BHDE-143 · June 2023 · हिन्दी

IGNOU BHDE-143 June 2023 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

BHDE-143

Structured previous year question paper for BHDE-143, June 2023 session (Hindi medium).

Questions: 8

Verified: 10 Aug 2026

सत्रांत परीक्षा

जून, 2023

बी.एच.डी.ई. -143 : प्रेमचंद

समय : 3 घण्टे अधिकतम अंक ; 100

नोट :

(0) प्रथम प्रश्न अनिवार्य है।

(४) शेष में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

(४४) प्रश्नों के लिए निर्धारित अंक उनके सम्मुख दिए

गए हैं।

Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं तीन की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए ; 3x12=36

(क)उमानाथ बहन को अपने घर लाने पर मन में बहुत पछताते । वे अपनी स्त्री को प्रसन्‍न रखने के लिए ऊपरी मन से उसकी हाँ में हाँ मिला दिया करते। गंगाजली को साफ कपडे पहनने का क्‍या अधिकार है ? शान्ता का पालन पहले चाहे कितने ही लाड्-प्यार से हुआ हो, अब उसे उमानाथ की लड़कियों से बराबरी करने का क्‍या अधिकार है ? उमानाथ स्त्री की इन द्वेषपूर्ण बातों को सुनते और उनका अनुमोदन करते। गंगाजली को जब क्रोध आता, तो वह अपने भाई ही पर उतारती।

(ख)सुधार की जिस अवस्था में वह हो, उससे अच्छी अवस्था आने की प्रेरणा हर आदमी में मौजूद रहती है। हममें जो कमजोरियाँ हैं वह मर्ज की तरह हमसे चिमटी हुई हैं। जेसे शारीरिक स्वास्थ्य एक प्राकृतिक बात है और रोग उसका उल्टा उसी तरह नैतिक और मानसिक स्वास्थ्य भी प्राकृतिक बात है और हम मानसिक तथा नैतिक गिरावट से उसी तरह संतुष्ट नहीं रहते, जैसे कोई रोगी अपने रोग स संतुष्ट नहीं रहता।

(ग) घरवालों का तो कहना ही कया मुहल्लेवाले, घर के नौकर-चाकर तक नित्य द्वेषपूर्ण टिप्पणियाँ किया करते थे--बड़ा मनहूस खेल है। घर को तबाह कर देता है। खुदा न करे, किसी को इसकी चाट पड़े, आदमी दीन-दुनिया किसी के काम का नहीं रहता, न घर का, न घाट का। बुरा रोग है। यहाँ तक कि मिरजा की बेगम साहिबा को इससे इतना द्वेष था कि अक्सर खोज-खोजकर पति को cated ffl पर उन्हें इसका अवसर मुश्किल से मिलता था। वह सोती ही रहती थीं, तब तक उधर बाजी बिछ जाती थी, और रात को जब सो जाती थीं तब कहीं, मिरजाजी घर में आते थे।

(घ) गाँव में एक समझू साहु थे, वह इक्का-गाड़ी हाँकते थे। गाँव के गुड-घी लादकर मंडी ले जाते, मंडी से तेल, नमक भर लाते, और गाँव में बेचते। इस बैल पर उनका मन लहराया। उन्होंने सोचा, यह बैल हाथ लगे तो दिनभर में बेखटके तीन खेप हों। आजकल तो एक ही खेप में लाले पडे रहते हें। बैल देखा, गाड़ी में दोड़ाया, बाल-भौंरी की पहचान करायी, मोल-तोल किया और उसे लाकर द्वार पर बाँध ही दिया। एक महीने में दाम चुकाने का वादा ठहरा। चौधरी को भी गरज थी ही, घाटे की परवा न की। (छः) दोनों मित्र जान हथली पर लेकर लपके। साँड को भी संगठित शत्रुओं से लड़ने का तजुरबा न था। वह तो एक शत्रु से मल्लयुद्ध करने का आदी था। ज्यों-ही हीरा पर झपटा, मोती ने पीछे से दौड़ाया। साँड उसकी तरफ मुड़ा तो हीरा ने रगेदा। साँड चाहता था, कि एक-एक करके दोनों को गिरा ले, पर ये दोनों भी उस्ताद थे। उसे वह अवसर न देते थे। एक बार साँड़ झल्लाकर हीरा का अन्त कर देने के लिए चला कि मोती ने बगल से आकर उसके पेट में सींग भोंक दिया। साँड क्रोध में आकर पीछे फिरा तो हीरा ने दूसरे पहलू में सींग चुभा दिया।

Q2.प्रेमचंद का जीवन परिचय दीजिए।

Q3.प्रेमचंद के वैचारिक गद्य पर प्रकाश डालिए।

Q4.“सुमन' की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए।

Q5.“पूस की रात” कहानी के संरचना-शिल्प का विवेचना कीजिए।

Q6.“शतरंज के खिलाड़ी' की परिवेशगत विशेषताओं का वर्णन कोजिए।

Q7.“ईदगाह' में अभिव्यक्त बाल मनोविज्ञान की चर्चा कीजिए।

Q8.निम्नलिखित विषयों में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए : 2x8=16

(ख)'सेवासदन' के कथानक की विशेषताएँ

(ग) 'जुम्मन' का चरित्र-चित्रण

(घ) 'कर्बला' नाटक का कथ्य।