BHDC-109 · June 2022 · हिन्दी
IGNOU BHDC-109 June 2022 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
BHDC-109
Structured previous year question paper for BHDC-109, June 2022 session (Hindi medium).
Questions: 8
Verified: 10 Aug 2026
बी.ए. (ऑनर्स) हिन्दी (34प्ता0प्त)
सत्रांत परीक्षा
जून, 2022
बी.एच.डी.सी.-109 : हिन्दी उपन्यास
समय : 3 घण्टे अधिकतम अंक : 100
नोट: प्रथम ग्रश्न अनिवार्य है / शेष में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर
दीजिए /
Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं तीन की संदर्भ-सहित व्याख्या कीजिए : 3x12=36
(क) निर्मला ने कुछ और नहीं सुना । उसे ऐसा जान पड़ा मानो सारी पृथ्वी चक्कर खा रही है । मानो उसके प्राणों पर सहसीरों वज्रों का आघात हो रहा है । उसने जल्दी से अलगनी पर लटकी हुई चादर उतार ली और बिना मुँह से एक शब्द निकाले कमरे से निकल गई । डॉक्टर साहब खिसियाये हुए-से रोना मुँह बनाये खड़े रहे । उसको रोकने की या कुछ कहने की हिम्मत न पड़ी । निर्मला ज्योंही द्वार पर पहुँची उसने सुधा को ताँगे से उतरते देखा । सुधा उसे देखते ही जल्दी से उतरकर उसकी ओर लपकी और कुछ पूछना चाहती थी, मगर निर्मला ने उसे अवसर न दिया, तीर की तरह झपटकर चली । सुधा एक क्षण तक विस्मय की दशा में खड़ी रही । बात क्या है, उसकी समझ में कुछ न आ सका । वह व्यग्र हो उठी ।
(ख) यहाँ किसी को कहने का लोभ नहीं है कि मैं सच्चरित्र हूँ । यहाँ सच्चरित्रता के अर्थ में मानव का मूल्य नहीं जान जाता । दुर्जनता ही मानो कीमती है । यहाँ उसी हिसाब से मानव की घट-बढ़ कीमत है । मैं मानती हूँ कि यही रोग है, यही भयानक जड़ता है । किन्तु यही लाभदायक भी है । इस जगह आकर यह असंभव है कि कोई अपने को सच्चरित्र दिखाए, दिखाना चाहे, या दिखा सके । यहाँ सदाचार का कुछ मूल्य ही नहीं है, अपेक्षा ही नहीं है । बल्कि ऋण मूल्य है । अगर कहीं भीतर, बहुत भीतर मज्जा तक में छिपा पशुता का कीड़ा है तो यहाँ वह ऊपर आ रहेगा । यहाँ छल असंभव है, जो छल कि सभ्य समाज में जरूरी ही है ।
(ग) जब जीवन का मूल्यांकन करने बैठा हूँ तो उसे भी सुना दूंगा । जीवन-माला की प्रत्येक मंज़िल पर मुझे श्री रामचरणानुराग मिला । अतः कथा मेरी न होकर भक्ति-धारा के प्रवाह की ही है । फिर उसे सुनाने में मुझे संकोच क्यों हो । कहकर बाबा चुप हो गए । क्षण भर ऐसे ही बीता, फिर वे रामू के हाथों से अपना पैर झटका देकर छुड़ाते हुए सहसा उठ बैठे । उनकी दृष्टि किसी दूरागत दृश्य को देख रही थी । स्मृति लोक में नगाड़े बज रहे थे और अंधकार क्रमशः उजाले में परिवर्तित होता जा रहा था । मनोदृष्टि में हिमाच्छादित कैलास पर्वत और मानसरोवर का परमपावन और सुहावना दृश्य झलका । नगाड़ों की ध्वनि मानो हर-हर कर रही थी ।
(घ) मरने के समय वह चिर स्थिर था, शांत था, अडिग और निर्भय । वह सब में रम रहा है, मेरे और जल्लाद के भीतर यही है, जल्लाद की तलवार और मेरे सिर में भी यही है । सब में वही है । सब बराबर है । लाखी और अटल में वही है ! दोनों में वही है ? फिर मैंने उन दोनों के बीच में भेद क्यों किया ? पर वह तो वर्णाश्रम की बात थी । जो कुछ भी हो, अब किसी के लिए मन में कोई बुराई नहीं । सिकन्दर के लिए नहीं, मौलवियों के लिए नहीं, (ड) अजय ने भी जाने क्या चाहा था उससे । वह नहीं दे पाई तो अजय उसकी ज़िंदगी से निकल गया । अब बंटी भी कुछ चाहता था । पता नहीं बंटी ही चाहता था या कि अजय ही बंटी में उतरकर नए सिरे से फिर वही चाहने लगा था, जो तब वह उसे नहीं दे पाई थी । नहीं, यह उसका भ्रम है । अजय उससे कुछ नहीं चाहता । वह अपनी भरी-पूरी ज़िंदगी जी रहा है । उसने शकुन को काट दिया है, शायद कोई कसक भी बाकी नहीं है । पर जब शकुन ने अपने जीवन को भरा-पूरा करना चाहा, अजय की कसक को भी धो-पौंछना चाहा तो बंटी...
Q2.प्रेमचंद के उपन्यासों में वर्णित देशकाल का परिचय दीजिए ।
Q3.निर्मला उपन्यास के परिवेश का विस्तृत विवेचन Fife |
Q4.त्याग-पत्र उपन्यास के संरचना-शिल्प पर प्रकाश डालिए ।
Q5.'मानस का हंस' के प्रमुख पात्रों की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए ।
Q6.'मृगनयनी' के प्रतिपाद्य को विश्लेषित कीजिए ।
Q7.मन्नू भंडारी के कथा साहित्य का परिचय दीजिए ।
Q8.निम्नलिखित विषयों में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए : 2x8=16
(क) प्रेमचंद-पूर्व हिन्दी उपन्यास
(ख) Se ak aay’ उपन्यास
(ग) “ea? की संवाद योजना
(a) मृगनयनी' में इतिहास और कल्पना