MHD-14 · June 2014 · हिन्दी

IGNOU MHD-14 June 2014 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

हिन्दी उपन्यास (प्रेमचंद का विशेष अध्ययन) (Hindi Novel - Special Study of Premchand)

Structured previous year question paper for MHD-14, June 2014 session (Hindi medium).

Questions: 6

Verified: 26 Jul 2026

हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि

सत्रांत परीक्षा

जून, 2014

एम.एच.डी.--14 : हिन्दी उपन्यास-1

समय : 2 घण्टे अधिकतम अंक : 50

नोट : पहला और छठा प्रश्न अनिवार्य है। शेष में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर

दीजिए।

Q1.निम्नलिखित में से किन्हीं दो गद्यांशों की संदर्भ सहित 2510520 व्याख्या कीजिए।

(क) मैंने अपने बन्धुओं की सेवा करने का निश्चय किया। यही मार्ग मेरे लिए सबसे सरल था। तब से मैं यथाशक्ति इसी मार्ग पर चल रहा हूँ और अब मुझे अनुभव हो रहा है कि आत्मोद्धार के मार्गों में केवल नाम का अन्तर है। मुझे इस मार्ग पर चलकर शान्ति मिली है और तुम्हारे लिए भी यही मार्ग सबसे उत्तम समझता हूँ।

(ख) संसार में कौन-सी वस्तु इतनी कोमल इतनी अस्थिर, इतनी सारहीन है जिससे एक व्यंग्य, एक कठोर शब्द, एक अन्येक्ति भी दारुण, असहय, घातक है। और इसी भित्ति पर कितने विशाल कितने भव्य, कितने बृहदाकार भवनों का निर्माण

(ग) इच्छाओं को जीवन का आधार बनाना बालू की दीवार बनाना है। धर्मग्रंथों में आत्मदमन और संयम की अखंड महिमा कही गयी है; बल्कि इसी को मुक्ति का साधन बताया गया है। इच्छाओं और वासनाओं को ही मानव-पतन का मुख्य कारण सिद्ध किया गया है और मेरे विचार में यह निर्विवाद

(घ) संसार में हजारों विधवाएँ है, जो मेहनत-मजूरी कर के अपना निर्वाह कर रही हैं। मैं भी वैसी ही हूँ। मैं भी उसी तरह मजूरी करूँगी और न कर सकूँगी, तो किसी गड्ढे में डूब मरूँगी। जो अपना पेट भी न पाल सके, उसे जीते रहने का, दूसरों का बोझ बनने का कोई हक नहीं।

Q2.'प्रेमचंद साहित्य के क्षेत्र में बहुमुखी प्रतिभा के रचनाकार 10 थे इस कथन की पुष्टि कीजिए।

Q3.'सेवासदन' में चित्रित विवाह-संस्था और उसकी विकृतियों 10 पर विचार कीजिए।

Q4... 'रंगभूमि' के कथानक की विशेषताएँ बताइए।

Q5.'प्रेमाश्रम' के प्रेमशंकर और ज्ञानशंकर के चरित्रों की 10 परस्पर तुलना कीजिए।

Q6.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणी लिखिए: 5x2=10

(क) जालपा का चरित्र।

(ख) 'रंगभूमि' में जॉन सेवक की स्वार्थपरता।

(ग) प्रेमाश्रम' का कृषक-समाज |

(घ) 'सेवासदन' में वेश्या-सुधार।