MHD-14 · December 2014 · हिन्दी
IGNOU MHD-14 December 2014 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
हिन्दी उपन्यास (प्रेमचंद का विशेष अध्ययन) (Hindi Novel - Special Study of Premchand)
Structured previous year question paper for MHD-14, December 2014 session (Hindi medium).
Questions: 6
Verified: 26 Jul 2026
हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)
o2755 सत्रांत परीक्षा
दिसम्बर, 2014
एम.एच .डी.-14 : हिन्दी उपन्यास-1 (प्रेमचंद का विशेष
अध्ययन)
समय : 8 घण्टे अधिकतम अंक : 50
me: प्रथम और छठा गन अनिवार्य है । शेष में a feet [...] (this portion is being re-verified)
, के उत्तर दीजिए /
Q1.निम्नलिखित में से किन्हीं को गद्यांशों की संदर्भ-सहित व्याख्या कीजिए : 2200-20
(क) जब हम गृहस्थ आश्रम में प्रवेश करते हैं, जब हमारे पैरों में धर्म की बेड़ी पड़ती है, जब हम सांसारिक कर्तव्य के सामने अपने सिर को झुका देते हैं, जब जीवन का भार और उनकी चिन्ताएँ हमारे सिर पर पड़ती हैं; तो ऐसे पवित्र संस्कार पर हमको गाम्भीर्य से काम लेना चाहिए । यह कितनी निर्दयता है कि जिस समय हमारा आत्मीय युवक ऐसा कठिन ब्रत धारण कर रहा हो, उस समय हम आनन्दोत्सव मनाने बैठें ।
(ख) इच्छाओं का दमन करना आत्महत्या के समान है । इससे चरित्र संकुचित हो जाता है । बन्धनों के दिन अब नहीं रहे, यह अबाध, उदार, विराट उन्नति का समय है । त्याग और बहिष्कार उस समय के लिए उपयुक्त था, जब लोग संसार को असार, स्वप्नवत् समझते थे । यह सांसारिक उन्नति का काल है । धर्माधर्म का, विचार-संकीर्णता का द्योतक है । सांसारिक उन्नति हमारा अभीष्ट है । प्रत्येक साधन जो अभीष्ट सिद्धि में हमारा सहायक हो, ग्राह्म है ।
(ग) तुम अपने आदर्श से उसी समय पतित हुए, जब तुमने उस विद्रोह को शांत करने के लिए शांत उपायों की अपेक्षा क्रूरता और दमन से काम लेना उचित समझा । शैतान ने पहली बार तुम पर वार किया और तुम फिर न संभले, गिरते ही चले गए । ठोकरों-पर-ठोकरें खाते-खाते अब तुम्हारा इतना पतन हो गया है कि तुममें सज्जनता, विवेक और पुरुषार्थ का लेशांश भी शेष नहीं रहा । तुम्हें देखकर मेरा मस्तक आप-ही-आप झुक जाता था । मेरे प्रेम का आधार भक्ति थी । वह आधार जड़ से हिल गया ।
(घ) रे तुम क्या देस का उद्धार करोगे । पहले अपना उद्धार तो कर लो । ग़रीबों को लूटकर बिलायत का घर भरना तुम्हारा काम है । इसीलिए तुम्हारा इस देस में जनम हुआ है । हाँ, रोए जाव, बिलायती सराबें उड़ाओ, बिलायती मोटरें दौड़ाओ, बिलायती मुरब्बे और अचार चक्खो, बिलायती बरतनों में खाओ, बिलायती दवाइयाँ पियो, पर देस के नाम को रोए जाव । मुदा इस रोने से कुछ नहीं होगा । रोने से माँ दूध पिलाती है, सेर अपना सिकार नहीं छोड़ता ।
Q2.“यह सच है कि प्रेमचन्द ग्रामीण जीवन-यथार्थ के चित्रण में अद्वितीय हैं, पर तत्कालीन मध्य वर्ग का भी वे उतनी ही सजीवता के साथ अंकन करते हैं |? इस कथन पर अपना मत दीजिए ।
Q3.सुमन के चरित्र की मूलभूत विशेषताओं को ae Ae |
Q4.प्रेमाश्रम' के आधार पर तत्कालीन कृषक-समाज में व्याप्त शोषण के विविध रूपों को रेखांकित कीजिए ।
Q5.ंगभूमि' का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए ।
Q6.निम्नलिखित में से किन्हीं ढ्ो पर टिप्पणियाँ लिखिए; 8926-10
(क) प्रेमचंद के साहित्य-सम्बन्धी विचार
(ख) जीवन के प्रति ज्ञानशंकर का दृष्टिकोण
(ग) बन की भाषा
(घ) सूरदास का वैशिष्ट्य