MHD-10 · June 2025 · हिन्दी

IGNOU MHD-10 June 2025 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

प्रेमचंद की कहानियाँ (Premchand's Stories)

Structured previous year question paper for MHD-10, June 2025 session (Hindi medium).

Questions: 7

Verified: 26 Jul 2026

हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम. ए. हिन्दी)

(एम.एच.डी.)

सत्रांत परीक्षा

जून, 2025

एम.एच.डी.-10 : प्रेमचन्द की कहानियाँ

समय : 2 घण्टे अधिकतम अंक : 50

नोट ; प्रथम प्रश्न अनिवार्य है। शेष में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर

दीजिए।

Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं दो की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 2x10=20

(क) रूपा को अपनी स्वार्थपरता और अन्याय इस प्रकार प्रत्यक्ष रूप में कभी न देख पड़े थे। वह सोचने लगी-हाय! कितनी निर्दय हूँ। जिसकी सम्पत्ति से मुझे दो सौ रुपया वार्षिक आय हो रही है, उसकी यह दुर्गति! और मेरे कारण! हे दयामय भगवान मुझसे बड़ी भारी चूक हुई है, मुझे क्षमा करो। आज मेरे बेटे का तिलक था। सैकड़ों मनुष्यों ने भोजन पाया। मैं उनके इशारों की दासी बनी रही। अपने नाम के लिए सैकड़ों रुपये व्यय कर दिये; परन्तु जिसकी बदौलत हजारों रुपये खाये, उसे इस उत्सव में भी भरपेट भोजन न दे सकी। केवल इसी कारण तो यह वृद्धा असहाय

(ख) वकीलों ने यह फैसला सुना और उछल पड़े। पंडित आलोपीदीन मुस्कराते हुए बाहर निकले। स्वजन बांधवों ने रुपयों की लूट की। उदारता का सागर उमड़ पड़ा। उसकी लहरों ने अदालत की नींव तक हिला दी। जब वंशीधर बाहर निकले तो चारों ओर से उनके ऊपर व्यंग्य वाणों की वर्षा होने लगी। चपरासियों ने झुक-झुक कर सलाम किये। किन्तु इस समय एक-एक कटुवाक्य, एक-एक संकेत उनकी गर्वाग्नि को प्रज्वलित कर रहा था।

(ग) यह कहते हुए नायक ने गाँववालों को समझाया- भाइयो, मैं आपसे कह चुका हूँ, यह न्याय और धर्म की लड़ाई है। और हमें न्याय और धर्म के हथियार से ही लड़ना है। हमें अपने भाइयों से नहीं लड़ना है। हमें तो किसी से भी लड़ना नहीं है। दारोगा की जगह कोई अँगरेज होता, तो भी हम उसकी इतनी ही रक्षा करते। दारोगा ने कोदई चौधरी को गिरफ्तार किया है। मैं इसे चौधरी का सौभाग्य समझता हूँ। धन्य हैं वे लोग जो आजादी की लड़ाई में सजा पाये। यह बिगड़ने या घबड़ाने की बात नहीं है। आप लोग हट जाएँ और

(घ) संध्या हो गयी। अँधेरा छा रहा था। सुभागी ने दीया जलाकर गिरधारी के सिरहाने रख दिया था और बैठी द्वार की ओर ताक रही थी कि सहसा उसे पैरों की आहट मालूम हुई। सुभागी का हृदय धड़क उठा। वह दौड़कर बाहर आयी, और इधर-उधर ताकने लगी। उसने देखा कि गिरधारी बैलों की नाद के पास सिर झुकाये खड़ा है।

Q2.प्रेमचन्द की राष्ट्रवाद विषयक दृष्टि का विश्लेषण कीजिए।

Q3.“मनोवृत्ति! कहानी का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।

Q4.हिन्दी कहानी में प्रेमचन्द का स्थान निर्धारित कीजिए।._10

Q5.“विध्व॑ंस' कहानी की प्रासंगिकता पर विचार कीजिए।

Q6.“सुजान भगत” कहानी के शिल्प एवं भाषा पर प्रकाश डालिए।

Q7.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए :

(क) आधुनिक दलित संदर्भ और प्रेमचन्द

(ख) पारिवारिक यथार्थ और 'सुजान भगत'

(ग) “गुल्ली-डंडा' में व्यक्त जीवन-मूल्य

(घ) प्रेमचन्द की कहानियाँ और रामविलास शर्मा