MHD-10 · June 2022 · हिन्दी

IGNOU MHD-10 June 2022 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

प्रेमचंद की कहानियाँ (Premchand's Stories)

Structured previous year question paper for MHD-10, June 2022 session (Hindi medium).

Questions: 6 · Sections: 1

Verified: 26 Jul 2026

हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)

सत्रांत परीक्षा

जून, 2022

एम.एच .डी.-10 : प्रेमचंद की कहानियाँ

समय : 2 घण्टे अधिकतम अंक : 50

नोट: प्रथम प्रश्न अनिवार्य है / शेष में से किन्हीं तीन ग्श्नों के उत्तर

दीजिए /

Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं क्रो की सन्दर्भ-सहित व्याख्या कीजिए : 2x10=20

(क) आज वह पूजन-गृह से निकले, तो देखा दुखी चमार घास का एक गटूठा लिए बैठा है । दुखी उन्हें देखते ही उठ खड़ा हुआ और उन्हें साष्टांग दंडबत करके हाथ बाँधकर खड़ा हो गया । यह तेजस्वी मूर्ति देखकर उसका हृदय श्रद्धा से परिपूर्ण हो गया । कितनी दिव्य मूर्ति थी । छोटा-सा गोल-मटोल आदमी, चिकना सिर, फूले गाल, ब्रह्म तेज से प्रदीप्त आँखे | रोरी और चंदन देवताओं की प्रतिमा प्रदान कर रही थी । दुखी को देखकर श्रीमुख से बोले - आज कैसे चला रे दुखिया ? दुखी ने सिर झुका कर के कहा - बिटिया की सगाई कर रहा हूँ महाराज । कुछ साइत-सगुन विचारना है, कब मर्जी होगी ?

(ख) दोनों मित्रों को जीवन में पहली बार ऐसा साबिका पड़ा कि सारा दिन बीत गया और खाने का एक तिनका भी न मिला । समझ में न आता था, यह कैसा स्वामी है । इससे तो गया फिर भी अच्छा था । यहाँ कई भैंसें थीं, कई बकरियाँ, कई घोड़े, कई गधे; पर किसी के सामने चारा न था, सब ज़मीन पर मुरदों की तरह पड़े थे | कई तो इतने कमजोर हो गए थे कि खड़े भी न हो सकते थे । सारा दिन दोनों मित्र फाटक की ओर टकटकी लगाए ताकते रहे; पर कोई चारा लेकर आता न दिखाई दिया । तब दोनों ने दीवार की नमकीन मिट्टी चाटनी शुरू की, पर इससे क्‍या तृप्ति होती ?

(ग) फूलमती की सम्पूर्ण आत्मा मानो इस वज्रपात से चीत्कार करने लगी । उसके मुख से जलती हुई चिनगारियों की भाँति यह शब्द निकल पड़े - मैंने घर बनवाया, मैंने सम्पत्ति जोड़ी, मैंने तुम्हें जन्म दिया, पाला और आज मैं इस घर में गैर हूँ ? मनु का यही कानून है और तुम उसी कानून पर चलना चाहते हो ? अच्छी बात है । अपना घरनद्वार लो । मुझे तुम्हारी अश्रिता बनकर रहना स्वीकार नहीं । इससे कहीं अच्छा है कि मर जाऊँ । वाह रे अन्धेरा । मैंने पेड़ लगाया और मैं ही उसकी छाँह में खड़ी हो नहीं सकती; अगर यही कानून है, तो इसमें आग लग जाए ।

(घ) समूह स्थिर भाव से खड़ा हो गया, जैसे बहता हुआ पानी मेड़ से रुक गया । भय का धुआँ जो लोगों के हृदय पर छा गया था, एकाएक हट गया । उनके चेहरे कठोर हो गए, दारोगा ने उनके तेवर देखे, तो तुरंत घोड़े पर सवार हो गया और कोढई को गिरफ़्तार करने का हुक्म दिया । दो सिपाहियों ने बढ़ कर कोढ़ई की बाँह पकड़ ली । कोढई ने कहा - घबड़ाते क्‍यों हो, मैं कहीं

भागूँगा नहीं । चलो, कहाँ चलते हो ।

Q2.प्रेमचंद की राष्ट्रवाद विषयक दृष्टि पर प्रकाश डालते हुए उनकी कहानियों में वर्णित राष्ट्रवाद का विश्लेषण कीजिए ।

Q3.प्रेमचंद की कहानी-कला के मूल तत्त्वों का विश्लेषण कीजिए ।

Q4.मनोवृत्ति' कहानी की समीक्षा कीजिए ।

Q5.गुल्ली डण्डा कहानी की प्रासंगिकता को रेखांकित कीजिए ।

Q6.ईदगाह कहानी की मूल संवेदना को स्पष्ट कीजिए । 10 प्र. निम्नलिखित में से किन्हीं ढ्ो पर टिप्पणियाँ लिखिए: 2x5=10

(क) धार्मिक पाखंड और प्रेमचंद (@) समय्ययात्रा : देशप्रेम और राष्ट्रीय चेतना का प्रतिदर्श

(ग) प्रेमचंद की नारी विषयक दृष्टि

(घ) सवासेर गेहूँ कहानी का मूल प्रतिपाद्य