MHD-10 · December 2023 · हिन्दी

IGNOU MHD-10 December 2023 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

प्रेमचंद की कहानियाँ (Premchand's Stories)

Structured previous year question paper for MHD-10, December 2023 session (Hindi medium).

Questions: 7

Verified: 26 Jul 2026

मुद्रित पृष्ठों की संख्या : 6 MHD-10

हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि ( एम. ए. हिन्दी )

सत्रांत परीक्षा

दिसम्बर, 2023

एम.एच.डी.-10 : प्रेमचंद की कहानियाँ

समय : 2 घण्टे अधिकतम अंक ; 50

नोट : प्रथम प्रश्न अनिवार्य है। शेष में से किन्हीं तीन

प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं दो की सन्दर्भ सहित व्याख्या कीजिए ; 2x10=20

(क)वह उकड़ूँ बैठकर हाथों के बल सरकती हुई आँगन में आयीं। परन्तु हाय दुर्भाग्य! अभिलाषा ने अपने पुराने स्वभाव के अनुसार समय की मिथ्या कल्पना की थी। मेहमान मंडली अभी बैठी हुई थी। कोई खाकर उगलियाँ चाटता था, कोई तिरछे नेत्रों से देखता था कि और लोग अभी खा रहे हैं या नहीं। कोई इस चिंता में था कि पत्तल पर पूड़ियाँ छूट जाती हैं किसी तरह उन्हें भीतर रख लेता। कोई दही खाकर जीभ चटकारता था, परन्तु दूसरा दोना माँगने में संकोच करता था कि इतने में बूढ़ी काको रेंगती हुई उनके बीच में जा पहुँची। कई आदमी चौंककर उठ खड़े हुए। पुकारने लगे-अरे यह बुढ़िया कौन है। यह कहाँ से आ गयी ? देखो

(ख)कामतानाथ ने दूरदर्शिता का परिचय दिया-नुकसान की एक ही कही। हममें से एक को कष्ट हो, तो क्या और लोग बैठे देखेंगे ? यह अभी लड़के हैं, इन्हें क्या मालूम समय पर एक रुपया एक लाख का काम करता है ? कौन जानता है, कल इन्हें विलायत जाकर पढ़ने के लिए सरकारी वजीफा मिल जाय या सिविल सर्विस में आ जायेँ। उस वक्‍त सफर की तैयारियों में चार-पाँच हजार लग जायेंगे। तब किसके सामने हाथ फैलाते फिरेंगे ? मैं यह नहीं चाहता कि दहेज के पीछे इनकी जिंदगी नष्ट हो जाए।

(ग) बुढिया लाठी टेककर दारोगा की ओर घूमती हुई बोली-क्यों खुदा की दुहाई देकर खुदा को बदनाम करते हो। तुम्हारे खुदा जो तुम्हारे अफसर हें, जिनकी तुम जूतियाँ चाटते हो, तुम्हें तो चाहिए था कि डूब मरते चुल्लू भर पानी में! जानते हो, यह लोग जो यहाँ आये हैं, कौन हैं ? यह वह लोग हैं, जो तुम गरीबों के लिए अपनी जान तक होमने को तैयार हैं। तुम उन्हें बदमाश कहते हो! तुम जो घूस के रुपये खाते हो, जुआ खेलते हो, चोरियाँ करवाते हो, डाके डलवाते हो, भले आदमियों को फँसाकर मुट्ठियाँ गर्म करते हो और अपने देवताओं की जूतियों पर नाक रगड़ते हो, तुम इन्हें बदमाश कहते हो।

(घ) मैं यह लताड़ सुनकर आँसू बहाने लगता। जवाब ही क्या था। अपराध तो मैंने किया, लताड कौन सहे ? भाई साहब उपदेश की कला में निपुण थे। ऐसी-ऐसी लगती बातें करते, ऐसे-ऐसे सूक्ति-बाण चलाते, कि मेरे जिगर के टुकड़े-टुकड़े हो जाते और हिम्मत टूट जाती। इस तरह जान तोड़कर मेहनत करने की शक्ति मैं अपने में न तो पाता था और उस निराशा से जरा देर के लिए मैं सोचने लगता-क्यों न घर चला जाऊँ। जो काम मेरे बूते के बाहर है, उसमें हाथ डालकर क्‍यों अपनी जिन्दगी खराब करूँ। मुझे अपना मूर्ख रहना मंजूर था, लेकिन उतनी मेहनत! मुझे तो चक्कर आ जाता था; लेकिन घंटे दो घंटे के बाद निराशा के बादल छंट जाते और मैं इरादा करता कि आगे से खूब जी लगाकर पढ़ूँगा।

Q2.स्त्री संबंधी प्रेमचंद के दृष्टिकोण का विश्लेषण कीजिए।

Q3.हिन्दी कहानी के इतिहास में प्रेमचंद के महत्व को प्रतिपादित कीजिए।

Q4.“मनोवृत्ति' कहानी का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।

Q5.“कफन' कहानी की समीक्षा कीजिए।

Q6.“सुजान भगत” का चरित्र-चित्रण कीजिए।

Q7.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए :

(क) स्वत्वरक्षा एवं नेतिकता बनाम “दो बैलों की कथा!

(ख) नोहरी का चरित्र-चित्रण

(ग) “गुल्ली-डण्डा' में व्यक्त जीवन-मूल्य

(घ) “सुजान भगत' कहानी का महत्व