MHD-10 · June 2019 · हिन्दी
IGNOU MHD-10 June 2019 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
प्रेमचंद की कहानियाँ (Premchand's Stories)
Structured previous year question paper for MHD-10, June 2019 session (Hindi medium).
Questions: 7
Verified: 26 Jul 2026
[...] (this portion is being re-verified) Wem 4 एम. एच. डी.-10
हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम. ए. हिन्दी )
सत्रांत परीक्षा :
जून, 2019 े
समय : 2 घण्टे अधिकतम अंक : 50
नोट : प्रथम प्रश्न अनिवार्य है। शेष में से किन्हीं तीन
प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं दो की सन्दर्भ सहित व्याख्या कीजिए : प्रत्येक 10 है
(क) रात का समय था। बुद्धिराम के द्वार पर शहनाई बज रही थी और गाँव के बच्चों का झुंड विस्मयपूर्ण नेत्रों से गाने का रसास्वादन कर रहा था। चारपाइयों पर मेहमान विश्राम करते हुए नाइयों से मुक्कियाँ लगवा रहे थे। समीप ही खड़ा हुआ भाट विरदावली सुना रहा था और कुछ भावज्ञ मेहमानों की “वाह, वाह” पर ऐसा खुश हो रहा था मानो इस वाह-वाह का aed A वही अधिकारी है। दो-एक अंग्रेजी पढ़े हुए [2] एम.एच.डी--10 नवयुवक इन व्यवहारों से उदासीन थे। वे इस गँवार मंडली में बोलना अथवा सम्मिलितः होना अपनी प्रतिष्ठा के प्रतिकूल समझते थे।
(ख) बंशीधर ने अलोपीदीन को आते देखा तो उठकर सत्कार किया, किन्तु स्वाभिमान सहित। समझ गये कि यह महाशय मुझे लज्जित करने और जलाने आये हैं। क्षमा-प्रार्थना की चेष्टा नहीं की, वरन् उन्हें अपने पिता की यह ठकुरसुहाती की बात असहा-सी प्रतीत हुई। पर पंडितजी की बातें सुनीं तो मन की मैल मिट गयी। पंडितजी की ओर उड़ती हुई दृष्टि से देखा। सदूभाव झलक रहा था। गर्व ने लज्जा के सामने सिर झुका दिया। शर्माते हुए बोले-यह आपकी उदारता है जो ऐसा कहते हैं। मुझसे जो कुछ अविनय हुई. है उसे क्षमा कीजिए| मैं धर्म की बेड़ी में जकड़ा हुआ था, नहीं तो वैसे मैं आपका दास हूँ। जो आज्ञा होगी, वह मेरे सिर-माथे पर। .
(ग) स्त्रियाँ गा रही थीं, बालक उछल रहे थे। और पुरुष अपने अँगोछों से यात्रियों की हवा कर रहे' थे। इस समारोह में नोहही की ओर किसी का ध्यान न गया, वह अपनी लठिया पकड़े सबके पीछे सजीव आशीर्वाद बनी खड़ी थी। उसकी है [2] है एम.एच.डी--10 आँखें डबडबायी हुई थीं, मुख से गौरव की ऐसी झलक आ रही थी मानो वह कोई रानी है, मानों यह साय गाँव उसका है, वे सभी युवक उसके बालक हैं। अपने मन में उसने ऐसी शक्ति, ऐसे विकास, ऐसे उत्थान का अनुभव कभी न किया े
(घ) इस प्रकोर तीन मास बीत गये और असाढ आ पर पहुँचा। आकाश में घटाएँ आयीं, पानी “गिरा, किसान हल्ल-जुए ठीक करने लगे। बढ़ई हलों की मरम्मत करने लगा। गिरधारी पागल की तरह कभी घर के भीतर जाता, कभी बाहर आता, अपने हलों को निकाल-निकाल देखता; उसकी मुठिया टूट गयी है, इसकी फाल ढीली हो गयी है, जुए में सैला नहीं है। यह देखते-देखते वह एक क्षण अपने को भूल गया। ater [...] (this portion is being re-verified) .. . . के यहाँ गया और बोला-रज्जू मेरे हल भी बिगड़े हुए हैं, चलो बना दो। रज्जू ने उसकी ओर 'करुणाभाव से देखा और अपना काम करने लगा। गिरधारी को होश आ गया, नींद से चौक ve ; ग्लानि से उसका सिर झुक गया, आँखें भर आयीं। चुपचाप घर चला आया। है 14] एम.एच,डी--10
Q2.प्रेमचन्द की किसान-सम्बन्धी दृष्टि को स्पष्ट कीजिए॥0
Q3.प्रेमचन्द की कहांनियों का शिल्पगत विश्लेषण कौजिए।
Q4.“मनोवृत्ति' कहानी का विश्लेषण करते हुए उसका महत्व निर्धारित कीजिए।
Q5.“नमक का दारोगा' कहानी का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।
Q6.“गुल्ली-डण्डा' कहानी के आधार पर प्रेमचन्द की सभ्यता-समीक्षा के स्वरूप की चर्चा कौजिए।
Q7.निम्नलिखित में से किन्हीं वो पर टिप्पणियाँ कीजिए : प्रत्येक 5
(क) स्त्री जीवन और प्रेमचन्द
(ख) 'समर-यात्रा' का प्रतिपाद्य :
(ग) प्रेमचन्द और हिन्दी आलोचना
(घ) स्वाधीनता आन्दोलन और प्रेमचन्द एम. एच. डी.-10 6,000