' की अंतर्वस्तु