MHD-14 · June 2013 · हिन्दी
IGNOU MHD-14 June 2013 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
हिन्दी उपन्यास (प्रेमचंद का विशेष अध्ययन) (Hindi Novel - Special Study of Premchand)
Structured previous year question paper for MHD-14, June 2013 session (Hindi medium).
Questions: 6
Verified: 26 Jul 2026
हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि ( एम.ए. हिन्दी )
m सत्रांत परीक्षा
5 जून, 2013
° एम.एच.डी.-14 : हिन्दी उपन्यास-1 ( प्रेमचंद का विशेष
अध्ययन )
समय : 2 घण्टे अधिकवम अंक : 50
नोट: पहला और छठा प्रश्न अनिवार्य है। शेष में से किन्हीं दो प्रश्नों के
उत्तर दीजिए। _
Q1.निम्नलिखित में से किन्हीं दो गद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 10x2=20
(क) आप में अपनी बुद्धि से काम लेने की शक्ति का लोप हो गया है। अभी तक आप तान्त्रिक विद्या की बात भी न पूछते थे। अब जो यूरोपीय विद्वानों ने उसका रहस्य खोलना शुरू किया, तो आपको अब तन््त्रों में गुण दिखाई देते हैं। यह मानसिक गुलामी उस भौतिक गुलामी से कहीं गई-गुजरी है। आप उपनिषदों को अंग्रेजी में पढ़ते हैं, गीता को जर्मन में। अर्जुन को अर्जुना, कृष्ण को कृशना कहकर अपने स्वभाषा-ज्ञान का परिचय देते हैं। आपने इसी मानसिक दासत्व के कारण उस क्षेत्र में अपनी पराजय स्वीकार कर ली, जहाँ हम अपने पूर्वजों की प्रतिभा और प्रचण्डता से चिर-काल तक अपनी विजय- 'पताका फहरा सकते थे।
(ख) हम ज़मींदार हैं, साहूकार हैं, वकील हैं, सौदागर हैं, डॉक्टर हैं, पदाधिकारी हैं। इनमें कौन जाति की सच्ची वकालत करने का दावा कर सकता है? आप जाति के साथ बड़ी भलाई करते हैं, तो कौंसिल में अनिवार्य शिक्षा का प्रस्ताव पास करा देते हैं। अगर आप जाति के सच्चे नेता होते, तो यह निरंकुशता कभी न करते। कोई अपनी इच्छा के विरुद्ध स्वर्ग भी नहीं चाहता। हममें तो कितने ही महोदयों ने बड़ी-बड़ी उपाधियाँ प्राप्त की हैं। पर इस उच्च शिक्षा ने हममें सिवा विलास-लालसा और सम्मान- प्रेम, स्वार्थ-सिद्धि और अहम्मन्यता के और कौन-सा सुधार कर दिया।
(ग) सरकार बहुत ठीक कहते हैं, मुहल्ले की रौनक जरूर बढ़ जायेगी, रोजगारी लोगों को फायदा भी खूब होगा। लेकिन जहाँ यह रौनक बढ़ेगी, वहाँ ताड़ी-शराब का भी तो परचार बढ़ जायेगा, कसबियाँ भी तो आकर बस जायेंगी, परदेशी आदमी हमारी बहू-बेटियों को घूरेंगे, कितना अधरम होगा! दिहात के किसान अपना काम छोड़कर मजूरी के लालच से दौड़ेंगे, यहाँ बुरी-बुरी बातें सीखेंगे और अपने बुरे आचरण अपने गाँव में फैलाएँगे। दिहातों की लड़कियाँ बहुएँ मजूरी करने आयेंगी और पैसे के लोभ में अपना धरम बिगाड़ेंगी। यही रौनक शहरों में है। वही रौनक यहाँ हो जायेगी। भगवान न करे यहाँ वह रौनक हो। सरकार मुझे इस कुकरम और अधरम से बचाए। यह सारा पाप मेरे सिर पड़ेगा।
(4) मगर कोई आदमी अपने बुरे आचरण पर लज्जित होकर भी सत्य का उद्घाटन करे, छल और कपट का आवरण हटा दे, तो वह सज्जन है, उसके साहस की जितनी प्रशंसा की जाए, कम है। मगर शर्त यही है कि वह अपनी गोष्ठी के साथ किए का फल भोगने को तैयार रहे। हँसता-खेलता फाँसी पर चढ़ जाए तो वह सच्चा वीर है, लेकिन अपने प्राणों की रक्षा के लिए स्वार्थ के नीच विचार से, दंड की कठोरता से भयभीत होकर अपने साथियों से दगा करे, आस्तीन का साँप बन जाए तो वह कायर है, पतित है, बेहया है। विश्वासघात डाकुओं और समाज के शत्रुओं में भी उतना ही हेय है जितना किसी अन्य क्षेत्र में। ऐसे प्राणी को समाज कभी क्षमा नहीं करता, कभी नहीं-जालपा इसे खूब समझती थी।
Q2.प्रेमचंद के आदर्शों परक यथार्थवाद संबंधी विचारों की समीक्षा 10 कीजिए।
Q3.“प्रेमाश्रम' आदर्शवादी उपन्यास है? इस कथन का तर्क सहित 10 विवेचन कीजिए।
Q4.“Wea उपन्यास की राष्ट्रीय भक्ति आंदोलन के सन्दर्भ में समीक्षा 10 कीजिए।
Q5.“रंग भूमि! में मि. जॉनसेवक के चरित्र के महत्त्व पर प्रकाश 10 डालिए।
Q6.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणी लिखिए : 5x2=10 (७) “प्रेमाश्रम' शीर्षक की सार्थकता (०) सुमन के चरित्र का वैशिष्ट्य (०) प्रेमशंकर का चरित्र
(d) “गबन! की कथा भाषा