MHD-14 · December 2018 · हिन्दी
IGNOU MHD-14 December 2018 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
हिन्दी उपन्यास (प्रेमचंद का विशेष अध्ययन) (Hindi Novel - Special Study of Premchand)
Structured previous year question paper for MHD-14, December 2018 session (Hindi medium).
Questions: 6
Verified: 26 Jul 2026
हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)
सत्रांत परीक्षा .
दिसम्बर, 2018
एम.एच .डी.-14 : हिन्दी उपन्यास-1 (प्रेमचंद का विशेष अध्ययन)
समय : 2 woe अधिकवम अंक : 50
नोट: पहला और छठा ग्र् अनिवार्य है | [...] (this portion is being re-verified) में से किन्हीं
दो गर्नों के उत्त दीजिए /
Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं को की संदर्भ-सहित व्याख्या कीजिए : 2x10=20
(क) जब हम गृहस्थ-आश्रम में प्रवेश करते हैं, जब हमारे पैरों में धर्म की बेड़ी पड़ती है, जब हम सांसारिक कर्तव्य के सामने अपने सिर को झुका देते हैं, जब जीवन का भार और उनकी चिन्ताएँ हमारे सिर पर पड़ती हैं, तो ऐसे पवित्र संस्कार पर हमको गाम्भीर्य से काम लेना चाहिए । यह कितनी निर्दयता है जिस समय हमारा आत्मीय युवक ऐसा कठिन ब्रत धारण कर रहा हो, उस समय हम आनंदोत्सव मनाने बैठें । वह इस गुरुतर भार से दबा जाता हो और हम नाच रंग में मस्त हों ।
(ख) नीति चतुर प्राणी अवसर के अनुकूल काम करता है | जहाँ दबना चाहिए, वहाँ दब जाता है; जहाँ गरम होना चाहिए, वहाँ गरम होता है । उसे मानापमान का हर्ष या दुःख नहीं होता । उसकी दृष्टि निरंतर अपने लक्ष्य पर रहती है । वह अविरल गति से, अदम्य उत्साह से उसी ओर बढ़ता है; किन्तु, सरल, लज्जाशील, निष्कपट आत्माएँ मेघों के समान होती हैं जो अनुकूल वायु पाकर पृथ्वी को तृप्त कर देते हैं और प्रतिकूल वायु के वेग से छिन्न भिन्न हो जाते हैं ।
(ग) मानव जीवन की सबसे महान् घटना कितनी शांति के साथ घटित हो जाती है । वह विश्व का एक महान् अंग, वह महत्त्वाकांक्षाओं का प्रचंड सागर, वह उद्योग का अनंत भांडार, वह प्रेम और ट्रेष, सुख और दु:ख का लीला-दक्षेत्र, वह बुद्धि और बल की रंगभूमि न जाने कब और कहाँ लीन हो जाती है, किसी को ख़बर नहीं होती । एक हिचकी भी नहीं, एक उच्छवास भी नहीं, एक आह भी नहीं निकलती । सागर की हिलोरों का कहाँ अंत होता है, कौन बता सकता है।
(घ) मानव-बुद्धि कितनी भ्रमयुक्त है, उसकी दृष्टि कितनी संकीर्ण ! इसका ऐसा स्पष्ट प्रमाण कभी न मिला था । यद्यपि वह अहंकार को अपने पास न आने देते थे, पर वह किसी गुप्त मार्ग से उनके हृदयस्थल में पहुँच जाता था । अपने सत्कार्यों को सफल होते देखकर उनका चित्त उल्लसित हो जाता था और हृदय-कणों में किसी ओर से [...] (this portion is being re-verified) में सुनाई देता था - मैंने कितना अच्छा काम किया ! लेकिन ऐसे प्रत्येक अवसर पर एक ही क्षण के उपरान्त उन्हें कोई ऐसी चेतावनी मिल जाती थी, जो उनके अहंकार को चूर-चूर कर देती थी ।
Q2.प्रेमचंद पर उनकी समकालीन आलोचना का विवरण देते हुए उसका मूल्यांकन कीजिए ।
Q3.Gar की चारित्रिक विशिष्टताओं पर प्रकाश डालिए ।
Q4.ंगभूमि' पर स्वाधीनता आंदोलन और गाँधीवाद के प्रभाव का विवेचन कीजिए ।
Q5.औपन्यासिक शिल्प की दृष्टि से गबन का मूल्यांकन कीजिए |
Q6.निम्नलिखित में से किन्हीं को पर टिप्पणियाँ लिखिए:. 245-10
(क) नारी-मुक्ति के सन्दर्भ में सेवासदन
(ख) ज्ञानशंकर का चरित्र
(ग) TAR? का उद्देश्य
(घ) “गन में मध्यवर्ग