BHDE-143 · December 2024 · हिन्दी
IGNOU BHDE-143 December 2024 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
BHDE-143
Structured previous year question paper for BHDE-143, December 2024 session (Hindi medium).
Questions: 8
Verified: 10 Aug 2026
मुद्रित पृष्ठों की संख्या : 6 BHDE-143
स्नातक उपाधि कार्यक्रम ( सामान्य )
सत्रांत परीक्षा
दिसम्बर, 2024
बी.एच.डी.ई.-148 : प्रेमचंद
समय / 3 घण्टे अधिकवम अक : 100
नोट : कुल प्राँच प्रश्गों को उत्तर दीजिए। प्रथम प्रश्न
अनिवार्य है। शेष में से किन््हीं चार ग्रश्नों को उत्तर
दीजिए।
Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं तीन की सप्रसंग व्याख्या कीजिए : 3x12=36
(क) पण्डित उमानाथ बिना किसी हीले ही के संसार का सुख-भोग करते थे। उनकी आकाशवृत्ति थी। उनके भैंस और गायें न थीं, लेकिन घर में घी-दूध की नदी बहती थी; वह खेती-बारी न करते थे, लेकिन घर में अनाज की खतियाँ भरी रहती थीं। गाँव में कहीं मछली मरे, कहीं बकरा कटे, कहीं आम टूटे, कहीं भोज हो, उमानाथ का हिस्सा बिना माँगे आप ही आप पहुँच जाता। अमोला बड़ा गाँव था। ढाई-तीन हजार जनसंख्या थी। लेकिन समस्त गाँव में उनकी सम्मति के बिना कोई काम न होता था।
(ख)जब किसी तरह न रहा गया, उसने जबरा को धीरे से उठाया और उसके सिर को थपथपाकर उसे अपनी गोद में सुला लिया। कुत्ते की देह से जाने कैसी दुर्गध आ रही थी, पर वह उसे अपनी गोद में चिपटाए हुए ऐसे सुख का अनुभव कर रहा था, जो इधर महीनों से उसे न मिला था। जबरा शायद समझ रहा था कि स्वर्ग यहीं है, और हल्कू की पवित्र आत्मा में तो उस कुत्ते के प्रति घृणा की गंध तक न थी। अपने किसी अभिन्न मित्र या भाई को भी वह इतनी तत्परता से गले लगाता ।
(ग) प्रातःकाल दोनों मित्र नाश्ता करके बिसात बिछाकर बैठ जाते, मुहरे सज जाते, और लड़ाई के दाँवपेच होने लगते। फिर खबर न होती थी कि कब दोपहर हुई, कब तीसरा पहर, कब शाम ! घर के भीतर से बार-बार बुलावा आता कि खाना तैयार है। यहाँ से जवाब मिलता-चलो, आते हैं, दस्तरख्वान बिछाओ। यहाँ तक कि बावरची विवश होकर कमरे में ही खाना रख जाता था, और दोनों मित्र दोनों काम साथ-साथ करते थे।
(घ) अलगू चौधरी को हमेशा कचहरी से काम पड़ता था। अतएव वह पूरा कानूनी आदमी था। उसने जुम्मन से जिरह शुरू की। एक-एक प्रश्न जुम्मन के हृदय पर हथौड़े की चोट की तरह पड़ता था। रामधन मिश्र इन प्रश्नों पर मुग्ध हुए जाते थे। जुम्मन चकित थे कि अलगू को क्या हो गया। अभी यह अलगू मेरे साथ बैठा हुआ कैसी-केसी बातें कर रहा था ! इतनी ही देर में ऐसी कायापलट हो गयी कि मेरी जड़ खोदने पर तुला हुआ है। न मालूम कब की कसर यह निकाल रहा है ? क्या इतने दिनों की दोस्ती कुछ भी काम न आवेगी ? (ड) झूरी काछी के दोनों बैलों के नाम थे--हीरा और मोती। दोनों पछाई जाति के थे-देखने में सुंदर, काम में चौकस, डील में ऊँचे। बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था। दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मूक भाषा में विचार-विनिमय किया करते थे। एक-दूसरे के मन की बात को कैसे समझा जाता था, हम कह नहीं सकते। अवश्य ही उनमें कोई ऐसी गुप्त शक्ति थी, जिससे जीवों में श्रेष्ठता का दावा करने वाला मनुष्य वंचित हे।
Q2.प्रेमचंद के नाटकों का परिचय दीजिए॥
Q3.“सेवासदन!' उपन्यास के गौण चरित्रों की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए
Q4.“साहित्य का उद्देश्य' निबंध की शैलीगत विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
Q5.“ईदगाह' कहानी की भाषा की विशेषताओं पर उदाहरण सहित विचार कीजिए।
Q6.“पंच परमेश्वर' कहानी के मुख्य चरित्रों की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए।
Q7.“पंच परमेश्वर” कहानी का सार बताते हुए उसके शीर्षक की उपयुक्तता पर विचार कीजिए।
Q8.निम्नलिखित विषयों में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए : 2x8=16
(क)'गोदान' उपन्यास
(ख) 'सेवासदन' उपन्यास की मौलिकता
(घ) “शतरंज के खिलाड़ी ' का प्रतिपाद्य