MHD-4 · December 2017 · हिन्दी

IGNOU MHD-4 December 2017 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

नाटक और अन्य गद्य विधाएँ (Drama and Other Prose Forms)

Structured previous year question paper for MHD-4, December 2017 session (Hindi medium).

Questions: 9

Verified: 26 Jul 2026

हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)

सत्रांत परीक्षा

13552 दिसम्बर, 2017

एम.एच.डी.-4 : नाटक और अन्य गद्य विधाएँ

समय : 3 घण्टे अधिकतम अंक ; 100

me: ग्रथम ग्रन अनिवार्य है / शेष परों में से किन्हीं चार wat के

उत्तर दीजिए /

Q1.निम्नलिखित में से किन्हीं तीन की सन्दर्भ-सहित व्याख्या कीजिए : 3x12=36

(क) सभी धर्म, समय और देश की स्थिति के अनुसार विवृत होते रहे हैं और होंगे । हम लोगों को हठधर्मिता से उन आगंतुक क्रमिक पूर्णता प्राप्त करने वाले ज्ञानों से मुँह न फेरना चाहिए । हम लोग एक ही मूल धर्म की दो शाखाएँ हैं । आओ, हम दोनों विचार के फूलों से दुःख दग्ध मानवों का कठोर पथ कोमल करें ।

(ख) मैंने कहा था, यह नाटक भी मेरी ही तरह अनिश्चित है । उसका कारण भी यही है कि मैं इसमें हूँ और मेरे होने से ही सब कुछ इसमें निर्धारित या अनिर्धारित है । एक विशेष परिवार, उसकी विशेष परिस्थितियाँ । परिवार दूसरा होने से परिस्थितियाँ बदल जातीं, मैं वही रहता । इसी तरह सब कुछ निर्धारित करता । इस परिवार की स्त्री के स्थान पर कोई दूसरी स्त्री किसी दूसरी तरह से मुझे झेलती या वह स्त्री मेरी भूमिका ले लेती और मैं उसकी भूमिका लेकर उसे झेलता ।

(ग) जो अपने हाथों से फैक्ट्री में भीमकाय मशीनों के चक्के घुमाती है, वह मशीनें, जो उसकी ताक़त को ऐन उसकी आँखों के सामने हर दिन नोंचा करती है एक औरत, जिसके ख़ूने जिगर से ख़ूँबार कंकालों की प्यास बुझती है, एक औरत, जिसका ख़ून बहने से सरमायेदार का मुनाफ़ा बढ़ता है।

(घ) जीवन की ऐसी आकस्मिक घटनाएँ ही वास्तव में जीवन को दिशा देती है, और जिसे हम “नियति' का गंभीर-सा नाम देते हैं वह शायद बहुत नगण्य-सी लगने वाली घटनाओं से अपने बड़े-बड़े लक्ष्य प्राप्त करती है । क्या मेरे अंदर का कहानीकार मर गया ? मरता जीवन में कुछ भी नहीं है, केवल रूप बदलता है । कहानीकार मेरे कवि में आत्मसातू हो गया । (ड) मैं देख रहा था, जिनके शरीर में केवल हड्डियाँ ही शेष थीं आज भी उनमें जीवित रहने का साहस था । अकाल आया, बीमारी आई और फिर दूसरे अकाल की गहरी आँधी भी क्षितिज पर सिर उठाने लगी है, किन्तु अविचलित हैं यह ! किसलिए ? इसीलिए न कि वह जनता किसी से दब नहीं सकती । एक दिन विजेताओं ने इन्हें कुचला था, आज भी मनुष्य का स्वार्थ और भीषण व्यापार इन्हें निचोड़ रहा है, किंतु यह तो अभी तक अदम्य, अविजेय हैं !

Q2.“अंधेर नगरी के नाट्यशिल्प की विशेषताएँ बताइए ।

Q3.स्कंदगुप्त' के परिप्रेक्ष्य में प्रसाद की इतिहास दृष्टि की विवेचना कीजिए |

Q4.आधे-अधूरें! में चित्रित मध्यवर्गीय जीवन पर प्रकाश डालिए ।

Q5.मिथकीय आख्यान के रूप में Sing? a मूल्यांकन कीजिए ।

Q6.“धोखा' निबंध की अंतर्वस्तु पर विचार कीजिए ।

Q7.वसंत का अग्रदूत' की विशेषताएँ बताइए ।

Q8.श्रीकांत वर्मा द्वारा आक्टेवियो पॉज के लिए गए साक्षात्कार में उठे प्रश्नों का विवेचन कीजिए ।

Q9.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए: 98-16

(क) ‘site की कथावस्तु

(ख) “लोभ और प्रीति' का प्रतिपाद्य

(ग) साहित्यिक विधा के रूप में 'जीवनी'

(घ) 5कुरी बाबा' का व्यक्तित्व