MHD-14 · June 2015 · हिन्दी
IGNOU MHD-14 June 2015 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
हिन्दी उपन्यास (प्रेमचंद का विशेष अध्ययन) (Hindi Novel - Special Study of Premchand)
Structured previous year question paper for MHD-14, June 2015 session (Hindi medium).
Questions: 6
Verified: 26 Jul 2026
हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)
. सत्रांत परीक्षा
06820 जून, 2015 ह
एम.एच.डी.-14 : हिन्दी उपन्यास-1 (प्रेमचंद का विशेष
अध्ययन)
समय : 2 घण्टे अधिकवम अंक : 50
me: प्रथम और छठा ग्रन अनिवार्य है । शेष में से किन््हीं दो अरनों
के उत्तर दीजिए /
Q1.निम्नलिखित में से किन्हीं ढ्गो गद्यांशों की संदर्भ-सहित व्याख्या कीजिए : 2x10=20
(क) विचारों की स्वतंत्रता विद्या, संगीत और अनुभव पर निर्भर होती है । सदन इन सभी गुणों से रहित था । यह उसके जीवन का वह समय था, जब हमको अपने धार्मिक विचारों पर, अपनी सामाजिक रीतियों पर एक अभिमान-सा होता है । हमें उनमें कोई त्रुटि नहीं दिखाई देती, जब हम अपने धर्म के विरुद्ध कोई प्रमाण या दलील सुनने का साहस नहीं कर सकते, तब हममें क्या और क्यों का विकास नहीं होता ।
(ख) वास्तव में वह राधा और कृष्ण के प्रेम तत्त्व को समझने में असमर्थ थी । उसकी भौतिक दृष्टि उस प्रेम के ऐन्द्रिक स्वरूप से आगे न बढ़ सकती थी और उसका हृदय इन प्रेम सुख-कल्पनाओं से तृप्त न होता था । वह उन भावों को अनुभव करना चाहती थी । विरह और वियोग, ताप: और व्यथा, मान और मनावन, रास और विहार, आमोद और प्रमोद का प्रत्यक्ष स्वरूप देखना चाहती थी ।
(ग) सम्भव था वे जीवन का विस्तृत और पर्याप्त ज्ञान प्राप्त करके अपनी कविता को और भी मार्मिक बना सकते लेकिन साथ ही यह शंका भी थी कि जीवन-संग्राम में प्रवृत्त होने से उनकी कवि-कल्पना शिथिल हो जाती । होमर अंधा था, सूर भी अंधा था, मिल्टन भी अंधा था परन्तु सभी साहित्य गगन के उज्ज्वल नक्षत्र हैं; तुलसी, वाल्मीकि आदि महाकवि संसार से अलग, कुटियों में बसने वाले प्राणी थे; पर कौन कह सकता है कि उनकी एकान्त सेवा से उनकी कवित्वकला दूषित हो गई !
(घ) जालपा अपने को दुखिनी समझ रही थी और दुखी जनों को निर्मम सत्य कहने की स्वाधीनता होती है । लेकिन रतन की मनोव्यथा उसकी व्यथा में कहीं विदारक थी । जालपा के पति के लौट आने की अब भी आशा eft | * वह जवान है, उसके आते ही जालपा को ये बुरे दिन भूल जाएँगे । उसकी आशाओं का सूर्य फिर उदय होगा । उसकी इच्छाएँ फिर फूले-फलेंगी । भविष्य अपनी सारी आशाओं और आबकांक्षाओं के साथ उसके सामने था - विशाल, उज्ज्वल, रमणीक ।
Q2.प्रेमचंद के युग में उनके साहित्य पर की गई आलोचना का विवरण देते हुए उसका मूल्यांकन कीजिए ।
Q3.“ सेवासदन मध्यवर्गीय नारी-मुक्ति का एक ज्वलंत दस्तावेज़ है । इस कथन की सोदाहरण समीक्षा कीजिए ।
Q4.विद्या और ज्ञानशंकर के चरित्र दो ध्रुव के समान हैं ।” उनके पारस्परिक सम्बन्धों के आधार पर इस कथन को पुष्ट कीजिए ।
Q5.‘wy’ में आदर्शवाद किस रूप में व्यक्त हुआ है ? चर्चा कीजिए ।
Q6.निम्नलिखित में से किन्हीं को पर टिप्पणियाँ लिखिए: 8265-10
(क) 'सेवासदन' की अंतर्वस्तु
(ख) रमानाथ का चरित्र
(ग) प्रेमचंद के उपन्यास-सम्बन्धी विचार
(घ) 'ग़बन पर नवजागरण का प्रभाव