BHDE-143 · December 2022 · हिन्दी
IGNOU BHDE-143 December 2022 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
BHDE-143
Structured previous year question paper for BHDE-143, December 2022 session (Hindi medium).
Questions: 8
Verified: 10 Aug 2026
बी. ए. ( ऑनर्स ) हिन्दी (सी. बी. सी. एस. )
सत्रांत परीक्षा
दिसम्बर, 2022
बी. एच. डी. ई.-148 : प्रेमचंद
समय : 3 घण्टे अधिकवम अक : 1600
नोट ; प्रथम प्रश्न अनिवार्य है। शेष में से किन््हीं चार
अरश्नों को उत्तर दीजिए। ग्रश्नों को लिए निर्धारित अंक
उनके सम्युख दिए यए हैं।
Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं तीन की सन्दर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 3x12=36
(क) कृष्णचन्द्र ने अधिक आपत्ति नहीं की। उन्हें सर्दी लग रही थी। कम्बल ओढ़कर लेटे और तुरन्त ही निद्रा में मग्न हो गये, पर वह शान्तिदायिनी निद्रा नहीं थी, उनकी वेदनाओं का दिग्दर्शन मात्र थी। उन्होंने स्वप्न देखा कि मैं जेलखाने में मृत्यु शैय्या पर पड़ा हुआ हूँ और जेल का दारोगा मेरी ओर घृणित भाव से देखकर कह रहा हे कि तुम्हारी रिहाई अभी नहीं होगी। इतने में गंगाजली और उनके पिता दोनों आकर चारपाई के पास खडे हो गये। उनके मुँह विकृत थे और उन पर कालिमा लगी हुई थी।
(ख) भाषा साधन है, साध्य नहीं। अब हमारी भाषा ने वह रूप प्राप्त कर लिया है कि हम भाषा से आगे बढ़कर भाव की ओर ध्यान दें और इस पर विचार करें कि जिस उद्देश्य से यह निर्माण-कार्य आरम्भ किया गया था, वह क््योंकर पूरा हो। वही भाषा, जिसमें आरम्भ से “बागे-बहार' और “बैताल-पचीसी' की रचना ही सबसे बड़ी साहित्य सेवा थी, अब इस योग्य हो गयी है कि उसमें शास्त्र और विज्ञान के प्रश्नों की भी विवेचना की जा सके और यह सम्मेलन इस सच्चाई की स्पष्ट स्वीकृति है।
(ग) मुन्नी उसके पास से दूर हट गयी और आँखें तरेरती हुई बोली-“कर चुके दूसरा उपाय। जरा सुनूँ तो कौन उपाय करोगे ? कोई खैरात में दे देगा कम्मल ? न जाने कितनी बाकी है, जो किसी तरह चुकने ही नहीं आती। मैं कहती हूँ, तुम क्यों नहीं खेती छोड़ देते ? मर-मर कर काम करो, उपज हो तो बाकी दे दो, चलो छुट्टी हुई। बाकी चुकाने के लिए ही तो हमारा जन्म हुआ है। पेट के लिए मजूरी करो। ऐसी खेती से बाज आये।
(घ) भीतर झाँका, संयोग से कमरा खाली था। मीर साहब ने दो-एक मुहरे इधर-उधर कर दिये थे और अपनी सफाई जताने के लिए बाहर टहल रहे थे। फिर क्या था, बेगम ने अन्दर पहुँचकर बाजी उलट दी, मुहरे कुछ तख्त के नीचे फेंक दिये कुछ बाहर; और किवाड़ें अन्दर से बन्द करके कुंडी लगा दी। मीर साहब दरवाजे पर तो थे ही, मुहरे बाहर फेंके जाते देखे, चूड़ियों की झनक भी कान में पड़ी। फिर दरवाजा बंद हुआ तो समझ गये, बेगम साहिबा बिगड़ गयीं। चुपके से घर की राह (डः) मिठाइयों के बाद कुछ दुकानें लोहे की चीजों की, कुछ गिलट और कुछ नकली गहनों की। लड़कों के लिए यहाँ कोई आकर्षण न था। वे सब आगे बढ़ जाते हैं, हामिद लोहे की दुकान पर रुक जाता है। कई चिमटे रखे हुए थे। उसे खयाल आया, दादी के पास चिमटा नहीं है। तवे से रोटियाँ उतारती हैं, तो हाथ जल जाता है; अगर वह चिमटा ले जाकर दादी को दे दे तो वह कितना प्रसन्न होंगी। फिर उनकी उंगलियाँ कभी न जलेंगी। घर में एक काम की चीज हो जायेगी।
Q2.प्रेमचंद के उपन्यासों का परिचय दीजिए।
Q3.“सेवासदन' की अन्तर्वस्तु पर प्रकाश डालिए।
Q4.“कर्बला' नाटक के वैचारिक पक्ष का परिचय दीजिए।16
Q5.“साहित्य का उद्देश्य निबन्ध के भावपक्ष की चर्चा कीजिए॥
Q6.“शतरंज के खिलाड़ी' कहानी की कथावस्तु का विश्लेषण कीजिए।
Q7.‘fare’ wert के संरचना-शिल्प की विशेषताएँ बताइए
Q8.निम्नलिखित विषयों में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए : 2x8=16
(क) पद्मसिंह का चरित्र-चित्रण
(ख) “संग्राम” नाटक की विशेषताएँ
(ग) “दो बैलों की कथा' कहानी का प्रतिपाद्य
(a) eee की चारित्रिक विशेषताएँ