BHDE-143 · June 2025 · हिन्दी

IGNOU BHDE-143 June 2025 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

BHDE-143

Structured previous year question paper for BHDE-143, June 2025 session (Hindi medium).

Questions: 7

Verified: 10 Aug 2026

सत्रांत परीक्षा

जून, 2025

बी.एच.डी.ई.-143 : प्रेमचंद

समय : 3 घण्टे अधिकतम अंक : 100

नोट ; प्रथम प्रश्न अनिवार्य है। शेष में से किन्हीं चार प्रश्नों के

उत्तर दीजिए। प्रश्नों को लिए निर्धारित अंक उनके सम्मुख

दिए गए हैं।

व्याख्या कीजिए : 3x12=36

(क) मेरी असज्जनता और निर्दयता, सुमन की चंचलता और

विलास-लालसा दोनों ने मिलकर हम दोनों का

सर्वनाश कर दिया। मैं अब उस समय की बातों को

सोचता हूँ तो ऐसा मालूम होता है कि एक बड़े घर की

बेटी से ब्याह करने में मैंने बड़ी भूल की और इससे

बड़ी भूल यह थी कि ब्याह हो जाने पर उसका उचित

आदर-सम्मान नहीं किया। निर्धन था, इसलिए

आवश्यक था कि मैं धन के अभाव को अपने प्रेम

और भक्ति से पूरा करता। मैंने इसके विपरीत उससे

निर्दयता का व्यवहार किया। उसे वस्त्र और भोजन का

कष्ट दिया।

(ख) वे प्रेम कहानियाँ, जिनसे हमारे मासिक पत्रों के पृष्ठ

भरे रहते हैं, हमारे लिए अर्थहीन हैं, अगर वे हममें

हरकत और गरमी नहीं पैदा करतीं। अगर हमने दो

नवयुवकों की प्रेम कहानी कह डाली, पर उससे हमारे

सौन्दर्य प्रेम पर कोई असर न पड़ा और पड़ा भी तो

केवल इतना ही कि हम उनकी विरह व्यथा पर रोये,

तो इसमें हममें कौन-सी मानसिक या रुचि संबंधी गति

पैदा हुई ? इन बातों से किसी जमाने में हमें भावावेश

हो जाता रहा हो तो हो जाता रहा हो पर आज के लिये

(ग) कुछ ऐसे सज्जन भी थे, जिन्हें हास्य-रस के रसास्वादन

का अच्छा अवसर मिला। झुकी हुई कमर, पोपला मुँह,

सन के-से बाल-इतनी सामग्री एकत्र हों, तब हँसी

क्यों न आवे? ऐसे न्यायप्रिय, दयालु, दीन-वत्सल

पुरुष बहुत कम थे, जिन्होंने उस अबला के दुखड़े को

गौर से सुना हो और उसको सांत्वना दी हो। चारों ओर

से घूम-घाम कर बेचारी अलगू चौधरी के पास आयी।

लाठी पटक दी और दम लेकर बोली-बेटा, तुम भी

दम भर के लिए मेरी पंचायत में चले आना।

(घ) गाँव से मेला चला और बच्चों के साथ हामिद भी जा

रहा था। कभी सबके सब दौड़कर आगे निकल जाते।

फिर किसी पेड़ के नीचे खड़े होकर साथ वालों का

इन्तजार करते। ये लोग क्यों इतना धीरे-धीरे चल रहे

हैं? हामिद के पैरों में तो जैसे पर लग गए हैं। वह

कभी थक सकता है? शहर का दामन आ गया।

सड़क के दोनों ओर अमीरों के बगीचे हैं। पक्की

चारदीवारी बनी हुई है। पेड़ों में आम और लीचियाँ

लगी हुई हैं। कभी-कभी कोई लड़का कंकड़ी उठाकर

आम पर निशान लगाता है।

(ड़) कहीं शतरंज का घोर संग्राम छिड़ा हुआ है। राजा से

लेकर रंक तक इसी धुन में मस्त थे। यहाँ तक कि

'फकीरों को पैसे मिलते तो वे रोटियाँ न लेकर अफीम

खाते या मदक पीते। शतरंज, ताश, गंजीफा खेलने से

बुद्धि तीव्र होती है, विचार-शक्ति का विकास होता है,

पेचीदा मसलों को सुलझाने की आदत पड़ती है। ये

दलीलें जोरों के साथ पेश की जाती थीं। (इस

सम्प्रदाय के लोगों से दुनिया अब भी खाली नहीं है) ।

इसलिए अगर मिरजा सज्जादअली और मीर

रौशनअली अपना अधिकांश समय बुद्धि तीब्र करने में

व्यतीत करते थे, तो किसी विचारशील पुरुष को क्या

आपत्ति हो सकती थी ?

Q1.प्रेमचंद के उपन्यासों का परिचय दीजिए।

Q2.“सेवासदन' के प्रमुख पात्रों की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए।

Q3.“साहित्य का उद्देश्य' के वैचारिक पक्ष पर प्रकाश डालिए।

Q4.“शतरंज के खिलाड़ी” के मुख्य पात्रों की चरित्रगत विशेषताओं का विवेचन कीजिए।

Q5.“दो बैलों की कथा' के संरचना-शिल्प की विशेषताओं की चर्चा कीजिए।

Q6.‘Same’ wert में बाल मनोविज्ञान के दर्शन होते हैं। कथावस्तु के आधार पर कहानी का विश्लेषण कीजिए।

Q7.निम्नलिखित से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए :

(क) 'सेवासदन' में स्त्री समस्या

(ख) “साहित्य का उद्देश्य” का सार

(ग) “ईदगाह' कहानी का कथ्य

(घ) “पूस की रात' कहानी की भाषा