MHD-14 · June 2012 · हिन्दी

IGNOU MHD-14 June 2012 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

हिन्दी उपन्यास (प्रेमचंद का विशेष अध्ययन) (Hindi Novel - Special Study of Premchand)

Structured previous year question paper for MHD-14, June 2012 session (Hindi medium).

Questions: 6

Verified: 26 Jul 2026

R हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि ( एम.एच.डी. )

a नि

त्य सत्रांत परीक्षा

जून, 2012 *

एम.एच.डी.-14 : हिन्दी उपन्यास-1

समय : 2 घण्टे है अधिकक्म अंक : 50

नोट: पहला और छठा प्रश्न अनिवार्य है। शेष में से किन्हीं दो प्रश्नों के

pL न

Q1.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पद्याशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 10x2=20

(क) विचारों की स्वतन्त्रता विद्या, संगीत और अनुभव पर निर्भर होती है। सदन इन सभी गुणों से रहित था। यह उसके जीवन का वह समय था, जब हमको अपने धार्मिक विचारों पर, अपनी सामाजिक रीतियों पर एक अभिमान- सा होता है। हमें उनमें कोई त्रुटि नहीं दिखाई देती, जब हम अपने धर्म के विरुद्ध कोई प्रमाण या दलील सुनने का साहस नहीं कर सकते, तब हममें क्या और क्‍यों का विकास नहीं होता। सदन को घर से निकल भागना स्वीकार होता, इसके बदले कि वह घर कि स्त्रियों को गंगा नहलाने ले जाए। अगर स्त्रियों की हँसी की आवाज कभी मरदाने में जाती, तो वह तेवर बदले घर में आता और अपनी माँ को आड़े हाथों लेता। सुभद्रा ने अपनी सास का शासन भी ऐसा कठोर न पाया था। आत्मंपतन को वह दार्शनिक की उदार दृष्टि से नहीं, शुष्क योगी की दृष्टि से देखता था।

(ख) अब मैं अपना स्वामी हूँ, मेरी आत्मा स्वच्छन्द है। अब मुझे किसी के सामने घुटने टेकने की जरूरत नहीं। इस दलाली की बदौलत मुझे अपनी आत्मा पर कितने अन्याय करने पड़ते, इसका मुझे कुछ थोड़ा अनुभव हो चुका है। मैं ईश्वर को धन्यवाद देता हूँ कि उसने मुझे इस आत्म- पतन से बचा लिया। मेरा अपने समस्त भाइयों से निवेदन है कि वह एक महीने के अन्दर मेरे मुख्तार के पास जाकर अपने-अपने हिस्से का सरकारी लगान पूछ लें और वह रकम खजाने में जमा कर दें। मैं श्रद्धेय डाक्टर इर्फानअली से प्रार्थना करता हूँ कि वह इस विषय में मेरी सहायता करें और जाब्ते और कानून की जटिल समस्याओं को तै करने की व्यवस्था करें। मुझे आशा है कि मेरे समस्त भ्रातृवर्ग आपस में प्रेम से रहेंगे और जरा-जरा-सी बातों के लिए अदालत की शरण न लेंगे।

(a) [...] (this portion is being re-verified) : ward सेवी हुआ किए हैं पर इससे उनकी कवित्व-कला में कोई दूषण नहीं आने पाया। सम्भव था वे जीवन का विस्तृत और पर्याप्त ज्ञान प्राप्त करके अपनी कविता को और भी मार्मिक बना सकते लेकिन साथ ही यह शंका भी थी कि जीवन-संग्राम में [...] (this portion is being re-verified) उनकी कवि-कल्पना शिथिल हो जाती। होमर अंधा था, सूर भी अंधा था मिल्टन भी अंधा था परन्तु सभी साहित्य- गगन के उज्चल नक्षत्र हैं; तुलसी, वाल्मीकि आदि महाकवि संसार से अलग, कुटियों में बसनेवाले प्राणी थे; पर कौन कह सकता है कि उनकी एकान्तसेवा से उनकी कवित्व- कला दूषित हो गई ! नहीं कह सकता कि भविष्य में मेरे विचार क्या होंगे; पर इस समय द्रव्योपासना से बेजार हो

(घ) कंवार का महीना लग चुका था। मेघ के जल-शून्य टुकड़े कभी-कभी आकाश में दौड़ते नजर आ जाते थे। जालपा छत पर लेटी हुई उन मेघ-खंडों की किलोलें देखा करती। चिंता-व्यधित प्राणियों के लिए इस अधिक मनोरंजन की और वस्तु ही कौन है? बादल के टुकड़े भांति-भांति के रंग बदलते, भांति-भांति के रूप भरते, कभी आपस में प्रेम से मिल जाते, कभी रूठकर अलग-अलग हो जाते; कभी दौड़ने लगते, कभी ठिठक जाते। जालपा सोचती, रमानाथ भी कहीं बैठे यही मेघ-क्रौड़ा देखते होंगे। इस कल्पना में उसे विचित्र आनंद मिलता। किसी माली को अपने लगाए पौधों से, किसी बालक को अपने बनाए हुए घरौंदों से जितनी आत्मीयता होती है, कुछ वैसा ही अनुराग उसे उन आकाशगामी जीवों से होता था। विपत्ति में हमारा मन अंतर्मुखी हो जाता है। जालपा को अब यही शंका होती थी कि ईश्वर ने मेरे पापों का यह दंड दिया

Q2.प्रेमचन्द की साहित्य विषयक अवधारणाओंका तर्कपूर्ण विवेचन. 10 कौजिए।

Q3.‘Sareea’ के आधार पर समाज की वर्गीय संरचना में मध्यवर्ग 10 की स्थिति का विश्लेषण कीजिए।

Q4.“रंगभूमि' पर गांधीवादी प्रभाव की समीक्षा कीजिए।

Q5.“गबन' के औपन्यासिक शिल्प पर विचार कीजिए।

Q6.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणी लिखिए : 2x5=10

(क) “रंगभूमि' में स्वाधीनता आंदोलन

(ख) ‘Sra’ के नारी पात्र

(ग) “गबन' और राष्ट्रीय आंदोलन

(घ) प्रेमचन्द की जीवन दृष्टि