BHDC-109 · December 2022 · हिन्दी

IGNOU BHDC-109 December 2022 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

BHDC-109

Structured previous year question paper for BHDC-109, December 2022 session (Hindi medium).

Questions: 8

Verified: 10 Aug 2026

सत्रांत परीक्षा

दिसम्बर, 2022

बी. एच. डी. सी.-109 : हिन्दी उपन्यास

समय : 3 घण्टे अधिकतम अक : 100

नोट ; प्रथम ग्रश्न अनिवार्य है। शेष में से किन्‍्हीं चार प्रश्नों

को उत्तर दीजिए।

Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं तीन की सन्दर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 12x3=36

(क) दोनों महिलाएँ रोने लगीं। इधर जब से निर्मला ने चारपाई पकड़ ली है, रुक्मिणी के हृदय में दया का सोता-सा खुल गया हेै। द्वेष का लेश भी नहीं रहा। कोई काम करती हों, निर्मला की आवाज सुनते ही दोड़ती हैं। घण्टों उसके पास कथा-पुराण सुनाया करती हैं। कोई ऐसी चीज पकाना चाहती हैं, जिसे निर्मला रुचि से खाये। निर्मला को कभी हँसते देख लेती हैं तो निहाल हो जाती हैं और बच्ची को तो अपने गले का हार बनाये रहती हैं। उसी की नींद सोती हैं उसी की नींद जागती हैं। वही बालिका अब उनके जीवन का आधार है।

(ख)उस बात को सत्रह से कुछ ऊपर ही वर्ष हो गये हैं। आज महाश्चर्य और महासंताप का विषय मेरे लिए यह है कि किस अमानुषिकता के साथ ये सत्रह के सत्रह वर्ष मैं बुआ को बिना देखे काट गया ! वह बुआ जिन्होंने बिना लिये दिया, जिन्होंने कुछ किया, मुझे प्रेम ही किया। जिनकी याद मेरे भीतर अब अँगार-सी जलती है। जिनका जीवन कुछ ही ऊपर उठती लौ की भाँति जलता रहा। धुआँ उठा तो उठा पर लौ प्रकाशित रही। उन्हीं बुआ को एक तरफ डालकर किस भाँति अपनी प्रतारणा करता रहा ?

(ग) तीसरे दिन तुलसी ने अपने मन को बहुत-बहुत बरजा किन्तु उनके पैर अपने आप ही मेघा भगत के निवास की ओर बढ़ गए। उस दिन आँखें बार-बार द्वार की ओर दौड़ती रहीं पर मोहिनी न आई। लोगों के आग्रह से उन्होंने मीरा और कबीर के भजन गाए पर आज उन्हें गायन में सुख न मिला। तुलसी के कंठ में विरह-पीड़ा व्याल-सी लिपटी थी। भक्त मंडली सुनकर आत्मविभोर हो गई परन्तु मेघा भगत के स्वगत भाव से केवल इतना ही कहा-'हे राम, नारी के विरह में जैसी टीस कामी के कलेजे में उठती है वैसी ही मेरे कलेजे में भी अपने लिए भर दो।'

(घ) वज् मुष्ठि में बरछीं की मूँठ को पकड़कर नोक से कवच को झन-झन के साथ फोड़ा और चोर को धराशायी कर दिया। दो दिन के अभ्यास में कितना सफल, प्रबल, तौला हुआ प्रहार रहा ! दूर-दूर तक कहीं भी कोई सहायता प्राप्त नहीं, रोने-चीखने तक की भी कोई सुनता नहीं। कोई और स्त्रियाँ ऐसी परिस्थिति में पड़ी होतीं तो डाकू उनको उठा ले जाते और उनके सतीत्व को उजाड़ देते। निन्‍नी के हृदय के एक कोने में अभिमान जाग-जाग पड़ रहा था। परन्तु वे तुर्क रहे होंगे। आगे अनेकों को साथ लाएँगे। तब क्‍या होगा ? यह डर निन्‍नी के अभिमान को दबा-दबा डालता था। (ड) वह जानती थी कि ये कोने जब होते हैं तो कितने पैने होते हैं। कैसे इनसे सब कुछ कटता चलता है, विश्वास, सदभावना, अपनत्व ! सारी की सारी जिन्दगी बँट जाती है खंडों में, टुकड़ों में कि इसके बाद एक पूरी जिन्दगी जीना " नहीं, वह अब और उस सबसे गुजरना भी नहीं चाहती। बड़ी से बड़ी कीमत भी चुकानी होगी तो चुका देगी।”

Q2.प्रेमचन्द्र के रचनात्मक वैशिष्ट्य. पर प्रकाश डालिए।

Q3.“निर्मला उपन्यास की कथावस्तु की विशेषताएँ बताइए

Q4.जैनेन्द्र के उपन्यासों का परिचय दीजिए।

Q5.“मानस का हँस' के आधार पर तुलसीदास की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए

Q6.“मृगनयनी' उपन्यास के कथानक के अवान्तर प्रसंगों को विश्लेषित कीजिए।

Q7.“आपका बंटी” उपन्यास की भाषागत विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

Q8.निम्नलिखित विषयों में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए : 8x2=16

(क) प्रेमचंदोत्तर उपन्यास

(ग) “त्याग-पत्र' की अन्तर्वस्तु

(घ) अमृतलाल नागर का महत्व