MHD-4 · June 2015 · हिन्दी
IGNOU MHD-4 June 2015 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
नाटक और अन्य गद्य विधाएँ (Drama and Other Prose Forms)
Structured previous year question paper for MHD-4, June 2015 session (Hindi medium).
Questions: 9
Verified: 26 Jul 2026
हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम .ए. हिन्दी)
सत्रांत परीक्षा
ososo0 जून, 2015
एम.एच.डी.-4 : नाटक और अन्य गद्य विधाएँ
, समव :8 घण्टे SEAT HH : 100
नोट ८ प्रथम अल अनिवार्य है / शेष किन्हीं चार रनों के उत्तर
दीजिए /
Q1.निम्नलिखित में से किन्हीं तीन की सन्दर्भ-सहित व्याख्या कीजिए : 3729-36
(क) पहेली ! यह भी रहस्य ही है । पुरुष है कुतूहूल और प्रश्न; और स्त्री है विश्लेषण, उत्तर और सब बातों का समाधान । पुरुष के सब प्रश्नों का उत्तर देने के लिए वह प्रस्तुत है । उसके कुतूहल - उसके अभावों को परिपूर्ण करने का उष्ण प्रयत्न और शीतल उपचार !
(ख) मैं यहाँ थी, तो मुझे कई बार लगता था कि मैं एक घर में नहीं, चिड़ियाघर के एक पिंजरे में रहती हूँ जहाँ आप शायद सोच भी नहीं सकते कि क्या-क्या होता रहा है यहाँ । डैडी का चीखते हुए ममा के कपड़े तार-तार कर देना उनके- मुँह पर पट्टी बाँध कर उन्हें बंद कमरे में पीटना खींचते हुए गुसलखाने में कमोड पर ले जा कर (सिहरकर) मैं तो बयान भी नहीं कर सकती कि कितने-कितने भयानक दृश्य देखे हैं इस घर
(ग) लेकिन शेष मेरा दायित्व लेंगे मेरा दायित्व वह स्थित रहेगा हर मानव के उस वृत्त में ः जिसके सहारे वह सभी परिस्थितियों का अतिक्रमण करते हुए नूतन निर्माण करेगा पिछले ध्वंसों पर !
(घ) जो सर्वथा निराकार होने पर भी मत्स्य, कच्छपादि रूपों में प्रकट होता है, और शुद्ध निर्विकार कहलाने पर भी नाना प्रकार की लीला किया करता है, वह धोखे का पुतला नहीं है तो क्या है ? हम आदर के मारे उसे भ्रम से रहित करते हैं, पर जिसके विषय में कोई निश्चयपूर्वक ‘Sefer (बिल्कुल सही) कह नहीं... सकता, जिसका सारा भेद स्पष्ट रूप से कोई जान ही नहीं सकता, वह निर्भ्रम या भ्रमरहित क्यों कर कहा जा सकता है। (ड) तब तो बंगाल अभी जीवित है ! आज भी वह अपना रास्ता खोज निकालना जानता और चाहता है । भूख से व्याकुल होकर भी यह भारत का संस्कृति-जनक सिर झुकाने को तैयार नहीं है । आज भी वह इन सब आँधी तूफ़ानों को झेलकर फिर से विराट रूप में फूट निकलना चाहता है । सचमुच कोई इनका कुछ नहीं कर सकता । यदि जनता में चेतना है, तो इन्हें भूखों मारने वाले नर-पिशाच नाज-चोरों का अंत दूर नहीं ।
Q2.भारतेन्दु की नाट्य-दृष्टि पर प्रकाश डालिए ।
Q3.रंगमंचीयता की दृष्टि से “स्कंदगुप्त” नाटक का मूल्यांकन कीजिए ।
Q4.हिन्दी नाट्य-परंपरा में “आधे-अधूरे” का स्थान निर्धारित
Q5.काव्य नाटक के रूप में “अंधा युग” की समीक्षा कीजिए ।
Q6.ललित निबंध की दृष्टि से “कुटज” की विशेषताओं का | विवेचन कीजिए ।
Q7.रिखाचित्र' विधा को ध्यान में रखते हुए “ठकुरी बाबा” का मूल्यांकन कीजिए ।
Q8.हिन्दी यात्रा-वृत्तांत की परंपरा में राहुल सांकृत्यायन का क्या योगदान है ? “किन्नर देश की ओर?” को केन्द्र में रखते हुएं ° उत्तर दीजिए । 76.
Q9.निम्नलिखित में से किन्हीं को पर टिप्पणियाँ लिखिए; 98-76
(ख) हिन्दी व्यंग्य निबंध
(ग) बसंत का अग्रदूत
(घ) साहित्यिक विधा के रूप में साक्षात्कार :