MHD-10 · December 2021 · हिन्दी

IGNOU MHD-10 December 2021 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

प्रेमचंद की कहानियाँ (Premchand's Stories)

Structured previous year question paper for MHD-10, December 2021 session (Hindi medium).

Questions: 7

Verified: 26 Jul 2026

हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)

सत्रांत परीक्षा

दिसम्बर, 2021

एम.एच .डी.-10 : प्रेमचंद की कहानियाँ

समय : 2 घण्टे अधिकतम अंक : 50

नोट: प्रथम प्रश्न अनिवार्य है । शेष में से किन्हीं तीन ग्रश्नों के उत्तर

दीजिए /

Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं क्रो की सन्दर्भ-सहित व्याख्या कीजिए : 2x10=20

(क) रूपमणि ने आवेश में कहा - अगर स्वराज्य आने पर भी सम्पत्ति का यही प्रभुत्व रहे और पढ़ा-लिखा समाज यों ही स्वार्थान्ध बना रहे, तो मैं कहूँगी, ऐसे स्वराज्य का न आना ही अच्छा । अंग्रेज़ी महाजनों की धन-लोलुपता और शिक्षितों का स्वहित ही आज हमें पीसे डाल रहा है । जिन बुराइयों को दूर करने के लिए आज हम प्राणों को हथेली पर लिए हुए हैं, उन्हीं बुराइयों को क्‍या प्रजा इसलिए सिर चढ़ायेगी कि वे विदेशी नहीं, स्वदेशी हैं ? कम-से-कम मेरे लिए तो स्वराज्य का यह अर्थ नहीं है कि जॉन की जगह गोविन्द बैठ जायँ । मैं समाज की ऐसी व्यवस्था देखना चाहती हूँ, जहाँ कम-से-कम विषमता को आश्रय न मिल सके ।

(ख) दोनों ने जैसे बड़े धर्मसंकट में पड़कर गहनों की पिटारी सँभाली और चलते बने । माता वात्सल्य-भरी आँखों से उनकी ओर देख रही थी, और उसकी सम्पूर्ण आत्मा का आशीर्वाद जैसे उन्हें अपनी गोद में समेट लेने के लिए व्याकुल हो रहा था । आज कई महीने के बाद उनके भग्न मातृ हृदय को अपना सर्वस्व अर्पण करके जैसे आनन्द की विभूति मिली ।

(ग) इस प्रकार तीन मास बीत गये और असाढ़ आ पहुँचा । आकाश में घटाएँ आयीं, पानी गिरा, किसान हल-जुए ठीक करने लगे । बढ़ई हलों की मरम्मत करने लगा । गिरधारी पागल की तरह कभी घर के भीतर जाता, कभी बाहर आता, अपने हलों को निकाल-निकाल देखता; उसकी मुठिया टूट गयी है, इसकी फाल ढीली हो गयी है, जुए में सैला नहीं है । यह देखते-देखते वह एक क्षण अपने को भूल गया । दौड़ा हुआ बढ़ई के यहाँ गया और बोला - रज्जू मेरे हल भी बिगड़े हुए हैं, चलो बना दो । रज्जू ने उसकी ओर करुणाभाव से देखा और अपना काम करने लगा । गिरधारी को होश आ गया, नींद से चौंक पड़ा । ग्लानि से उसका सिर झुक गया, आँखें भर आयीं । चुपचाप घर चला आया ।

(घ) अगर ईश्वर ने उन्हें वाणी दी होती, तो झूरी से पूछते - तुम हम गरीबों को क्‍यों निकाल रहे हो ? हमने तो तुम्हारी सेवा करने में कोई कसर नहीं उठा रखी । अगर इतनी मेहनत से काम न चलता था और काम ले लेते । हमें तो तुम्हारी चाकरी में मर जाना कबूल था । हमने कभी दाने-चारे की शिकायत नहीं की । तुमने जो कुछ खिलाया, वह सिर झुकाकर खा लिया, फिर तुमने हमें इस जालिम के हाथ क्‍यों बेच दिया ?

Q2.प्रेमचंद की राष्ट्रवाद विषयक दृष्टि का परिचय दीजिए ।

Q3.कफर्ना कहानी की मूल संवेदना को स्पष्ट कीजिए ।

Q4.नमक का दारोगा का मंतव्य स्पष्ट कीजिए ।

Q5.सवा सेर गेहूँ" का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए ।

Q6.प्रेमचंद की कहानी-कला के मूल तत्त्वों को स्पष्ट कीजिए ।

Q7.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणी लिखिए : 2x5=10

(क) प्रेमचंद की नारी विषयक दृष्टि

(ख) ‘Gee कहानी का प्रतिपाद्य

(घ) प्रेमचंद और दलित जीवन