MHD-10 · June 2023 · हिन्दी
IGNOU MHD-10 June 2023 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
प्रेमचंद की कहानियाँ (Premchand's Stories)
Structured previous year question paper for MHD-10, June 2023 session (Hindi medium).
Questions: 7
Verified: 26 Jul 2026
कुल मुद्रित पृष्ठों की संख्या: 4 MHD-10
हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि [एम. ए. ( हिन्दी )]
सत्रांत परीक्षा
जून, 2028
एम.एच.डी.-10 : प्रेमचन्द की कहानियाँ
समय : 2 घण्टे अधिकतम अंक ; 50
नोट: 6) प्रथम प्रश्न अनिवार्य है... रः
(४) शेष में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं दा की सन्दर्भ सहित व्याख्या कीजिए ; 2x10=20
(क) कुछ देर तक तो वह जब्त किए बैठी रहो; पर अंत में रहा न गया। स्वायत्त शासन उसका स्वभाव हो गया था। वह क्रोध में भरी हुई आयी और कामतानाथ से बोली-क्या आटा तीन ही बोरे लाये ? मैंने तो पाँच बोरे के लिए कहा था। और घी भी पाँच ही टिन मँगवाया। तुम्हें याद है, मैंने दस कनस्तर कहा था ? किफायत को मैं बुरा नहीं समझती; लेकिन जिसने यह कुआँ खोदा उसी की आत्मा पानी को तरसे, यह कितनी लज्जा की बात है।
(ख) पंडित अलोपीदीन का लक्ष्मीजी पर अखण्ड विश्वास था। वह कहा करते थे कि संसार का तो कहना ही क्या, स्वर्ग में भी लक्ष्मी का ही राज्य है। उनका यह कहना यथार्थ ही था। न्याय और नीति सब लक्ष्मी के ही खिलौने हं, इन्हें वह जैसे चाहती हैं, नचाती हैं। लेटे ही लेटे गर्व से बोले, चलो हम आते हैं। यह कहकर पंडितजी ने बड़ी निश्चिन्तता से पान के बीडे लगाकर खाये। फिर लिहाफ ओढे हुए दारोगा के पास आकर बोले, बाबूजी आशीवांद ! कहिए, हमसे ऐसा कौन-सा अपराधा हुआ कि गाड़ियाँ रोक दी गयीं। हम ब्राह्मणों पर तो आपकी कृपा-दृष्टि रहनी चाहिए।
(ग) आज दोनों के सामने फिर वही सूखा भूसा लाया गया। दोनों चुपचाप खड़े रहे। घर के लोग भोजन करने लगे। उस वक्त छोटी-सी लड़की दो रोटियाँ लिए निकली, और दोनों के मुँह में देकर चली गयी। उस एक रोटी से इनकी भूख तो क्या शान्त होती; पर दोनों के हृदय को मानो भोजन मिल गया। यहाँ भी किसी सज्जन का वास है। लड़की भैरों की थी। उसकी माँ मर चुकी थी। सौतेली माँ उसे मारती रहती थी, इसलिए इन बैलां से उसे एक प्रकार की आत्मीयता हो गयी थी।
(घ) लेकिन सुभागी यों चुपचाप बैठने वाली स्त्री न थी। वह क्रोध से भरी हुई कालिकादीन के घर गयी और उसकी स्त्री को खूब लथेडा-कल का बानी आज का सेठ, खेत जोतने चले हैं। देखें, कौन मेरे खेत में हल ले जाता है ? अपना और उसका लोहू एक कर दूँ। पड़ोसियों ने उसका पक्ष लिया, सब तो हैं, आपस में यह चढ़ा ऊपरी नहीं करना चाहिए। नारायण ने धन दिया, तो क्या गरीबों को कुचलत फिरेंगे। सुभागी ने समझा, मैंने मैदान मार लिया। उसका चित्त शांत हो गया। किन्तु वही वायु जो पानी में लहरें पैदा करती है, वृक्षों को जड़ से उखाड़ डालती है।
Q2.प्रेमचंद के स्त्री सम्बन्धी दृष्टिकोण का विश्लेषण कीजिए।
Q3.प्रेमचंद की कहानियों के माध्यम से उनकी किसान सम्बन्धी दृष्टि का मूल्यांकन कौजिए।
Q4.“सद्गति” कहानी का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।
Q5.“गुल्ली-डण्डा' कहानी की समीक्षा कीजिए।
Q6.“नमक का दरोगा' कहानी के परिप्रेक्ष्य में मध्यवर्गीय अंतर्विरोध को स्पष्ट कौजिए।
Q7.निम्नलिखित में से किनन््हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए : 2x5=10
(क) 'समर-यात्रा' का मर्म और संवेदना
(ख) कहानी के बारे में प्रेमचंद के विचार
(ग) तलाक का प्रश्न और प्रेमचंद
(घ) प्रेमचंद की व्यंग्य दृष्टि