MHD-4 · December 2014 · हिन्दी

IGNOU MHD-4 December 2014 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

नाटक और अन्य गद्य विधाएँ (Drama and Other Prose Forms)

Structured previous year question paper for MHD-4, December 2014 session (Hindi medium).

Questions: 8

Verified: 26 Jul 2026

हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)

qeene सत्रांत परीक्षा

Ural दिसम्बर, 2014

एम.एच.डी.-4 : नाटक और अन्य गद्य विधाएँ

समय : 3 घण्टे अधिकव्म अंक : 100

me: ग्थम अल अनिवार्य है / शेष किन्हीं चार ग्रशनों के उत्तर

दीजिए /

Q1.किन्हीं तीन की सन्दर्भ-सहित व्याख्या कीजिए : 3x12=36

(क) कौन कहता है कि तुम अकेले हो ? समग्र संसार तुम्हारे साथ है । स्वानुभूति को जागृत करो । यदि भविष्यत्‌ से डरते हो कि तुम्हारा पतन समीप है, तो तुम उस अनिवार्य स्रोत से जुड़ जाओ । तुम्हारे प्रचंड और विश्वासपूर्ण पदाघात से विंध्य के समान कोई शैल उठ खड़ा होगा, जो उस विध्न-स्रोत को लौटा देगा !

(ख) मैंने कहा था, यह नाटक भी मेरी ही तरह अनिश्चित है । उसका कारण भी यही है कि मैं इसमें हूँ और मेरे होने से ही सब कुछ इसमें निर्धारित या अनिर्धारित है । एक विशेष परिवार, उसकी विशेष परिस्थितियाँ ! परिवार दूसरा होने से परिस्थितियाँ बदल जाती, मैं वही रहता । इसी तरह सब कुछ निर्धारित करता | इस परिवार की स्त्री के स्थान पर कोई दूसरी स्त्री किसी . दूसरी तरह से मुझे झेलती या वह स्त्री मेरी भूमिका ले लेती और मैं उसकी भूमिका ले कर उसे झेलता ।

(ग) पृथ्वी पर र्समय वनस्पति नहीं होगी शिशु होंगे पैदा विकलांग और कुष्ठग्रस्त सारी मनुष्य जाति बौनी हो जाएगी जो कुछ भी ज्ञान संचित किया है मनुष्य ने सतयुग में, त्रेता में, द्वापर में सदा-सदा के लिए होगा विलीन वह गेहूँ की बालों में सर्प फुफकारेंगे नदियों में बह-बह कर आयेगी पिघली आग ।

(घ) याज्ञवल्क्य ने जो बात धक्कामार ढंग से कह दी थी वह अंतिम नहीं थी । वे 'आत्मन: का अर्थ कुछ और बड़ा करना चाहते थे । व्यक्ति की आत्मा' केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं है, वह व्यापक है । अपने में सब और सब में आप - इस प्रकार की एक समष्टि-बुद्धि जब तक नहीं आती तब तक पूर्ण सुख का आनन्द भी नहीं मिलता । (ड) अब भी उस अनुभव को याद करता हूँ तो मानो एक गहराई में खो जाता हूँ । अब भी राम की शक्तिपूजा' अथवा निराला के अनेक गीत बार-बार पढ़ता हूँ, लेकिन तुलसीदास जब-जब पढ़ने बैठता हूँ तो इतना ही नहीं कि एक नया संसार मेरे सामने खुलता है, उससे भी विलक्षण बात यह है कि वह संसार मानो एक ऐतिहासिक अमनुक्रम में घटित होता हुआ दिखता है । मैं मानो संसार का एक स्थिर चित्र नहीं बल्कि एंक जीवंत चलचित्र देख रहा होता हूँ ।

Q2.हिन्दी नाट्य-परम्परा को “अंधेर नगरी” नाटक ने किस तरह से प्रभावित किया है ? अपना मत प्रस्तुत कीजिए ।

Q3.स्कंदगुप्त' नाटक के माध्यम से जयशंकर प्रसाद ने इतिहास का वर्तमान सन्दर्भों में किस प्रकार उपयोग किया है ? सोदाहरण उत्तर दीजिए ।

Q4.मोहन राकेश की नाट्य दृष्टि पर प्रकाश डालिए ।

Q5.“अंधायुग में मिथकीय आख्यान को आधुनिक संदर्भों में प्रस्तुत किया गया है ।” इस कथन का तर्कसंगत विवेचन कीजिए ।

Q6.“लोभ और प्रीति” निबन्ध के आधार पर आचार्य शुक्ल की निबन्ध शैली की विशेषताएँ बताइए । 76 पर. “तीसरे दर्जे का श्रद्धेय” में बुद्धिजीवियों पर किए गए व्यंग्य का विश्लेषण कीजिए ।

Q7.आत्मकथा की विशेषताओं के सन्दर्भ में “क्या भूलूँ क्या याद करूँ” का मूल्यांकन कीजिए ।

Q8.निम्नलिखित में से किन्हीं को पर टिप्पणियाँ लिखिए: 98576

(क) नुक्कड़ नाटक

(ख) ठकुरी बाबा

(ग) आत्मकथा और जीवनी

(घ) हिन्दी जातीयता