MHD-4 · December 2020 · हिन्दी

IGNOU MHD-4 December 2020 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

नाटक और अन्य गद्य विधाएँ (Drama and Other Prose Forms)

Structured previous year question paper for MHD-4, December 2020 session (Hindi medium).

Questions: 9

Verified: 26 Jul 2026

हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम. ए. हिन्दी )

सत्रांत परीक्षा

दिसम्बर, 2020

एम.एच.डी.-4 : नाटक और अन्य गद्य विधाएँ

समय : 3 घण्टे अधिकवम अक / 100

नोट : प्रथम प्रश्न अनिवार्य है। शेष प्रश्नों में से किन्हीं

चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

Q1.निम्नलिखित में से किन्हीं क्ीन की सन्दर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 3x 12=36

(क) ऐसा जीवन तो विडंबना है, जिसके लिए रात-दिन लड़ना पड़े। आकाश में जब शीतल शुप्र शरद-शशि का विलास हो, तब भी दाँत-पर-दाँत रखे मुट्ठियों को बाँधे-लाल आँखों से एक-दूसरे को घूरा करें। बसंत के मनोहर प्रभात में, निभृत कगारों में चुपचाप बहने वाली सरिताओं का स्रोत गरम रक्त बहाकर लाल कर दिया जाय! नहीं, नहीं चक्र! मेरी समझ में मानव-जीवन का यही उद्देश्य नहीं है।

(ख) मैंने अपने ही वैयक्तिक संवेदन से जो जाना था केवल उतना ही था मेरे लिए वस्तु-जगत्‌ इन्द्रजाल की माया-सृष्टि के समान घने गहरे अँधियारे में एक काले बिन्दु से मेरे मन ने सारे भाव किए थे विकसित मेरी सब वृत्तियाँ उसी से परिचालित थीं! मेरा स्नेह, मेरी घृणा, मेरी नीति, मेरा धर्म बिल्कुल मेरा ही वैयक्तिक था।

(ग) बादलों ने सूरज की हत्या कर दी, सूरज मर गया। मैं दूसरों का बोझ ढोता हूँ। मेरे रिक्शे में आईने लगे हैं। आईने में में अपना मुँह देखता हूँ। सूरज नहीं रहा। अब धरती पर आईनों का शासन होगा। आईने अब उगने और न उगने वाले बीज अलग-अलग कर देंगे।

(घ) विशिष्ट वस्तु या व्यक्ति के प्रति होने पर लोभ वह सात्विक रूप प्राप्त करता है जिसे प्रीति या प्रेम कहते हैं। जहाँ लोभ सामान्य या जाति के प्रति होता है वहाँ वह लोभ ही रहता है। पर जहाँ किसी जाति के एक ही विशेष व्यक्ति के प्रति होता है वहाँ वह “रुचि” या “प्रीति' का पद प्राप्त करता है। लोभ सामान्योन्मुख होता है और प्रेम विशेषोन्मुख। (ड) व्यक्ति की “आत्मा' केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं है, वह व्यापक है। अपने में सब और सबमें आप--इस प्रकार की एक समष्टि बुद्धि जब तक नहीं आती तब तक पूर्ण सुख का आनंद भी नहीं मिलता। अपने-आपको दलित द्वाक्षा की भाँति निचोड़कर जब तक ‘ad’ के लिए निछावर नहीं कर दिया जाता तब तक “स्वार्थ! खण्ड-सत्य हे, वह मोह को बढ़ावा देता है।

Q2.भाषिक प्रयोग की विशिष्टता की दृष्टि से “अंधेर नगरी'

Q3.“स्कंदगुप्त' की चारित्रिक विशेषताओं का सोदाहरण विवेचन कीजिए।

Q4.“अंधा युग” की संवाद योजना का विश्लेषण कीजिए।

Q5.मोहन राकेश के नाटकों का परिचय देते हुए “आधे अधूरे” की प्रासंगिकता का आकलन कीजिए।

Q6.“नुक्कड्‌' नाटक की विशेषताओं के परिप्रेक्ष्य में 'औरत'

Q7.“क्या भूलूँ, क्या याद ae’ के संरचना शिल्प का विवेचन कीजिए।

Q8.हिन्दी जीवनी साहित्य में "कलम का सिपाही” का महत्व प्रतिपादित कीजिए।

Q9.निम्नलिखित में से किन्हीं द्गो पर टिप्पणियाँ लिखिए :

(क) “वसंत का अग्रदूत' की अंतर्वस्तु

(ख) ललित निबंध के रूप में “कुटज'

(ग) 'साक्षात्कार' की लेखन शैली

(घ) प्रसाद की इतिहास दृष्टि