MHD-15 · June 2022 · हिन्दी

IGNOU MHD-15 June 2022 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

हिन्दी उपन्यास-2 (Hindi Novel-2)

Structured previous year question paper for MHD-15, June 2022 session (Hindi medium).

Questions: 6

Verified: 26 Jul 2026

मुद्रित पृष्ठों की संख्या : 5 MHD-15

हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि ( एम. ए. हिन्दी )

सत्रांत परीक्षा

जून, 2022

एम.एच.डी.-15 : हिन्दी उपन्यास--2

समय : 2 घण्टे अधिकतम अंक ; 50

नोट : प्रथम प्रश्न अनिवार्य है। शेष में से किन्हीं तीन प्रश्नों

के उत्तर दीजिए।

Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं दो की सप्रसंग व्याख्या कीजिए ; 2x10=20

(क)मामा जब तुमसे खुद तुम्हारे कातिल का नाम पूछेगा तो तुम्हारी उंगली किस तरफ उठेगी ? क्‍या खुदा नहीं जानता कि तुम्हारे कत्ल के लिए उत्तेजना दिलाने की जिम्मेदारी उन नेताओं पर है जो तुम्हारे जैसे इंसानों के शासन के सिंहासन पर पहुँच सकने का जीना बनाने के लिए जनता का ईंट-गारे की तरह प्रयोग करना चाहते हैं ? क्‍या हमारे सर्व-साधारण अपने नेताओं को मानवता की कसौटी पर जांच कर नहीं परखेंगे ? कया अपने स्वार्थों के लिए सर्व-साधारण को अंधा बना देना ही धर्म की रक्षा, प्रजातंत्र और जनवाद है ?

(ख)बेटा, अगर तुझे नेक राह की जरूरत है तो तेरे सामने फकीरों-परहेजगारों का रास्ता खुल पड़ा। जिसे यह खौफ है कि वह खुद तकलीफ न उठाए उसे भला दूसरों का नुकसान क्‍यों पसंद आएगा और उसकी तबीयत में यह आदत नहीं है तो उसके मुल्क में अमन-चैन की बू भी नहीं है। अगर तू कानून-कायदे से मजबूर है तो खुशी इख्तियार कर और अगर तन्‍्हा है, पाक-साफ है तो अपना रास्ता ले। उस मुल्क में खुशहाली की उम्मीद न रख जिसमें बादशाह-रियाया एक दूसरे से नाराज हैं।

(ग) हमारे इतिहास में चाहे युद्धकाल रहा हो, या शांतिकाल-राजमहलों से लेकर खलिहानों तक गुटबंदी द्वारा “मैं” को 'तू' और “तू' को “मैं” बनाने की शानदार परम्परा रही है। अंग्रेजी राज में अंग्रेजों को बाहर भगाने के झंझट में कुछ दिनों के लिए हम उसे भूल गए थे। आजादी मिलने के बाद अपनी और परम्पराओं के साथ इसको भी हमने बढ़ावा दिया है। अब हम गुटबंदी को तू-तू, मैं-मैं, लात-जूता, साहित्य और कला आदि सभी पद्धतियों से आगे बढ़ा रहे हैं। यह हमारी सांस्कृतिक आस्था है। यह वेदांत को जन्म देने वाले देश की उपलब्धि है। यहो संक्षेप में, गुटबंदी का दर्शन, इतिहास और भूगोल है।

(घ) हाँ, लेकिन जो इस नैतिक विकृति से अपने को अलग रखकर भी इस तमाम व्यवस्था के विरुद्ध नहीं लड़ते, उनकी मर्यादाशीलता सिर्फ परिष्कृत कायरता होती है। संस्कारों का अन्धानुसरण ! और ऐसे लोग भले आदमी कहलाये जाते हैं, उनकी तारीफ भी होती है, पर उनकी जिन्दगी बेहद करुण और भयानक हो जाती है और सबसे बड़ा दुःख यह है कि वे भी अपने जीवन का यह पहलू नहीं समझते और बैल की तरह चक्कर लगाते चले जाते

Q2.क्या 'झूठा-सच' को विभाजन का महाकाव्य कहा जा सकता है ? अपना मत प्रस्तुत कीजिए।

Q3.क्या “जिन्दगीनामा' को आंचलिक उपन्यास की संज्ञा दी जा सकती है ? ठोस तर्कों द्वारा अपना मत प्रस्तुत कीजिए।

Q4.औपन्यासिक तत्वों के आधार पर 'सूरज का सातवाँ घोड़ा' की समीक्षा प्रस्तुत कीजिए।

Q5.“राग-दरबारी' में चित्रित परिवेश की विशेषताओं का सोदाहरण उल्लेख कीजिए।

Q6.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए :

(क) 'झूठा-सच' का राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

(ख) “जिन्दगीनामा' की भाषिक-संरचना

(ग) “सूरज का सातवाँ घोड़ा' का प्रतिपाद्य

(a) “राग-दरबारी' में व्यंग्य