MHD-4 · December 2019 · हिन्दी
IGNOU MHD-4 December 2019 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
नाटक और अन्य गद्य विधाएँ (Drama and Other Prose Forms)
Structured previous year question paper for MHD-4, December 2019 session (Hindi medium).
Questions: 10
Verified: 26 Jul 2026
हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)
16091 सत्रांत परीक्षा
दिसम्बर, 2019
एम.एच.डी.-4 : नाटक और अन्य गद्य विधाएँ
समय : 3 घण्टे अधिकतम अंक : 100
नोट: ग्रथम अर अनिवार्य है / शेष seat में से किन्हीं चार अरनों के
उत्त दीजिए /
Q1.निम्नलिखित में से किन्हीं तीन की सन्दर्भ-सहित व्याख्या कीजिए : 3x12=36
(क) संसार के समस्त अभावों को असंतोष कहकर हृदय को धोखा देता रहा । परंतु कैसी विडंबना ! लक्ष्मी के लालों को भ्रू-भंग और क्षोभ की ज्वाला के अतिरिक्त मिला क्या ! -- एक काल्पनिक प्रशंसनीय जीवन, जो दूसरों की दया में अपना अस्तित्व रखता है ! संचित हृदय कोश के अमूल्य रत्नों की उदारता और दारिद्रय का व्यंग्यात्मक कठोर अट्टहास, दोनों की विषमता की कौन-सी व्यवस्था होगी |...
(ख) हर-एक के पास एक-न-एक वजह होती है । इसने इसलिए कहा था । उसने उसलिए कहा था । मैं जानना चाहता हूँ कि मेरी क्या यही हैसियत है इस घर में कि जो सब जिस वजह से जो भी कह दे मैं चुपचाप सुन लिया करूँ ? हर वक्त की धतकार, हर वक्त की कोच, बस यही कमाई है यहाँ मेरी इतने सालों की ?
(ग) आज मेरा विज्ञान सब मिथ्या ही सिद्ध हुआ । सहसा एक व्यक्ति ऐसा आया जो सारे नक्षत्रों की गति से भी ज़्यादा शक्तिशाली था । उसने रणभूमि में विषादग्रस्त अर्जुन से कहा --- जो कहता हूँ करो सत्य जीतेगा मुझसे लो सत्य, मत डरो ।”
(घ) जीना भी एक कला है । लेकिन कला ही नहीं, तपस्या है । जियो तो प्राण ढाल दो ज़िन्दगी में, मन ढाल दो जीवनरस के उपकरणों में ! ठीक है । लेकिन क्यों ? क्या जीने के लिए जीना ही बड़ी बात है ? सारा संसार अपने मतलब के लिए ही तो जी रहा है । याज्ञवल्क्य बहुत बड़े ब्रह्मगादी ऋषि थे । उन्होंने अपनी पत्नी को विचित्र भाव से समझाने की कोशिश की कि सब कुछ स्वार्थ के लिए है। है 41.11 A न (ड) मैंने उनसे सहृदय व्यक्ति कम देखे हैं । यदि यह वृद्ध ह यहाँ न होकर हमारे बीच में होता, तो कैसे होता, यह प्रश्न भी मेरे मन में अनेक बार उठ चुका है, पर जीवन के अध्ययन ने मुझे बता दिया है कि इन दोनों समाजों का अंतर मिटा सकना सहज नहीं । उनका बाह्य जीवन दीन है और हमारा अंतर्जीवन रिक्त ।
Q2.“अंधेर नगरी की प्रासंगिकता पर एक निबंध लिखिए ।
Q3.. आधे-अधूरे' की रंगमंचीयता पर विचार कीजिए ।
Q4.अंधायुग! के नाट्य शिल्प का विवेचन कीजिए |
Q5.असंगत नाटक की विशेषताओं के संदर्भ में 'ताँबे के कोड़े' का मूल्यांकन कीजिए ।
Q6.'कुटज की अंतर्वस्तु पर विचार करते हुए उसकी भाषा-शैली की पड़ताल कीजिए ।
Q7.क्या भूलूँ क्या याद करूँ की संसचनात्मक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए ।
Q8.“संत का अग्रदूत' कविता के भावबोध पर प्रकाश डालिए ।
Q9.रिपोर्ताज विधा के आधार पर “अदम्य जीवन का विश्लेषण कीजिए ।
Q10.निम्नलिखित में से किन्हीं को पर टिप्पणियाँ लिखिए: 98-16
(क) लोभ और प्रीति का प्रतिपाद्य
(ख) “औरत! की रंग प्रस्तुति
(ग) कलम का सिपाही
(घ) “अंधायुग” का राजनीतिक संदर्भ