BHDC-109 · June 2023 · हिन्दी
IGNOU BHDC-109 June 2023 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
BHDC-109
Structured previous year question paper for BHDC-109, June 2023 session (Hindi medium).
Questions: 8
Verified: 10 Aug 2026
कुल मुद्रित पूष्ठों की संख्या : BHDC-109
बी. ए. ( ऑनर्स ) हिन्दी सत्रांत परीक्षा
जून, 2023
बी. एच. डी. सी.-109 : हिन्दी उपन्यास
समय : 3 घण्टे अधिकतम अंक ; 100
नोट : प्रथम प्रश्न अनिवार्य है। शेष में से किन्हीं चार प्रश्नों
के उत्तर दीजिये।
Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं तीन की सन्दर्भ-सहित व्याख्या कीजिए ; 12x3=36
(क)मैं आज इसी पर आश्चर्य किया करता हूँ कि “लोग क्या समझेंगे', इसका बोझ अपने ऊपर लेकर हम क्यों अपनी चालाकी को सीधा नहीं रखते हें क्यों उसे तिरछा आड़ा बनाने की कोशिश करते हैं। लोगों के अपने मुँह हं, अपनी समझ के अनुसार वे कुछ-कुछ क्यों न कहेंगे ? इसमें उनको क्या बाधा है, उन पर किसी का क्या आरोप हो सकता है ? फिर भी उस सबका बोझ आदमी अपने ऊपर स्वीकार कर अपने भीतर के सत्य को अस्वीकार करता है--यह उसकी कैसी भारी मूर्खता है।
(ख)काम कम होता है, हुल्लड़ अधिक। जरा-जरा-सी बात पर घण्टों तर्क-वितर्क होता है और अन्त में वकील साहब को आकर निर्णय करना पड़ता है। एक कहता है, यह घी खराब है, दूसरा कहता है, इससे अच्छा बाजार में मिल जाये तो टाँग की राह से निकल जाऊँ। तीसरा कहता है, इसमें तो हीक आती है। चौथा कहता है, तुम्हारी नाक ही सड़ गई है, तुम क्या जानो घी किसे कहते हैं।
(ग) उस दिन आँखें बार-बार द्वार की ओर दोड़ती रहीं पर मोहिनी न आई। लोगों के आग्रह से उन्होंने मीरा और कबीर के भजन गाए पर आज उन्हें गायन में सुख न मिला। तलसी के कठ में विरह-पीड़ा व्याल-सी लिपटी थी। भक्त मंडली सुनकर आत्मविभोर हो गई परन्तु मेघा भगत के rad भाव से केवल इतना ही कहा-'हे राम, नारी के विरह में जेसी टीस कामी के कलेजे में उठती है वैसी ही मेरे कलेजे में भी अपने लिए भर दो।
(घ) ऊँघती लहराती बालों को किसी कागज पर उतार लिया जाये। पहाड़ों की ऊँचाइयों को एक स्थल पर क्यों न इकट्ठा कर लूँ ? बडे-बडे पेड़ों के वन्दनवार बना लिये जायें और डालियों-पत्तों के साजां के झरोखे। उनमें से चाँदी की कड़ियों वाली लहरों को नाचता हुआ देखा जाये और फिर गारऊँ,.-जाग परी मैं पिय के जगाये-लहरें चाँदी आर मोतियों के हार से पहने हुए इठलाती हुई नाचती रहेंगी, वन्दनवार सदा हरे रहेंगे, पत्तों की झिलमिलियाँ निरन्तर चाँदनी की भीगी हुई चमक और फूलों की महक से लदी रहेंगी। (डः) एक अध्याय था, जिसे समाप्त होना था और वह हो गया। दस वर्ष का यह विवाहित जीवन-एक अंधेरी सुरंग में चलते चले जाने की अनुभूति से भिन् न था। आज जैसे एकाएक वह उसके अन्तिम छोर पर आ गई है। पर आ पहुँचने का aig ft तो नहीं हे, ढकेल दिये जाने की विवश कचोट-भर है। पर कैसा है यह छोर ? न प्रकाश, न वह खुलापन, न मुक्ति का एहसास।
Q2.हिन्दी उपन्यास के विकास पर प्रकाश डालिये।
Q3.प्रेमचन्द के उपन्यासों का परिचय दीजिये।
Q4.“त्याग-पत्र' की संरचना और शिल्प पर प्रकाश डालिये।
Q5.“मानस का हंस” के प्रमुख चरित्रों की चारित्रिक विशेषतायें बताइये।
Q6.“मृगनयनी' के कथानक के अवान्तर प्रसंगों पर विचार कीजिये।
Q7.“आपका बंटी' उपन्यास की परिवेशगत विशिष्टताओं की चर्चा कीजिए।
Q8.निम्नलिखित विषयों में से किन्हीं दो पर टिप्पणी लिखिये : 8225-16
(क)'निर्मला' उपन्यास के शीर्षक की सार्थकता।
(ख)'परख ' उपन्यास।
(ग) प्रेमचन्द के उपन्यासों की भाषा।
(घ) “मानस का हंस' का सामाजिक परिवेश।