MHD-4 · December 2010 · हिन्दी

IGNOU MHD-4 December 2010 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

नाटक और अन्य गद्य विधाएँ (Drama and Other Prose Forms)

Structured previous year question paper for MHD-4, December 2010 session (Hindi medium).

Questions: 10

Verified: 26 Jul 2026

हिन्दी में स्तातकोत्तर उपाधि ( एम.एच.डी. )

= सत्रांत परीक्षा ‘

a दिसम्बर, 2010

एम.एच.डी.-4 : नाटक एवं अन्य गद्य विधाएँ

समय : 3 घण्टे अधिकतम अंक : 100

सा he

नोट: पहला प्रश्न अनिवार्य है। शेष किन्हीं चार प्रश्नों के उत्त दीजिए।

[...] (this portion is being re-verified) , मन

Q1.किन्हीं तीन की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 3x12=36

(क) कविता करना अनंत पुण्य का फल है। इस दुराशा और अनंत उत्कंठा से कवि जीवन व्यतीत करने की इच्छा हुई। संसार के समस्त अभावों को असंतोष कह कर धोखा देता रहा। परंतु कैसी विडम्बना! लक्ष्मी के लालों का भ्रुभंग और क्षोभ की ज्वाला के अतिरिक्त मिला क्या! एक-काल्पनिक प्रशंसनीय जीवन, जो दूसरों की ह दया में अपना अस्तित्व रखता है। संचित हृदय कोष के अमूल्य रलों की उदारता और दारिद्रय का व्यंग्यात्मक कठोर अट्टहास दोनों की विषमता की कौन सी व्यवस्था

(ख) हर एक के पास एक न एक वजह होती है। इसने इसलिए कहा था। उसने उस लिए कहा था। मैं जानना चाहता हूँ कि मेरी क्या यही हैसियत है इस घर में कि जो जब जिस वजह से जो भी कह दे मैं चुपचाप सुन लिया करूँ। हर वक्‍त की,धटकार, हर वक्‍त की कोंच, बस यही कमाई है मेरी इतने सालों की।

(ग) यह अजब युद्ध है नहीं किसी की भी जय अंधों से शोभित था युग का सिंहासन दोनों ही पक्षों में जीता अंधापन भय का अंधापन, ममता का अंधापन अधिकारों का अंधापन जीत गया जो कुछ सुन्दर था, शुभ था, कोमलतम था वह हार गया . . . . . . .द्वापर युग बीत गया।

(घ) धोखा खाने वाला मूर्ख और धोखा देने वाला ठग क्‍यों कहलाता है? जब सब कुछ धोखा ही धोखा है और धोखे से अलग रहना ईश्वर की भी सामर्थ्य से भी दूर है, तथा धोखे ही के कारण संसार का चर्खा पिन्न-पिन्न चला जाता है, नहीं तो ढिच्चर-ढिच्चर होने लगे, बरंच रही न . जाय तो फिर इस शब्द का स्मरण वा श्रवण करते ही आपकी नाक भौंह क्यों सिकुड़ जाती है? इसके उत्तर में हम तो यही कहेंगे कि साधारणत: जो धोखा खाता है वह अपना कुछ-न-कुछ गँवा बैठता है, और जो धोखा देता है उसकी एक न एक दिन कलई खुले बिना नहीं रहती। (BS) कुटज क्या केवल जी रहा है। वह दूसरे के द्वार पर भीख माँगने नहीं जाता, कोई निकट आ गया तो भय के मारे अधमरा नहीं हो जाता, नीति और धर्म का उपदेश नहीं देता फिरता, अपनी उन्नति के लिए अफसरों का जूता नहीं चाटता फिरता, दूसरों को अवमानित करने के लिए ग्रहों की खुशामद नहीं करता। आत्मोन्नति हेतु नीलम नहीं धारण करता, अँगूठियों की लड़ी नहीं पहनता, दाँत नहीं निपोरता, बगलें नहीं झाँकता। जीता है और शान से जीता है - काहे वास्ते, किस उद्देश्य से? कोई नहीं जानता। मगर कुछ बड़ी बात है। स्वार्थ के दायरे से बाहर की बात है। भीष्म पितामह की भाँति अवधूत की भाषा में कह रहा है : “चाहे सुख हो या दुख, प्रिय हो या अप्रिय, जो मिल जाय उसे शान के साथ, हृदय से बिल्कुल अपराजित हो कर सोछास ग्रहण करो। हार मत मानो।'

Q2.नाट्य रचना को प्रोत्साहित करने के पीछे भारतेन्दु का उद्देश्य क्या 16 था? “अंधेर नगरी' के संदर्भ में विचार कीजिए।

Q3.“प्रसाद के नाटकों में भारतीय और पश्चिमी नाट्य दृष्टि का मेल. 16 दिखाई देता है।" “स्कंदगुप्त' को दृष्टि में रखते हुए इस कथन की समीक्षा कीजिए।

Q4.“आधे अधूरे” का प्रकाशन हिन्दी नाट्य परंपरा में एक नई शुरुआत 16 का प्रतीक है। किस प्रकार? तर्क संगत उत्तर दीजिए।

Q5.“अंधायुग' के प्रमुख पात्रों की चरित्रगत विशेषताओं का विवेचन. 16 'कीजिए।

Q6.वैचारिक निबंध की दृष्टि से “लोभ और प्रीति! का मूल्यांकक 16 'कीजिए।

Q7.“ठकुरी बाबा” रेखाचित्र के माध्यम से उठाए गए सामाजिक 76 प्रश्नों की चर्चा कीजिए।

Q8.“बच्चन की आत्मकथा हिन्दी आत्मकथा साहित्य की एक 76 महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।' इस कथन की समीक्षा कीजिए।

Q9.“किन्नर देश की ओर' यात्रा-संस्मरण के आधार पर साहित्यिक 76 विधा के रूप यात्रा-संस्मरण के महत्व पर प्रकाश डालिए।

Q10.किन्‍्हीं दो पर टिप्पणी लिखिए : 8x2=16

(क) भुवनेश्वर

(ख) बसंत के अग्रदूत

(ग) अदम्य जीवन

(घ) डा. रामविलास शर्मा की जातीयता की अवधारणा