MHD-10 · June 2018 · हिन्दी

IGNOU MHD-10 June 2018 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

प्रेमचंद की कहानियाँ (Premchand's Stories)

Structured previous year question paper for MHD-10, June 2018 session (Hindi medium).

Questions: 7

Verified: 26 Jul 2026

हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)

सत्रांत परीक्षा *

एछाणत्छ रऊ

जून, 2018

एम.एच.डी.-10 : प्रेमचंद की कहानियाँ

समव : 2 घण्टे अधिकतय अंक : 50

me: प्रथम प्रश्न अनिवार्य है / शेष उरनों में से किन्हीं तीन उरश्नों के

उत्तर दीजिए ।

Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं क्रो की सन्दर्भ-सहित व्याख्या कीजिए : 2x10=20

(क) आधी रात जा चुकी थी, आकाश पर तारों के थाल सजे हुए थे और उन पर बैठे हुए देवगण स्वर्गीय पदार्थ सजा रहे थे, परंतु उनमें किसी को वह परमानंद प्राप्त न हो सकता था, जो बूढ़ी काकी को अपने सम्मुख थाल देख कर प्राप्त हुआ । रूपा ने कंठावरुद्ध स्वर में कहा - काकी उठो, भोजन कर लो । मुझसे आज बड़ी , भूल हुई, उसका बुरा न मानना । परमात्मा से प्रार्थना * कर दो.कि वह मेरा अपराध क्षमा कर दें ।

(ख) इस प्रकार एक सप्ताह बीत गया । संध्या का समय था । बूढ़े मुंशी जी, बैठे राम-नाम की माला जप रहे थे । इसी समय उनके द्वार पर सजा हुआ रथ आ कर रुका । हरे और गुलाबी परदे, पछाहियें बैलों की जोड़ी, उनकी गर्दनों में नीले धागे, सींगें पीतल से जड़ी हुई । कई नौकर लाठियाँ कंधों पर रखे साथ थे । मुंशी जी अगवानी को दौड़े । देखा तो पंडित अलापादीन है । झुक कर दंडवत्‌ की और लल्लो-चप्पो की बातें करने लगे, हमारा भाग्य उदय हुआ जो आपके चरण इस द्वार पर आये । आप हमारे पूज्य देवता हैं, आपको कौन-सा मुँह दिखावें, मुँह में तो कालिख लगी हुई है किन्तु क्या करें, लड़का अभागा कपूत है, नहीं तो आपसे क्‍यों मुँह छिपाना पड़ता ? ईश्वर निस्संतान चाहे THE पर ऐसी संतान न दे ।

(ग) उस सुहावने-सुनहले प्रभात में जैसे उमंग घुली हुई थी । समीर के हल्के-हल्के झोंकों में, प्रकाश की हल्की-हल्की किरणों में उमंग सनी हुई थी । लोग जैसे दीवाने हो गये थे । मानों आज़ादी की देवी उन्हें अपनी . ओर बुला रही हो, वही खेत-खलिहान हैं, वही बाग-बगीचे हैं, वही स्त्री-पुरुष हैं पर आज के प्रभात में जो आशीर्वाद है, जो वरदान है, जो विभूति है, वह और कभी न थी । वही खेत-खलिहान, बाग-बगीचे, स्त्री-पुरुष आज एक नयी विभूति में रंग गये हैं ।

(3) गिरधारी को गायब हुए छ: महीने बीत चुके हैं | उसका बड़ा लड़का अब एक ईंट के भट्ठे पर काम करता है और बीस रुपये महीना घर आता है । अब वह कमीज़ और अंग्रेज़ी जूता पहनता है; घर में दोनों जून तंरकारी पकती है और जौ के बदले गेहूँ खाया जाता है; लेकिन गाँव में उसका कुछ भी आदर नहीं. | वह अब मजूरा है । सुभागी अब पराये गाँव में आये हुए कुत्ते की भाँति दुबकती फिरती है । वह अब पंचायत में नहीं बैठती । वह अब मजूर की माँ है | कालिकादीन ने गिरधारी के खेतों से इस्तीफ़ा दे दिया है, क्योंकि गिरधारी अभी तक अपने खेतों के चारों तरफ मँडराया करता है । अँधेरा होते ही वह मेड़ पर आकर बैठ जाता है । और कभी-कभी रात को उधर से उसके रोने की आवाज़ सुनायी देती है | वह-किसी से बोलता नहीं, किसी को . छेड़ता नहीं । उसे केवल अपने खेतों को देख कर संतोष * होता है। दीया जलने के बाद उधर का रास्ता बंद हो

Q2.प्रेमचंद के स्त्री-सम्बन्धी दृष्टिकोण को स्पष्ट कीजिए ।

Q3..एक कहानीकार के रूप में प्रेमचंद का महत्त्व निर्धारित

Q4.'सुजान भगत का विश्लेषण करते हुए उसका महत्त्व निर्धारित

Q5.स्वाधीनता-आन्दोलन के संदर्भ में जुलूस'ं का विवेचन

Q6.बेटों वाली विधवा' के प्रतिपाद्य को रेखांकित कीजिए ।

Q7.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए: 96510

(क) किसान-समस्या और प्रेमचंद :

(ख) “मनोवृत्ति' कहानी का मंतव्य

(ग) प्रेमचंद की कहानियाँ और रामविलास शर्मा

(घ) प्रेमचंद की कहानियों में दलित जीवन