MHD-4 · December 2013 · हिन्दी

IGNOU MHD-4 December 2013 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

नाटक और अन्य गद्य विधाएँ (Drama and Other Prose Forms)

Structured previous year question paper for MHD-4, December 2013 session (Hindi medium).

Questions: 10

Verified: 26 Jul 2026

व हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि ( एम.ए. हिन्दी )

2 सत्रांत परीक्षा

दिसम्बर, 2013

एम.एच.डी.-4 _: नाटक और अन्य गद्य विधाएँ

समय : 3 घण्टे अधिकतम अंक ; 100

नोट : पहला ग्रश्न अनिवार्य है। शेष में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

Q1.किन्हीं तीन की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 3x12=36

(क) कविता करना अनंत पुण्य का फल है। इस दुराशा और अनंत उत्कंठा से कवि-जीवन व्यतीत करने कौ इच्छा हुई। संसार के समस्त अभावों को असंतोष कहकर हृदय को धोखा देता रहा। परंतु कैसी विडंबना! लक्ष्मी के लालों का भ्रू-भंग और क्षोभ की ज्वाला के अतिरिक्त मिला क्या! ..एक काल्पनिक प्रशंसनीय जीवन जो दूसरों की दया में अपना अस्तित्व रखता है!

(ख) बादलों ने सूरज की हत्या कर दी, सूरज मर गया। मैं दूसरों का बोझ ढोता हूँ। AR fat में आईने लगे हैं। आईने में मैं अपना मुँह देखता हूँ। सूरज नहीं रहा। अब धरती पर आईनों का शासन होगा। आईने अब उगने और न उगने वाले बीज अलग-अलग कर देंगे।

(ग) सच है, भ्रमोत्पादक भ्रमस्वरूप भगवान के बनाए हुए भव में जो कुछ है, भ्रम ही है। जब तक भ्रम है तभी संसार है aia संसार का स्वामी भी तभी तक है, फिर कुछ भी नहीं! और कौन जाने हो तो हमें उससे कोई काम नहीं! परमेश्वर सबका भ्रम बनाए रखे इसी में सब कुछ है। जहाँ भरम खुल गया वहीं लाख की भलमंसी खाक में मिल जाती है।

(घ) इस देश में अनेक भाषाएँ हैं, अनेक जातियाँ हैं, इन जातियों की अपनी-अपनी संस्कृति हैं। इन सभी जातियों की संस्कृति के सामान्य तत्वों का, उनके समुच्चय का नाम भारतीय संस्कृति हैं। भारत की जातियों से भिन्‍न भारतीय संस्कृति की सत्ता कहीं नहीं है। वर्गों की, जनसाधारण की संस्कृति की कुछ जातीय विशेषताएँ होती हैं। (ड) अब भी 'राम की शक्तिपूजा' अथवा निराला के अनेक गीत बार-बार पढ़ता हूँ, लेकिन 'तुलसीदास' जब-जब पढ़ने बैठता हूँ तो इतना ही नहीं कि एक नया संसार मेरे सामने खुलता है, उस से भी विलक्षण बात यह है कि वह संसार मानो एक ऐतिहासिक अनुक्रम में घटित होता हुआ दिखता है। मैं मानो संसार का एक स्थिर चित्र नहीं बल्कि एक जीवंत चलचित्र देख रहा होता हूँ। ऐसी रचनाएँ तो कई होती हैं जिनमें एक रसिक हृदय बोलता है। बिरली ही रचना ऐसी होती है जिसमें एक सांस्कृतिक चेतना सर्जनात्मक रूप में अवतरित हुई हो।

Q2... “अंधेर नगरी' नाटक में निहित व्यंग्य के आधार पर नाटक की 16 प्रासंगिकता बताइए।

Q3.“स्कंदगुप्त” नाटक के आधार पर प्रसाद की इतिहास दृष्टि पप 16 प्रकाश डालिए।

Q4... मध्यवर्गीय जीवन के परिप्रेक्ष्य में 'आधे-अधूरे' का मूल्यांकन 16 कौजिए।

Q5.“अंधायुग' के किन्हीं दो प्रमुख पात्रों की चारित्रिक विशेषताओं 16 का विश्लेषण कौजिए।

Q6.“धोखा' निबंध की अंतर्वस्तु का विश्लेषण कीजिए।

Q7... ललित निबंध के रूप में 'कुटज' की समीक्षा कीजिए।

Q8.जीवनी साहित्य की श्रेष्ठ उपलब्धि के रूप में 'कलम का सिपाही! 16 का मूल्यांकन कीजिए।

Q9.“बसंत का अग्रदूत' संस्मरण के आधार पर निराला के व्यक्तित्व 16 एवं उनके भावबोध के मुख्य आयामों पर प्रकाश डालिए।

Q10.निम्नलिखित में से ककिन्हीं द्ो पर टिप्पणी लिखिए : 8x2=16

(क) “लोभ और प्रीति' निबंध का वैचारिक पक्ष

(ख) “स्कंदगुप्त” नाटक की भाषा

(ग) असंगत नाटक (ऐब्सर्ड)

(a) “किन्नर देश की ओर' शीर्षक यात्रा वृत्तांत