MHD-4 · December 2015 · हिन्दी
IGNOU MHD-4 December 2015 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
नाटक और अन्य गद्य विधाएँ (Drama and Other Prose Forms)
Structured previous year question paper for MHD-4, December 2015 session (Hindi medium).
Questions: 9
Verified: 26 Jul 2026
हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)
सत्रांत परीक्षा
दिसम्बर, 2015
एम.एच.डी.-4 : नाटक और अन्य गद्य विधाएँ
समय : 3 घण्टे अधिकत्य अक : 100
me: प्रथम ग्रश्न अनिवार्य है / शेष किन्हीं चार अश्नों के उत्तर
दीजिए /
Q1.निम्नलिखित में से किन्हीं तीबन की सन्दर्भ-सहित व्याख्या कीजिए : 3x12=36
(क) सरल युवक ! इस गतिशील जगत में परिवर्तन पर आश्चर्य ! परिवर्तन रुका कि महापरिवर्तन - प्रलय - हुआ ! परिवर्तन ही सृष्टि है, जीवन है, स्थिर होना मृत्यु है, निश्चेष्ट शांति मरण है । प्रकृति क्रियाशील है । समय पुरुष और स्त्री की गेंद लेकर दोनों हाथ से खेलता है । पुंल्लिंग और स्त्रीलिंग की समष्टि अभिव्यक्ति की कुंजी है । पुरुष उछाल दिया जाता है, उत्क्षेपण होता है । स्त्री आकर्षण करती है । यही जड़ प्रकृति का चेतन रहस्य है ।
(ख) मैंने कहा था यह नाटक भी मेरी ही तरह अनिश्चित है । उसका कारण भी यही है कि मैं इसमें हूँ और मेरे होने से ही सब कुछ इसमें निर्धारित या अनिर्धारित है । एक विशेष परिवार, उसकी विशेष परिस्थितियाँ ! परिवार दूसरा होने से परिस्थितियाँ बदल जातीं, मैं वही रहता । इसी तरह सब कुछ निर्धारित करता । इस परिवार की स्त्री के स्थान पर कोई दूसरी स्त्री किसी दूसरी तरह से मुझे झेलती या वह स्त्री मेरी भूमिका ले... लेती और मैं उसकी भूमिका ले कर उसे झेलता । नाटक अंत तक फिर भी इतना ही कठिन होता कि इसमें मुख्य भूमिका किसकी थी - मेरी, उस स्त्री की, परिस्थितियों की, या तीनों के बीच से उठते कुछ
(ग) संस्कृति थी यह एक बूढ़े और अंधे की जिसकी संतानों ने महायुद्ध घोषित किए, जिसके अंधेपन में मर्यादा गलित अंग वेश्या-स्त्री प्रजाजनों को भी रोगी बनाती फिरी उस अंधी संस्कृति, उस रोगी मर्यादा की रक्षा हम करते रहे
(घ) यों ही किसी को धोखा देना हो तो इस रीति से दो कि तुम्हारी चालबाजी कोई भाँप न सके, और तुम्हारा बलि पशु यदि किसी कारण से तुम्हारे हथकंडे ताड़-भी जाय तो किसी से प्रकाशित करने के काम का न रहे । फिर बस अपनी चतुरता के मधुर फल को मूर्खों के आँसू तथा गुरुघंटालों के धन्यवाद की वर्षा के जल से धो और स्वादपूर्वक खा ! इन दो रीतियों से धोखा बुरा नहीं है । अगले लोग कह गए हैं कि आदमी कुछ खो के सीखता है, अर्थात् धोखा खाए बिना अक्विल नहीं आती, और बेईमानी तथा नीति कुशलता में इतना ही भेद है कि जाहिर हो जाय तो बेईमानी कहलाती है और छिपी रहे तो बुद्धिमानी है । (ड) इसके बाद की जिस भेंट का उल्लेख करना चाहता हूँ. उससे पहले निराला जी के काव्य के विषय में मेरा मन पूरी तरह बदल चुका था । वह परिवर्तन कुछ नाटकीय ढंग से ही हुआ । शायद कुछ पाठकों के लिए यह भी आश्चर्य की बात होगी कि वह उनकी Get At कली अथवा. राम की शक्ति पूजा' पढ़ कर नहीं हुआ, उनका “तुलसीदास” पढ़ कर हुआ । अब भी उस अनुभव को याद करता हूँ तो मानो एक गहराई में खो जाता हूँ । अब भी “राम की शक्ति पूजा” अथवा निराला के अनेक गीत बार-बार पढ़ता हूँ, लेकिन 'तुलसीदास' जब-जब पढ़ने बैठता हूँ तो इतना ही नहीं कि एक नया संसार मेरे सामने खुलता है, उससे भी विलक्षण बात यह कि वह संसार मानो एक ऐतिहासिक अनुक्रम में घटित होता हुआ दीखता है ।
Q2.भारतेन्दु के नाटक “अंधेर नगरी ने परवर्ती हिन्दी नाट्य परम्परा को किस प्रकार प्रभावित किया है ?
Q3.“ स्कंदगुप्त' नाटक में जयशंकर प्रसाद ने भारतीय इतिहास के माध्यम से वर्तमान के प्रश्नों को उभारने का प्रयास किया है ।” इस कथन की समीक्षा कीजिए ।
Q4.“ “अंधा युग में पौराणिक आख्यान के माध्यम से मौजूदा समय के राजनीतिक-सामाजिक मूल्यों के विघटन को उजागर किया गया है ।” अपना मत प्रकट करते हुए तार्किक विवेचन कीजिए ।
Q5.आधे अधूरे! के नाट्य शिल्प की विशेषताएँ बताइए ।
Q6.रामचंद्र शुक्ल के भाव और मनोविकार संबंधी निबंधों के संदर्भ में “लोभ और प्रीति' की विशेषताएँ बताइए । 16 7 कुरजं के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है ? सोदाहरण उल्लेख कीजिए ।
Q7.रेखाचित्र की विशेषताओं के संदर्भ में 'ठकुरी बाबा का विश्लेषण और मूल्यांकन कीजिए ।
Q8.“ऑक््टोवियो पॉज' को दृष्टि में रखते हुए एक साहित्यिक विधा के रूप में साक्षात्कार के महत्त्व और प्रासंगिकता पर प्रकाश डालिए ।
Q9.निम्नलिखित में से किन्हीं को पर टिप्पणियाँ लिखिए: 96-16
(क) असंगत (एब्सर्ड) नाटक
(ख) “कलम का सिपाही
(ग) हरिशंकर परसाई का व्यंग्य
(a) रिपोर्ताज