BHDE-143 · June 2022 · हिन्दी

IGNOU BHDE-143 June 2022 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

BHDE-143

Structured previous year question paper for BHDE-143, June 2022 session (Hindi medium).

Questions: 8

Verified: 10 Aug 2026

मुद्रित पृष्ठों की संख्या ; 7 BHDE-143

स्नातक उपाधि कार्यक्रम ( सी. बी. सी. एस. )

सत्रांत परीक्षा

जून, 2022

बी. एच. डी. ई.-148 : प्रेमचंद

समय : 3 घण्टे अधिकतम अंक ; 100

नोट : कुल पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रथम प्रश्न

अनिवार्य है। शेष में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर

दीजिए।

Q1.निम्नलिखित गद्यांशों FY oa fet de at aren व्याख्या कीजिए : प्रत्येक 12

(क) घर की लड़ाई से उनका हृदय काँपता था, पर यह चोट न सही गई। बोले-तुम क्‍या चाहती हो कि सदन के लिए मास्टर न रखा जाए और वह यों ही अपना जीवन नष्ट करें ? चाहिए तो यह था कि तुम मेरी सहायता करती, उलटे और जी जला रही हो। सदन मेरे उसी भाई का लड़का हे, जो अपने सिर पर आटे-दाल की गठरी लादकर मुझे स्कूल में दाखिल कराने आये थे। मुझे वह दिन भूले नहीं हैं। उनके उस प्रेम का स्मरण करता हूँ तो जी चाहता है कि उनके चरणों पर गिरकर घण्टों रोऊं। तुम्हें अब अपने रोशनी और पंखे के खर्च में, पान-तम्बाकू के खर्च में, घोड़े-साईस के खर्च में किफायत करना भारी मालूम होता है, किन्तु भेया मुझे वार्निश वाले जूते पहनाकर आप नंगे पाँव रहते थे।

(ख) कात्ते की देह से जाने कैसी दुर्गध आ रही थी, पर वह उसे अपनी गोद में चिपटाए हुए ऐसे सख का अनुभव कर रहा था, जो इधर महीनों से उसे न मिला था। जबरा शायद समझ रहा था कि स्वर्ग यहीं है, और हल्कू की पवित्र आत्मा में तो उस कुत्ते के प्रति घृणा की गंध तक न थी। अपने किसी अभिन्‍न मित्र या भाई को भी वह इतनी तत्परता से गले लगाता। वह अपनी दीनता से आहत न था, जिसने उसे आज इस दशा को पहुँचा दिया। नहीं, इस अनोखी मैत्री ने जैसे उसकी आत्मा के सब द्वार खाल दिये थे। सहसा जबरा ने किसी जानवर की आहट पाई। इस विशेष आत्मीयता ने उसमें एक नई स्फार्ति पैदा कर दी थी, जो हवा के ठंडे झोंकों को तुच्छ समझती थी।

(ग) मीर साहब की बेगम किसी अज्ञात कारण से मीर साहब के घर से दूर रहना ही उपयुक्त समझती थीं। इसलिए वह उनके शतरंज प्रेम की कभी आलोचना न करती थीं, बल्कि कभी-कभी मीर साहब को देर हो जाती, तो याद दिला देती थीं। इन कारणों से मीर साहब को भ्रम हो गया था कि मेरी स्त्री अत्यंत विनयशील और गंभीर है। लेकिन जब दीवानखाने में बिसात बिछने लगी और मीर साहब दिन-भर घर में रहने लगे, तो बेगम साहिबा को बड़ा कष्ट होने लगा। उनकी स्वाधीनता में बाधा पड़ गई। दिन-भर दरवाजे पर झाँकने को तरस जातीं।

(घ) बड़ो-बड़ी इमारतें आने लगीं; यह अदालत है, यह कालेज है, यह क्लब-घर है। इतने बड़े कालेज में कितने लड़के पढ़ते होंगे ? सब लड़के नहीं हें जी! बड़े-बड़े आदमी हैं। सच! उनकी बड़ी-बड़ी मूँछें हैं। इतने बड़े हो गये, अभी तक पढ़ने जाते हैं। न जाने कब तक पढ़ेंगे और क्या करेंगे इतना पढ़कर! हामिद के मदरसे में दो-तीन बड़े-बड़े लड़के हैं, बिल्कुल तीन कौड़ी के रोज मार खाते हैं, काम से जी चुराने वाले। इस जगह भी उसी तरह के लोग होंगे और om क्लब-घर में जादू होता है। (ड) इस विषय में तो सब सहमत थे कि समझू को बैल का मूल्य देना चाहिए। परन्तु दो महाशय इस कारण रियायत करना चाहते थे कि बैल के मर जाने से समझू को हानि हुई। इसके प्रतिकूल दो सभ्य मूल के अतिरिक्त समझू को दंड भी देना चाहते थे, जिससे फिर किसी को पशुओं के साथ ऐसी निर्दयता करने का साहस न हो। अंत में जुम्मन ने फैसला सुनाया-अलगू चौधरी और समझू साहु ! पंचों ने तुम्हारे मामले पर अच्छी तरह विचार किया। समझू को उचित है कि बैल का पूरा दाम दें। जिस वक्त उन्होंने बैल लिया, उसे कोई बीमारी न थी। अगर उसी समय दाम दे दिये जाते, तो आज समझू उसे फेर लेने का आग्रह न करते।

Q2.प्रेमचंद के उपन्यासों की विशेषताएँ बताइए।

Q3."सेवासदन' की कथावस्तु के विविध चरणों का विश्लेषण कीजिए।

Q4.“कर्बला' नाटक के चरित्रों की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

Q5.“शतरंज के खिलाड़ी' कहानी की परिवेशगत विशेषताएँ बताइए।

Q6.“ईदगाह' कहानी का सार अपने शब्दों में लिखिए।

Q7.“दो बैलों की कथा' कहानी के परिवेश की विशिष्टताएँ बताइए।

Q8.निम्नलिखित विषयों में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए : प्रत्येक 8

(क) “प्रेमाश्रय” उपन्यास

(ग) “साहित्य का उद्दश्य' का सार

(a) “पूस की रात' के शीर्षक की उपयुक्तता