MHD-10 · June 2020 · हिन्दी
IGNOU MHD-10 June 2020 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
प्रेमचंद की कहानियाँ (Premchand's Stories)
Structured previous year question paper for MHD-10, June 2020 session (Hindi medium).
Questions: 7
Verified: 26 Jul 2026
- कला में स्नातकोत्तर ( हिन्दी )
सत्रांत परीक्षा
जून, 2020
एम. एच. डी.-10 : प्रेमचंद की कहानियाँ
* समय : 2 घण्टे अधिकतम अके : 50
नोट : 6) प्रथम प्रश्न अनिवार्य है।
69 शेष में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर
दीजिए।
Q1.निम्मलिखित गद्यांशों में से किन्हीं वो की सन्दर्भ सहित व्याख्या कीजिए : [...] (this portion is being re-verified) .
(क) एक दिन- संध्या समय, होस्टल से दूर मैं एक कनकौआ लूटने बेतहाशा दौड़ा जा रहा था। आँखें आसमान की ओर थीं और मन उस आकाशगामी चथिक की ओर, जो मन्द गति से झुमता पतन की ओर चला जा रहा था, मानो कोई आत्मा स्वर्ग से निकलकर विरक्त मन से नये संस्कार , . ग्रहण करने आ रही हो। बालकों की पूरी सेना लग्गे और झाड़दार बाँस लिये इनका स्वागत करने को दौडी आ रही थी। किसी को अपने है आगे-पीछे की ख़बर न थी। सभी मानो उस पतंग / .. के साथ ही आकाश में उड़ रहे थे, जहाँ सब कुछ समतल है, न मोटरकारें हैं, ट्राम, न गाड़ियाँ।
(a) प्रिय आनन्द ः मैं जानता हूँ कि मैं जो कुछ करने जा रहा हूँ वह मेरे लिए हितकर नहीं है; पर न जाने कौन-सी > शक्ति मुझे खींचे लिये जा रही है। मैं जाना नहीं रे चाहता, पर जाता हूँ, उसी तरह जैसे आदमी मरना नहीं चाहता, पर मरता है; रोना नहीं चाहता; पर ta है। जब सभी लोग, जिन पर हमारी भक्ति | , है, ओखली में अपना सिर डाल चुके थे, तर मेरे » लिए भी अब कोई दूसरा मार्ग नहीं है। मैं अब और अपनी आत्मा को धोखा नहीं दे सकता। यह इज्जत का सवाल है, और इज्जत किसी तरह का .- समझौता नहीं कर सकती। तुम्हारा- PRA
(ग) लेकिन गधे का एक छोटा भाई और भी है, जो उससे कम ही गधा है, और वह है “बैल'। जिस अर्थ में हम गधा का प्रयोग करते हैं; कुछ उसी से मिलते-जुलते अर्थ में 'बछिया के ताऊ' का भी प्रयोग करते हैं। कुछ लोग बैल को शायद बेवकाफों में सर्वश्रेष्ठ कहेंगे; मगर हमारा विचार ऐसा नहीं है। बैल कभी-कभी मारता भी है, कभी-कभी अडियल बैल भी देखने में आता है। और भी कई रीतियों में अपना असन्तोष प्रकट कर देता है; अतएव उसका स्थान गधे से नीचा 7 ६ है। ©
(8) दुखी अपने होश में न था। न जाने कौन-सी गुप्त शक्ति उसके हाथों को चला रही थी। उसकी थकान, भूख, कमजोरी सब मानो भाग गई। उसे अपने बाहुबल पर स्वयं आश्चर्य हो रहा था। एक-एक चोट वज्र की तरह पड़ती थी। आध घण्टे तक वह इसी उन्माद की दशा में हाथ चलाता रहा, यहाँ तक कि लकड़ी बीच से फट े गई और दुखी के हाथ से कुल्हाड़ी छूटकर गिर पड़ी। इसके साथ ही वह भी चक्कर खाकर गिर | TST भूखा, प्यासा, थका हुआ शरीर जंवाब दे
Q2.स्वाधीनता आन्दोलन के सन्दर्भ में प्रेमचंद की कहानियों का विश्लेषण कीजिए।
Q3.प्रेमचंद की कहानी-कला पर प्रकाश डालिए|
Q4.“बेटों वाली विधवा' कहानी की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालिए।
Q5.“जुलूस' कहानी की मूल संवेदना को स्पष्ट 'कीजिए।
Q6.“सवा सेर गेहूँ' कहानी का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए। ,
Q7.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ कीजिए : ह * प्रत्येक 5
(क) आधुनिक दलित सन्दर्भ और प्रेमचंद
(ख) वृद्धावस्था की मनोवैज्ञानितता और
(ग) पारिवारिक यथार्थ बनाम 'सुजान भगत'
(घ) औपनिवेशिक we व्यवस्था. और ह प्रेमचंद - काप्0-0.. .