MHD-10 · December 2018 · हिन्दी
IGNOU MHD-10 December 2018 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
प्रेमचंद की कहानियाँ (Premchand's Stories)
Structured previous year question paper for MHD-10, December 2018 session (Hindi medium).
Questions: 6
Verified: 26 Jul 2026
हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)
सत्रांत परीक्षा
दिसम्बर, 2018 है
03431 | दिस
एम.एच.डी.-10 : प्रेमचंद की कहानियाँ
समय : 2 घण्टे ARTA अंक :50..*
नोट: प्रथम प्रन अनिवार्य है / शेष प्रनों में से किन्हीं तीन अरनें के
.._ उत्तर दीजिए /
, 1. निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं क्रो की सन्दर्भ-सहित
व्याख्या कीजिए : 2x10=20
(क) कामतानाथ ने दूरदर्शिता का परिचय दिया - नुकसान ;
की एक ही कही । हममें से एक को कष्ट हो, तो क्या
और लोग बैठे देखेंगे ? यह अभी लड़के हैं, इन्हें क्या :
मालूम समय पर एक रुपया एक लाख का काम करता
है ? कौन जानता है, कल इन्हें बिलायत जाकर पढ़ने के
लिए सरकारी बज़ीफ़ा मिल जाय, या सिविल सर्विस में
, आ जाएँ । उस वक्त सफ़र की तैयारियों में चार-पाँच
हज़ार लग जाएँगे । तब किसके सामने हाथ फैलाते
: फिरेंगे ? मैं यह नहीं चाहता कि दहेज के पीछे इनकी
ज़िंदगी नष्ट हो जाय ।
(ख) अब भाई साहब बहुत कुछ नर्म पड़ गए थे । कई बार
मुझे डाँटने का अवसर पाकर भी उन्होंने धीरज से काम
लिया । शायद अब वह ख़ुद समझने लगे थे कि मुझे
डॉँटने का अधिकार उन्हें नहीं रहा था, या रहा भी, तो
बहुत कम । मेरी स्वच्छन्दता भी बढ़ी । मैं उनकी
सहिष्णुता का अनुचित लाभ उठाने लगा । मुझे कुछ
ऐसी धारणा हुई कि मैं पांस हो ही जाऊँगा, पढ़ूँया न
पढूँ, मेरी तकदीर बलवान है; इसलिए भाई साहब के डर
से जो थोड़ा बहुत पढ़ लिया करता था, वह भी बन्द
हुआ । मुझे कनकौए उड़ाने का नया शौक पैदा हो गया
था और अब सारा समय पतंगबाज़ी की ही भेंट होता है
था; फिर भी मैं भाई साहब का अदब करता था, और
उनकी नज़र बचाकर कनकौए उड़ाता था । माँझा देना,
कन्ने बाँधना, पतंग टूरनामेंट की तैयारियाँ आदि
arent सब गुप्त रूप से हल की जाती थीं । मैं भाई
साहब को यह सन्देह न करने देना चाहता था कि
उनका सम्मान- और लिहाज़ मेरी नज़रों में कम हो गया
(ग) उसने जेब से पत्र निकालकर रूपमणि के सामने रख
दिया । इन शब्दों में जो संकेत और व्यंग्य था, उसने एक
क्षण तक रूपमणि को उसकी तरफ़ देखने न दिया ।
आनन्द के इस निर्दय प्रहार ने उसे आहत-सा कर दिया
था; पर एक ही क्षण में विद्रोह की एक चिनगारी-सी
उसके अन्दर जा घुसी । उसने स्वच्छन्द भाव से पत्र को
लेकर पढ़ा । पढ़ा सिर्फ आनन्द के प्रहार का जवाब देने
के लिए; पर पढ़ते-पढ़ते उसका चेहरा तेज से कठोर हो
गया, गरदन तन गई, आँखों में उत्सर्ग की लाली आ
गई ।
(a) शंकर ने सालभर तक कठिन तपस्या की ! मीयाद के
पहले रुपये अदा करने कां उसने ब्रत-सा कर लिया ।
: दोपहर के पहले भी चूल्हा न जलता था, चबेने पर बसर
होती थी, अब वह भी बंद हुआ । केवल लड़के के
लिए रात को रोटियाँ रख दी जातीं ! पैसे रोज़ का तंबाकू
पी जाता था, यही एक व्यसन था जिसका वह कभी न
त्याग कर सका था । अब वह व्यसन भी इस कठिन ब्रत
की भेंट हो गया । उसने चिलम पटक दी, हुक््का तोड़
दिया और तमाखू की हाँडी चूर-चूर कर डाली । कपड़े
पहले भी त्याग की चरम सीमा तक पहुँच चुके थे, अब
| ae welt की न्यूनतम रेखाओं में आबद्ध हो गए ।
PRR A अस्थिबेधक शीत को उसने आग तापकर
काट दिया । इस ध्रुव-संकल्प का फल आशा से बढ़कर
निकला । साल के अन्त में उसके पास साठ रुपये जमा
हो गए ।
Q1.प्रेमचंद की कहानियों में चित्रित स्वाधीनता आंदोलन का मूल्यांकन कीजिए ।
Q2."किसान समस्या और प्रेमचंद! विषय पर एक. निबन्ध : लिखिए ।
Q3.बूढ़ी काकी' का विवेचन कीजिए ।
Q4.नवीन जीवन मूल्यों के संदर्भ में गुल्ली डण्डा का मूल्यांकन कीजिए ।
Q5.स्वाधीनता आन्दोलन को दृष्टि में रखते हुए 'समर-यात्रा' का विश्लेषण कीजिए । है
Q6.निम्नलिखित में से किन्हीं को पर टिप्पणियाँ लिखिए: 96-70
(क) Gar RA का कथ्य
(ख) प्रेमचंद की स्त्री-दृष्टि
(ग) प्रेमचंद्र की कहानियों में राष्ट्रवाद
(घ) प्रेमचंद की कहानी-कला