BHDE-143 · December 2023 · हिन्दी
IGNOU BHDE-143 December 2023 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
BHDE-143
Structured previous year question paper for BHDE-143, December 2023 session (Hindi medium).
Questions: 8
Verified: 10 Aug 2026
मुद्रित पृष्ठों की संख्या : 6 BHDE-143
बी. ए. ( ऑनर्स ) हिन्दी (सी. बी. सी. एस. )
सत्रांत परीक्षा
दिसम्बर, 2028
बी.एच.डी.ई.-148 : प्रेमचन्द
समय : 3 घण्टे अधिकतम अंक ; 100
नोट : प्रथम प्रश्न अनिवार्य है। शेष में से किन्हीं चार
प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रश्नों के लिए निर्धारित अंक
उनके सम्मुख दिए गए हैं।
Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं तीन की संदर्भ-सहित व्याख्या कीजिए ; 3x12=36
(क)सदन बाल्यकाल में ढीठ, हठी और लड़ाकू था। वयस्क होने पर वह आलसी, क्रोधी और बड़ा उद्ण्ड हो गया। माँ-बाप को यह सब मंजूर था। वह चाहे कितना ही बिगड़ जाए, पर आँख के सामने से न टले। उससे एक दिन का बिछोह भी न सह सकते थे। पद्मसिंह ने कितनी ही बार अनुरोध किया कि इसे मेरे साथ आने दीजिए, मैं इसका नाम किसी अंग्रेजी मदरसे में लिखा दूँगा, किन्तु माँ-बाप न कभी स्वीकार नहीं किया। सदन ने अपने कस्बे ही के मदरसे में उर्दू और हिन्दी पढ़ी थी। मामा के विचार में उसे इससे अधिक विद्या की जरूरत ही नहीं थी।
(ख)क्या वह साहित्य, जिसका विषय श्रंगारिक मनोभावों और उनसे उत्पन्न होने वाली विरह व्यथा, निराशा आदि तक ही सीमित हो--जिसमें दुनिया और दुनिया की कठिनाइयों से दूर भागना ही जीवन की सार्थकता समझी गयी हो, हमारी विचार और भाव संबंधी आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है। पृंगारिक मनोभाव मानव जीवन का एक अंग मात्र है और जिस साहित्य का अधिकांश इसी से संबंध रखता हो, वह उस जाति और उस युग के लिए गर्व करने की वस्तु नहीं हो सकता और न ही उसकी सुरुचि का ही प्रमाण हो सकता है।
(ग) वह अपनी दीनता से आहत न था, जिसने उसे आज इस दिशा को पहुँचा दिया। नहीं, इस अनोखी मैत्री ने जैसे उसकी आत्मा के सब द्वार खोल दिये थे। सहसा जबरा ने किसी जानवर की आहट पाई। इस विशेष आत्मीयता ने उसमें एक नई स्फूर्ति पैदा कर दी थी, जो हवा के ठंडे झोकों को तुच्छ समझती थी। वह झपटकर उठा और छपरी के बाहर आकर भूँकने लगा। हल्कू ने उसे कई बार चुमकार कर बुलाया, पर वह उसके पास न आया।
(घ) कुछ ऐसे सज्जन भी थे, जिन्हें हास्य-रस के रसास्वादन का अच्छा अवसर मिला। झुकी हुई कमर, पोपला मुँह, सन के-से बाल-इतनी सामग्री एकत्र हों, तब हँसी क्यों न आवे ? ऐसे न्यायप्रिय, दयालु, दीन-वत्सल पुरुष बहुत कम थे, जिन्होंने उस अबला के दुखड़े को गौर से सुना और उसको सांत्वना दी हो। चारों ओर से घूम-घामकर बेचारी अलगू चौधरी के पास आयी। लाठी पटक दी और दम लेकर बोली-बेटा, तुम भी दम भर के लिए मेरी पंचायत में चले आना। (ड) हामिद के साथी आगे बढ़ गये हैं। सबील पर सब-के-सब शर्बत पी रहे हैं। देखो, सब कितने लालची हैं। इतनी मिठाइयाँ लीं, मुझे किसी ने एक भी न दी। उस पर कहते हं, मेरे साथ खेलो। मेरा यह काम करो। अब अगर किसी ने कोई काम करने कहा, तो पूछूँगा। खायें मिठाइयाँ, आप मुँह सड़ेगा, फोडे-फुन्सियाँ निकलेंगी, आपको जबान चटोरी हो जाएगी। तब घर से पैसे चुरायेंगे और मार खायेंगे। किताब में झूठी बातें थोड़े ही लिखी हैं। मेरी जबान क्यों खराब होगी ? अम्माँ चिमटा देखते ही दौड़कर मेरे हाथ से ले लेंगी।
Q2.प्रेमचंद की कहानियों की विशेषताओं की चर्चा कीजिए।
Q3."सेवासदन' की भाषागत विशेषताओं का परिचय दीजिए।
Q4.“साहित्य का उद्दश्य' निबंध की भाषा एवं शैलीगत विशिष्टताएँ बताइए।
Q5.‘Fa al रात” कहानी के प्रतिपाद्य पर प्रकाश डालिए।
Q6.“पंच परमेश्वर” कहानी की कथावस्तु के विविध सोपानों का विश्लेषण कीजिए।
Q7.'शतरंज के खिलाड़ी” कहानी के संरचना-शिल्प का विवेचन कीजिए।
Q8.निम्नलिखित विषयों में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए : 2268-16
(क)विट्ठलदास की चारित्रिक विशेषताएँ
(ख)'सेवासदन' उपन्यास की मूल समस्या
(ग) 'ईदगाह' कहानी का सार