MHD-14 · December 2020 · हिन्दी
IGNOU MHD-14 December 2020 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
हिन्दी उपन्यास (प्रेमचंद का विशेष अध्ययन) (Hindi Novel - Special Study of Premchand)
Structured previous year question paper for MHD-14, December 2020 session (Hindi medium).
Questions: 6
Verified: 26 Jul 2026
हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम. ए. हिन्दी )
सत्रांत परीक्षा
दिसम्बर, 2020
एम.एच.डी.-14 : हिन्दी उपन्यास--1
( प्रेमचंद का विशेष अध्ययन )
समय / 2 घण्टे अधिकतम अक : 50
qe: wr 1 ak 6 अनिवार्य हैं। शेष में से किन्हीं
दो अश्नों को उत्त' दीजिए/
Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं दो की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 2x 10=20 (>) बिट्ठलदास-अगर तुम्हें यह आशा है कि यहाँ सुख से जीवन कटेगा, तो तुम्हारी बड़ी भूल है। एण-॥ 2.1. 0. यदि अभी नहीं तो थोड़े दिनों में तुम्हें अवश्य मालूम हो जायेगा कि यहाँ सुख नहीं है। सुख सन्तोष से प्राप्त होता है, विलास से सुख कभी नहीं मिल सकता। सुमन-सुख न सही, यहाँ पर मेरा आदर तो है! मैं बिट्ठलदास-यह भी तुम्हारी भूल है। तुम यहाँ चाहेते और किसी की गुलाम न हो, पर अपनी इन्द्रियों की गुलाम तो हो? इन्द्रियों की गुलामी उस पराधीनता से कहीं दुःखदायिनी होती है। यहाँ तुम्हें न सुख मिलेगा, न आदर। हाँ, कुछ दिनों भोग-विलास कर लोगी, पर अन्त में इससे भी हाथ धोना पड़ेगा। सोचो तो, थोड़े दिनों तक इन्द्रियों को सुख देने के लिए तुम अपनी आत्मा और समाज पर कितना बड़ा अन्याय कर रही हो?
(ख) मनोहर ऐसे उद्दीप्त उत्साह से अपने काम में दत्तचित्त था, मानो उसकी युवावस्था का विकास हो गया है। धान के पोलों के ढेर लगते जाते थे। न आगे ताकता था न पीछे, न किसी से कुछ बोलता था, न किसी की कुछ सुनता था, न हाथ थकते थे, न कमर दुखती थी। बलराज ने चिलम भरकर रख दी। तम्बाकू रखे-रखे जल गया। बिलासी खाँड़ का रस घोलकर सामने लायी। उसने उसकी ओर देखा तक नहीं, कुत्ता पी गया। कुआर की धूप थी, देह से चिनगारियाँ निकलती थीं, पसीने की धारें बहती थीं; किन्तु वह सिर तक न उठाता था। बलराज कभी खेत में आता, कभी पेड़ के नीचे जा बैठता, कभी चिलम पीता। एक ही अग्नि दोनों के हृदय में प्रज्ज्वलित थी, एक ओर सुलगती हुई, दूसरी ओर दहकती हुई। एक ओर वायु के वेग से चंचल, दूसरी ओर निर्बलता से निश्चल। एक ही भावना दोनों के हृदय में थी, एक में उद्दाम-उच्छुंखल दूसरे में गम्भीर और स्थिर।
(ग) महाराज आप तो कई महीनों से इस इलाके में हैं, क्या आपको इन लोगों की करतूत मालूम नहीं है? ये लोग प्रजा को दोनों हाथों से लूट रहे हैं। इनमें न दया है, न धर्म है। हैं हमारे ही भाईबंद, पर हमारी ही गर्दन पर छुरी चलाते हैं। किसी ने जरा साफ कपड़े पहने, और ये लोग उसके सिर हुए । जिसे घूस न दीजिए, वही आपका दुश्मन है। चोरी कीजिए, डाके डालिए, घरों में आग लगाइए, गरीबों का गला काटिए, कोई आपसे न बोलेगा। बस, कर्मचारियों की मुट्ठियाँ गर्म करते रहिए। दिन-दहाड़े खून कीजिए, पर पुलिस की पूजा कर दीजिए, आप बेदाग छूट जाएँगे, आपके बदले कोई बेकसूर फाँसी पर लटका दिया जायेगा। कोई फरियाद नहीं सुनता। कौन सुने, सभी एक ही थैली के चट्टे-बटटे हैं।
(घ) मैं कुछ नहीं चाहती। मैं इस घर का एक तिनका भी अपने साथ न ले जाऊँगी। जिस चीज पर मेरा कोई अधिकार नहीं, वह मेरे लिए वैसी ही है जैसी किसी गैर आदमी की चीज। मैं दया की भिखिरिणी न बनूँगी। तुम इन चीजों के अधिकारी हो, ले जाओ। मैं जरा भी बुरा नहीं मानती! दया की चीज न जबरदस्ती दी जा सकती है। न जबरदस्ती ली जा सकती है। संसार में हजारों विधवाएँ हैं, जो मेहनत-मजूरी करके अपना निर्वाह कर रही हैं। मैं भी वैसे ही हूँ। मैं भी उसी तरह मजूरी करूँगी और अगर न कर सकूंगी, तो किसी गड्ढे में डूब मरूँगी। जो अपना पेट भी न पा सके, उसे जीते रहने का, दूसरों का बोझ बनने का कोई हक नहीं है।
Q2.प्रेमचंद की कहानी-कला के विकास के विविध चरणों पर विचार कीजिए।
Q3.“सेवासदन! में चित्रित विवाह-संस्था और उसकी विकृतियों पर प्रकाश डालिए।
Q4.“रंगभूमि' पर पड़े असहयोग आंदोलन के प्रभाव का आकलन कीजिए।
Q5.“गबन' उपन्यास में प्रेमचंद का रचनात्मक उद्देश्य क्या है? विस्तार से विवेचन कौजिए।
Q6.निम्नलिखित में से किन्हीं ढ्गें पर टिप्पणियाँ लिखिए :
(क) “गबन' में चित्रित मध्यवर्ग
(ख) “प्रेमाश्रम' में चित्रित कृषि-समस्या
(ग) सुमन का चरित्र
(घ) प्रेमचंद का संक्षिप्त जीवन परिचय