MHD-14 · December 2016 · हिन्दी
IGNOU MHD-14 December 2016 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
हिन्दी उपन्यास (प्रेमचंद का विशेष अध्ययन) (Hindi Novel - Special Study of Premchand)
Structured previous year question paper for MHD-14, December 2016 session (Hindi medium).
Questions: 5
Verified: 26 Jul 2026
हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)
सत्रांत परीक्षा है
O1S04 दिसम्बर, 2016
एम.एच.डी.-14 : हिन्दी उपन्यास-1 (प्रेमचंद का विशेष अध्ययन)
समय : 2 घण्टे अंधिकक्म अंक : 50
aie: agen [...] (this portion is being re-verified) अनिवार्य है / शेष में से किन्हीं ढो wet
के उत्तर दीजिए /
Q1.निम्नलिखित में से किन्हीं को गद्यांशों की संदर्भ-सहित व्याख्या कीजिए : 2x10=20
(क) वह अपनी पड़ोसिनों के सामने अपनी कुलीनता पर गर्व कर सकती थी, अपनी धार्मिकता और भक्तिभाव का रोब जमा सकती थी । किसी के सम्मुख उसका सिर नीचा नहीं होता था । लेकिन यहाँ उसके सगर्ब हृदय को पग-पग पर लज्जा से मुँह छिपाना पड़ता था । उसे ज्ञात. होता था कि मैं किसी कुलटा के सामने भी सिर उठाने योग्य नहीं हूँ । जो निरादर और अपमान उसे उस समय सहने पड़ते थे, उनकी अपेक्षा वहाँ की प्रेमवार्ता और आँखों की सनकियाँ अधिक दुःखजनक प्रतीत होती
(ख) मेरी धारणा है कि मुझे किसानों की गर्दन पर अपना जुआ रखने का कोई अधिकार नहीं है । यह मेरी नैतिक दुर्बलता और भीरुता होगी, अगर मैं अपने सिद्धान्त को भोगलिप्सा पर बलिदान कर दूँ । अपनी ही दृष्टि में पतित होकर कौन जीना पसंद करेगा ? मैं आप सब सज्जनों के सम्मुख उन अधिकारों और स्वत्वों का त्याग करता हूँ जो प्रथा, नियम और समाज-व्यवस्था ने मुझे दिए हैं ।
(ग) जब मैं युवती थी और वीर राजपूतों तथा राजपूतानियों के . आत्मसमर्पण की कथाएँ पढ़ा करती थी, उसी समय मेरे मन में यह कामना अंकुरित हुई थी कि ईश्वर मुझे भी कोई ऐसा ही पुत्र देता, जो उन्हीं वीरों की भाँति मृत्यु से खेलता, जो अपना जीवन देश और जाति-हित के लिए हवन कर देता, जो अपने कुल का मुख उज्ज्वल करता । मेरी यह मनोकामना पूरी हो गई । आज में एक वीर पुत्र की जननी हूँ । क्यों रोती हो ? इससे उसकी आत्मा को क्लेश होगा । मनुष्य कभी मरता है ? जीव तो अमर है ।
(घ) महल का सुख भोगने के बाद झोंपड़ा किसे अच्छा लगता है ? प्रेम आत्मा को तृप्त कर देता है । तुम तो मुझे जानते हो, अब तो बूढ़ा हो गया हूँ, लेकिन मैं तुमसे सच कहता हूँ, इस विधुर जीवन में मैंने किसी स्त्री की ओर आँख तक नहीं उठाई । कितनी सुंदरियाँ देखीं, कई बार लोगों ने विवाह के लिए घेरा भी, लेकिन कभी इच्छा ही न हुई । उस प्रेम की मधुर स्मृतियों में मेरे प्रेम का सजीव आनंद भरा हुआ है।
Q2.“प्रेमचंद का सम्पूर्ण उपन्यास साहित्य ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरोध में खड़ा है ।” इस कथन की पुष्टि कीजिए ।
Q3.प्रिमाश्रम' के प्रमुख नारी-चरित्रों की विशिष्टताओं पर प्रकाश डालिए । -
Q4.सेवासदन में निहित समस्याओं का विवेचन कीजिए ।
Q5.aa’ & afta w aieferd प्रभाव की समीक्षा कीजिए । 10
(क) बन में राष्ट्रीय आन्दोलन
(ख) “बन में रतन का चरित्र
(ग) प्रेमचंद की समकालीन आलोचना