MHD-4 · June 2018 · हिन्दी

IGNOU MHD-4 June 2018 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

नाटक और अन्य गद्य विधाएँ (Drama and Other Prose Forms)

Structured previous year question paper for MHD-4, June 2018 session (Hindi medium).

Questions: 9

Verified: 26 Jul 2026

हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)

सत्रांत परीक्षा

(एचछ्त1 छफछ जून, 2018

एम.एच.डी.-4 ४ नाटक और अन्य गद्य विधाएँ

समय : 3 घण्टे अधिकतम 3% : 100

we: प्रथम अर अनिवार्य है / शेष अरनें में से किन्हीं चार अश्नों के

उत्तर दीजिए /

Q1.निम्नलिखित में से किन्हीं तीन की सन्दर्भ-सहित व्याख्या कीजिए : 3x12=36 -

(क) युद्ध कया गान नहीं है ? रुद्र का शृंगीनाद, भैरवी का तांडव नृत्य, और शस्त्रों का वाद्य मिलकर एक भैरव-संगीत की सृष्टि होती है । जीवन के अंतिम दृश्य को जानते हुए, अपनी आँखों से देखना, जीवन-रहस्य ; के चरम सौंदर्य की नग्न और भयानक वास्तविकता का अनुभव -- केवल सच्चे वीर हृदय को होता है, ध्वंसमयी महामाया प्रकृति का वह निरंतर संगीत है । (@) यह अजब युद्ध है नहीं किसी की भी जय अंधों से शोभित था युग का सिंहासन दोनों ही पक्षों में जीता अंधापन भय का अंधापन, ममता का अंधापन - अधिकारों का अंधापन जीत गया जो कुछ सुंदर था, शुभ था, कोमलतम था वह हार गया ... द्वापर युग बीत गया ।

(ग) बादलों ने सूरज की हत्या कर दी, सूरज मर गया । मैं : दूसरों का बोझ ढोता हूँ । मेरे रिक्‍्शे में आईने लगे हैं । आईने में मैं अपना मुँह देखता हूँ । सूरज नहीं रहा । अब धरती पर आईनों का शासन होगा । आईने अब उगने और न उगने वाले बीज अलग-अलग कर देंगे ।

(घ) सच है, भ्रमोत्पादक भ्रमस्वरूप भगवान के बनाए हुए भव (संसार) में जो कुछ है भ्रम ही है । जब तक भ्रम है तभी संसार है बरंच संसार का स्वामी भी तभी तक है, फिर कुछ भी नहीं ! और कौन जाने हो तो हमें उससे कोई काम नहीं ! और कौन जाने हो तो हमें उससे कोई काम नहीं ! परमेश्वर सबका भ्रम बनाए रखे इसी में सब कुछ है । जहाँ भरम खुल गया वहीं लाख की भलमंसी (ड) दम्पती सुखी नहीं हो सके, यह कहना व्यर्थ है । दासों का एक. से दो होना प्रभुओं के लिए अच्छा हो सकता है, दासों के लिए नहीं । एक ओर उससे प्रभुता का विस्तार होता है और दूसरी ओर पराधीनता का प्रसार । स्वामी तो साम-दाम-भेद द्वारा उन्हें परस्पर लड़ाकर . दासता को और दृढ़ करते हैं और दास अपनी विवश decree और हीन भावना के कारण एक-दूसरे के - अभिशापों को विविध बनाकर उससे बाहर आने का मार्ग अवरुद्ध करते रहते हैं ।

Q2.“अंधेर नगरी में व्यक्त यथार्थ का विवेचन कीजिए । 16 |

Q3.स्कंदगुप्त' की रंगमंचीय संभावनाओं पर विचार कीजिए ॥

Q4.आधे-अधूरे! के नाट्य-शिल्प की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए ।

Q5.“अंधा युग के चरित्रों की प्रतीकात्मकता को स्पष्ट कीजिए।

Q6.“लोभ और प्रीति! के बैचारिक पक्ष की व्याख्या कीजिए ।

Q7.जीवनी की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए He aT सिपाही का मूल्यांकन कीजिए ।

Q8.रिपोर्ताज की विशेषताओं के संदर्भ में “अदम्य जीवन की ह समीक्षा कीजिए ।

Q9.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए: 2x8=16

(क) असंगत नाटक

(ख) निबंधकार प्रताप नारायण मिश्र

(ग) रेखाचित्र और संस्मरण

(घ) तीसरे दर्ज का श्रद्धेय का प्रतिपाद्य