MHD-10 · December 2019 · हिन्दी
IGNOU MHD-10 December 2019 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
प्रेमचंद की कहानियाँ (Premchand's Stories)
Structured previous year question paper for MHD-10, December 2019 session (Hindi medium).
Questions: 8
Verified: 26 Jul 2026
मुद्रित पृष्ठों की संख्या : 7 एम.एच.डी.-10
हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि ( एम. ए. हिन्दी )
सत्रांत परीक्षा
दिसम्बर, 2019
'एम.एच:.डी.-10 : प्रेमचंद की कहानियाँ
समय : 2 घण्टे अधिकतम अंक : 50
नोट : प्रथम प्रश्न अनिवार्य है। शेष में से जता प्रथम प्रन अजिवान हे। खत में से किन्हों तीन तीन
ग्रश्नों के उत्तर दीजिए।
Q1.मिम्मलिखित गद्यांशों में से क्िन्हीं दो की सन्दर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 2x10=20 {2] एमएचडी.-10...
(क) तीन महीने और गुजर गये। माँ के गहनों पर हाथ साफ करके चारों भाई उसकी दिलजोई करने लगे थे। अपनी स्त्रियों को भी समझाते रहते थे कि उसका दिल न दुखायें। अगर थोड़े शिष्टाचार से उसकी आत्मा को शान्ति मिलती है, तो इसमें क्या हानि है। चारों करते अपने मन की, पर माता से सलाह ले लेते। या ऐसा जाल फैलाते कि वह सरला उनकी बातों में आ जाती और हरेक काम में सहमत हो जाती। बाग_को बेचना उसे बहुत बुरा लगता था; लेकिन चारों ने ऐसी माया रची - कि वह उसे बेचने पर राजी हो गयी; किन्तु कुमुद के विवाह के विषय में मतैक्य न हो सका। माँ पं. मुरारीलाल पर जमी हुई थी, लड़के दीनदयाल पर अडे हुए थे। एक दिन आपस में कलह हो गया।
Q2.एम.एच.डी.-10
(ख) मगर टाइम-टेबिल बना लेना एक बात है, उस पर अमल करना दूसरी बात। पहले ही दिन उसकी अवहेलना शुरू हो जाती। मैदान की वह सुखद ' हरियाली, हवा के हल्के-हल्के झोंके, फुटबाल की तरह उछलकूद, कबड्डी के वह दाँव-घात, वॉलीबाल की वह तेजी और फुरती, मुझे अज्ञात और अनिवार्य रूप से खींच ले जाती और वहाँ जाते ही मैं सब कुछ भूल जाता। वह जानलेवा टाइम-टेबिल, आँखफोड् पुस्तकें, किसी को याद न रहती, और भाई साहब को " नसीहत और 'फजीहत का अवसर मिल जाता। मैं उनके साये से भागता, उनकी आँखों से दूर रहने की चेष्टा करता, कमरे में इस तरह दबे पाँव आता कि उन्हें . खबर न हो। उनकी नजर मेरी ओर उठी और मेरे प्राण निकले। हमेशा सिर पर एक नंगी [4] एम.एच.डी.-10 तलवार-सी लटकती मालूम होती है। फिर भी जैसे मौत और विपत्ति के बीच भी आदमी मोह और माया के बन्धन में जकड़ा रहता है, में 'फटकार और घुड़कियाँ खाकर भी खेल-कूद का तिरस्कार न कर सकता।
(ग) रूपमणि ने आवेश में कहा-अंगर स्वराज्य आने पर भी सम्पत्ति का यही प्रभुत्व रहे और पढ़ा-लिखा समाज यों ही स्वार्थान्ध बना रहे, तो मैं कहूँगी, ऐसे स्वराज्य का न आमा ही अच्छा। अंग्रेजी महाजनों की धन-लोलुपता और शिक्षितों का स्वहित ही आज हमें पीसे डाल रहा है। जिन बुराइयों को दूर करने के लिए आज हम प्राणों को हथेली पर लिए हुए हैं, उन्हीं बुराइयों को कया प्रजा इसलिए सिर चढ्येगी कि वे विदेशी नहीं, स्वदेशी हैं? कम-से-कम मेरे लिए तो स्वराज्य का यह अर्थ / 18] ... एम.एच,डी.-10 नहीं है कि जॉन की जगह गोविन्द बैठ जायँ। मैं समाज की ऐसी व्यवस्था देखना चाहती हूँ, जहाँ कम-से-कम विषमता को आश्रय न मिल सके।
(घ) शंकर काँप उठा। हम पढ़े-लिखे आदमी होते तो कह देते, अच्छी बात है, ईश्वर के घर ही देंगे; वहाँ की तौल यहाँ से कुछ बड़ी तो न होगी। कम-से-कम.- -इसक्रत्न कोई प्रमाण हमारे पास नहीं, फिर उसकी क्या चिन्ता किन्तु शंकर इतना तार्किक, इतना व्यवहार-चतुर न- था। एक तो ऋण-वह भी ब्राह्मण का-बहीं में नाम रह गया तो सीधे नरक में जाऊँगा, इस ख्याल ही से उसे रोमांच हो गया। बोला--महाराज, तुम्हारा. जितना होगा यहीं दूँगा, ईश्वर के यहाँ क्यों दूँ, इस जनम में तो ठोकर खा है ही रहा हूँ, उस जनम के लिए क्यों काँटे बोऊँ? मगर यह कोई नियाव नहीं है। तुमने राई का पर्वत [6] ‘ एम.एच.डी.-10 हु बना दिया, ब्राह्मण हो के तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। उसी घड़ी तगादा करके ले लिया होता, तो आज मेरे सिर पर इतना बड़ा बोझ क्यों पड़ता। मैं तो दे दूँगा, लेकिन तुम्हें भगवान् के यहाँ जवाब
Q3.प्रेमचंद की स्वाधीनता सम्बन्धी दृष्टि को स्पष्ट करते हुए उनकी कहानियों में चित्रित स्वाधीनता आन्दोलन को रेखांकित कीजिए।
Q4.कहानीकार के रूप में प्रेमचंद की भूमिका पर प्रकाश डालिए।
Q5.“बूढ़ी काकी' कहानी का महत्त्व स्पष्ट कौजिए।
Q6.“विध्वंस' कहानी की मूल संवेदना पर विचार 'कीजिए। , 10 ‘ (71 | एम.एच:डी.-10
Q7.'दो बैलों की कथा' कहानी का प्रतिपाद्य रेखांकित कीजिए।
Q8.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ कीजिए :
(क) प्रेमचंद की कहानी कला
(ख)'सवा सेर गेहूँ” कहानी की भाषा
(ग) प्रेमचंद की कहानियाँ और दलित "जीवन
(घ) स्त्री के अधिकार का प्रश्न और प्रेमचंद एम.एच.डी.-10 8,000