BHDE-143 · December 2025 · हिन्दी
IGNOU BHDE-143 December 2025 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
BHDE-143
Structured previous year question paper for BHDE-143, December 2025 session (Hindi medium).
Questions: 8
Verified: 10 Aug 2026
मुद्रित पृष्ठों की संख्या : 7 BHDE-143
सत्रांत परीक्षा
दिसम्बर, 2025
बी.एच.डी.ई.-143 : प्रेमचंद
समय : 3३ घण्टे अधिकतम अंक : 100
नोट :; प्रथम प्रश्न अनिवार्य है। शेष में से किन्हीं चार प्रश्नों के
उत्तर दीजिए। प्रश्नों को लिए निर्धारित अंक उनके सम्मुख
दिए गए हैं।
Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं तीन की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 3x12=36
(क) अभिमानी मनुष्य को कृतघ्नता से जितना दुःख होता है, उतना और किसी बात से नहीं होता। वह चाहे अपने उपकारों के लिए कृतज्ञता का भूखा न हो, चाहे उसने नेकी करके दरिया में ही डाल दी हो; पर उपकार का विचार करके उसको अत्यन्त गौरव का आनन्द प्राप्त होता है। उमानाथ ने सोचा, संसार कितना कुटिल है। मैं इनके लिए महीनों कचहरी, दरबार के चक्कर लगाता रहा, वकीलों की कैसी-कैसी खुशामद की, कर्मचारियों के कैसे-कैसे नखरे सहे, निज का सैकड़ों रुपया फूँक दिया, उसका यह यश मिल रहा है।
(ख) निस्सन्देह कला का उद्देश्य सौन्दर्य वृत्ति की पुष्टि करना है और वह हमारे आध्यात्मिक आनन्द की कुंजी है, पर ऐसा कोई रुचिगत मानसिक तथा आध्यात्मिक आनन्द नहीं, जो अपनी उपयोगिता का पहलू न रखता हो। आनन्द स्वतः एक उपयोगितायुक्त वस्तु है और उपयोगिता की दृष्टि से एक ही वस्तु से हमें सुख भी होता है और दुःख भी। आसमान पर छायी लालिमा निस्सन्देह बड़ा सुन्दर दृश्य है, परन्तु आषाढ़ में अगर आकाश पर वैसी लालिमा छा जाय, तो वह हमें प्रसन्नता देने वाली नहीं हो सकती।
(ग) संध्या समय एक पेड़ के नीचे पंचायत बैठी। शेख जुम्मन ने पहले से ही फर्श बिछा रखा था। उन्होंने पान, इलाचयी, हुक्के-तम्बाकू आदि का प्रबंध भी किया था। हाँ, वह स्वयं अलबत्ता अलगू चौधरी के साथ जरा दूर पर बैठे हुए थे। जब पंचायत में कोई आ जाता था, तब दबे हुए सलाम से उसका स्वागत करते थे। जब सूर्य अस्त हो गया और चिड़ियों की कलरवयुक्त पंचायत पेड़ों पर बैठी, तब यहाँ भी पंचायत शुरू हुई। फर्श की एक-एक अंगुल जमीन भर गई; पर अधिकांश दर्शक ही थे। निमंत्रित महाशयों में से केवल वे ही लोग पधारे थे, जिन्हें जुम्मन से अपनी कुछ कसर निकालनी थी।
(घ) लड़कों के लिए यहाँ कोई आकर्षण न था। वे सब आगे बढ़ जाते हैं, हामिद लोहे की दुकान पर रुक जाता है। कई चिमटे रखे हुए थे। उसे खयाल आया, दादी के पास चिमटा नहीं है। तवे से रोटियाँ उतारती हैं, तो हाथ जल जाता है; अगर वह चिमटा ले जाकर दादी को दे दे तो वह कितना प्रसन्न होंगी! फिर उनकी उंगलियाँ कभी न जलेंगी। घर में एक काम की चीज हो जाएगी। खिलौने से क्या फायदा ? व्यर्थ में पैसे खराब होते हैं। जरा देर ही तो खुशी होती है। फिर तो खिलौने को कोई आँख उठाकर नहीं देखता। (ड) मीर साहब की बेगम किसी अज्ञात कारण से मीर साहब का घर से दूर रहना ही उपयुक्त समझती थीं। इसलिए वह उनके शतरंज प्रेम की कभी आलोचना न करती थीं, बल्कि कभी-कभी मीर साहब को देर हो जाती, तो याद दिला देती थीं। इन कारणों से मीर साहब को भ्रम हो गया था कि मेरी स्त्री अत्यन्त विनयशील और गंभीर है। लेकिन जब दीवानखाने में बिसात बिछने लगी और मीर साहब दिनभर घर में रहने लगे, तो बेगम साहिबा को बड़ा कष्ट होने लगा। उनकी स्वाधीनता में बाधा पड़ गई। दिनभर दरवाजे पर झाँकने को तरस जातीं।
Q2.प्रेमचंद के नाटकों का परिचय दीजिए।
Q3.“सेवासदन' की भाषा एवं शैलीगत विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
Q4.“कर्बला' नाटक की अंतर्वस्तु का विवेचन कौजिए।
Q5.“पंच परमेश्वर' की भाषा एवं शैलीगत विशिष्टताओं का
Q6.“ईदगाह' कहानी के प्रमुख पात्रों की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए।
Q7.“पूस की रात” कहानी की परिवेशगत विशेषताओं का
Q8.निम्नलिखित विषयों से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए :
(क) प्रेमचंद का वैचारिक गद्य
(ख) “कर्बला' का भाषिक वैशिष्ट्य
(ग) “हल्कू' की चरित्रगत विशेषताएँ
(a) “सेवासदन' का कथ्य