MHD-14 · June 2020 · हिन्दी

IGNOU MHD-14 June 2020 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

हिन्दी उपन्यास (प्रेमचंद का विशेष अध्ययन) (Hindi Novel - Special Study of Premchand)

Structured previous year question paper for MHD-14, June 2020 session (Hindi medium).

Questions: 5

Verified: 26 Jul 2026

हिन्दी में स्नातक उपाधि कार्यक्रम

सत्नांत परीक्षा

जून, 2020

एम.एच.डी.-14 : हिन्दी उपन्यास-1 ( प्रेमचंद का विशेष

अध्ययन ) *

: समय : 2 wd अधिकतम अंक : 50

नोट ; प्रश्न क्र: 1 और प्रश्न क्र. 6 अनिवार्य हैं। शेष में से

किन्हीं वो प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

: 1. निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं दो क़ी संदर्भ सहित

व्याख्या कीजिए : : 2x10=20

(क) यह भी तुम्हारी भूल है। तुम यहाँ चाहे और

किसी की गुलाम न हो, पर अपनी इन्द्रियों की

- गुलाम तो हो। इन्द्रियों की गुलामी उस पराधीनता

से कहीं दुःखदायिनी होती है। यहाँ तुम्हें न सुख

मिलेगा, न आदर हाँ, कुछ दिनों भोग-विलास

कर लोगी, पर अन्त में इससे भी हाथ धोना

पड़ेगा। सोचो तो, थोड़े दिनों तक इन्द्रियों को सुख

देने के लिए तुम अपनी आत्मा और समाज पर

कितना बड़ा अन्याय कर रही

(ख) क्षुद्र लोकिकता से चित्त को घृणा होती थी और

उत्कृष्ट नियमों पर चलने के नतीजे उलटे होते

थे। उन्हें अपनी विवशता का ऐसा निराशाजनक

अनुभव कभी न हुआ था। मानव-बुद्धि कितनी

भ्रमयुक्त है, उसकी दृष्टि कितनी संकीर्ण ! इसका

ऐसा स्पष्ट प्रमाण कभी न मिला था। यद्यपि वे

अहंकार को अपने पास न आने देते थे, पर बह *

है किसी गुप्त मार्ग से उनके हृदयस्थल में पहुँच

(ग) शांत विचार के लिए एकाग्रता उतनी ही

आवश्यक है, जितनी ध्यान के लिए वायु की

गति तराजू के पलड़ों को बराबर नहीं होने देती। -

विनय को अब विचार हुआ, अम्माजी को यह

हाल मालूम हुआ तो वह अपने मन में क्‍या

, कहेंगी। मुझसे उनकी कितनी मनोकामनाएँ संबद्ध

हैं। सोफी के प्रेमणाश से बचने के लिए उन्होंने

मुझे निर्वासित किया, इसीलिए उन्होंने सोफी को

'कलंकित किया। उनका हृदय टूट जाएगा।

(घ) जालपा अपने को दुखिनी समझ रही थी और

दुखी जनों को निर्मम सत्य कहने की स्वाधीनता

होती है। लेकिन स्तन की मनोव्यथा उसकी व्यथा

से कहीं विदारक थी। जालपा के पति के लौट

आने की अब भो आशा थी। वह जवान है,

उसके आते ही जालपा को ये बुरे दिन भूल

जायँगे। उसकी आशाओं का सूर्य फिर उदय होगा।

उसकी इच्छाएँ फिर फूले-फलेंगी। भविष्य अपनी.

सारी आशाओं और आकांक्षाओं के साथ उसके

सामने था-विशाल, उज्ज्वल, रमणीक। रतन का

भविष्य क्‍या था ? कुछ नहीं, शून्य, अंधकार !

Q1.हिन्दी आलोचना में प्रेमचन्द के मूल्यांकन पर प्रकाश डालिए।

Q2.सुमन के चरित्र की मूलभूत विशेषताएँ बताइए॥

Q3.“रंगभूमि' में सूरदास के चरित्र की विशेषताएँ बताइये।10

Q4.उपन्यास के रूप में “प्रेमाश्रम' का मूल्यांकन कीजिए।

Q5.निम्नलिखित में से किन्हीं दों पर टिप्पणियाँ लिखिए :

(क) 'गबन' में चित्रित राष्ट्रीय आंदोलन

(ख) 'रंगभूमि” की मुख्य विषयवस्तु

(ग) .'प्रेमाश्रम' के प्रमुख नारी पात्र

(घ) 'सेवासदन' को अंतर्वस्तु