MHD-14 · June 2010 · हिन्दी

IGNOU MHD-14 June 2010 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

हिन्दी उपन्यास (प्रेमचंद का विशेष अध्ययन) (Hindi Novel - Special Study of Premchand)

Structured previous year question paper for MHD-14, June 2010 session (Hindi medium).

Questions: 6

Verified: 26 Jul 2026

हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि ( एम.एच.डी. )

2 सत्रांत परीक्षा

5 जून, 2010

एम.एच.डी.-14 : हिन्दी उपन्यास-1

समय : 2 घण्टे अधिकतम अंक ; 50

नोट: पहला और छठ प्रश्न अनिवार्य है। शेष में से किन्हीं दो प्रश्नों के

उत्तर दीजिए।

Q1.निम्नलिखित में से किन्हीं दे गद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 10x2=20 (०) संसार का कोई साहित्य इतना दरिद्र न होगा। उस पर तुर्रा यह है कि जिन महानुभावों ने दो-एक अंग्रेजी-प्रन्थों के अनुवाद मराठी और बंगला अनुवादों की सहायता से कर लिये, वे अपने को धुरन्धर साहित्यज्ञ समझने लगे हैं। लेकिन वे अपने को हिन्दी का कालिदास समझते हैं। एक महाशय ने 'मिल' के दो ग्रन्थों का अनुवाद किया है और वह भी स्वतन्त्र नहीं, बल्कि गुजराती, मराठी आदि अनुवादों के सहारे; पर वह अपने मन में ऐसे सन्तुष्ट हैं; मानो उन्होंने हिन्दी साहित्य का उद्धार कर दिया। मेरा तो यह निश्चय होता जाता है कि अनुवादों से हिन्दी का अपकार हो रहा है। मौलिकता को पनपने का अवसर नहीं मिलने पाता। (०0) मानव-बुद्धि कितनी भ्रमयुक्त है, उसकी दृष्टि कितनी संकीर्ण। इसका ऐसा स्पष्ट प्रमाण कभी न मिला था। यद्यपि वह अहंकार को अपने पास न आने देते थे, पर वह किसी गुप्त मार्ग से उनके हृदयस्थल में पहुँच जाता था। अपने सदकारयों को सफल होते देखकर उनका चित्त उललसित हो जाता था और हृदय-कणों में किसी ओर से मन्द स्वरों में सुनायी देता था-मैंने कितना अच्छा काम किया! लेकिन ऐसे प्रत्येक अवसर पर एक ही क्षण के उपरान्त उन्हें कोई ऐसी चेतावनी मिल जाती थी, जो उनके अहंकार को चूर-चूर कर देती थी। (०) राज्य के विरुद्ध आंदोलन करना राज्य को निर्बल बना देता है और प्रजा को उद्ण्ड। राज्य-प्रभुत्व का प्रत्येक दशा में अक्षुण्ण रहना आवश्यक है, अन्यथा उसका फल वही होगा, जो आज साम्यवाद का व्यापक रूप धारण कर रहा है। संसार ने तीन दशाब्दियों तक जनवाद की परीक्षा की और अंत में हताश हो गया। आज समस्त संसार जनवाद के आतंक से पीड़ित है। हमारा परम सौभाग्य है कि वह अग्नि-ज्वाला अभी तक हमारे देश में नहीं पहुँची, और हमें यत्न करना चाहिए कि उससे भविष्य में भी निश्शंक रहें। (७) अगर मेरी जबान में इतनी ताकत होती कि सारे देश में. - उसकी आवाज पहुंचती, तो मैं सब स्त्रियों से कहती- बहनों, किसी सम्मिलित परिवार में विवाह मत करना और अगर करना तो जब तक अपना घर अलग न बना लो, चैन की नींद मत सोना। यह मत समझो कि तुम्हारे पति के पीछे उस घर में तुम्हारा मान के साथ पालन होगा। अगर तुम्हारे पुरुष ने कोई तरका नहीं छोड़ा, तो तुम अकेली रहो चाहे परिवार में, एक ही बात है। तुम अपमान और मजदूरी से नहीं बच सकतीं।

Q2.प्रेमचन्द के उपन्यास-संबंधी विचारों का विश्लेषण कीजिए।

Q3.'सेवासदन' की अन्तर्वस्तु का विश्लेषण कीजिए।

Q4.“गबन' के औपन्यासिक शिल्प का विवेचन कीजिए।

Q5.'ज्ञानशंकर' की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

Q6.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणी लिखिए : 5x2=10 (०) “रंगभूमि' की भाषिक संरचना (७) प्रेमचन्द के यथार्थवाद और आदर्शवाद संबंधी विचार (०) “जालपा" का चरित्र (५) ‘Sawa’ के प्रमुख नारी पात्र