MHD-15 · December 2013 · हिन्दी

IGNOU MHD-15 December 2013 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

हिन्दी उपन्यास-2 (Hindi Novel-2)

Structured previous year question paper for MHD-15, December 2013 session (Hindi medium).

Questions: 6

Verified: 26 Jul 2026

हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि ( एम.एच.डी. )

दा सत्रांत परीक्षा

‘ दिसम्बर, 2013

हु एम.एच.डी.-15 : हिन्दी उपन्यास-2

समय : 2 घण्टे अधिकव्म अंक : 50

नोट: प्रथम प्रश्न अनिवार्य है। शेष प्रश्नों में से किन्हीं तीन के उत्तर

दीजिए।

Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं दो की संदर्भ एवं प्रसंग सहित व्याख्या कीजिए : 10x2=20

(क) “सदा ही ऐसा हुआ है। संत अपने जीवन में गरीबों के होते हैं। मृत्यु के बाद अमीर उन्हें छीन लेते हैं। भगवान बुद्ध भिक्षा-वृत्ति से जीवन बिताते थे। उनके निर्वाण के बाद राजा उनके प्रचारक और प्रतिनिधि बन गये। ईसा के साथ भी यही हुआ। वही इस संत के साथ हो रहा है। कल यह लोग ताजमहल की लागत का एक गाँधी स्मारक बना देंगे और गाँधीजी के सिद्धांतों को उस महल की नींव में दबा देंगे। जैसे बुद्ध के दाँत को रखकर स्तूप बना दिये थे और बुद्ध के अपरिग्रह के नामलेवा सेनायें लेकर साम्राज्य विस्तार के लिए चढ़ाइयाँ करने लगे थे। गाँधी, बुद्ध और ईसा की तरह अनुकरण के लिए नहीं, केवल पूजा के लिए अवतार बन कर रह जायेगा।'!

(ख) दोस्तों-यारो, दिल्ली में अपनी-अपनी प्रीतें-मोहब्बतें धारकर माई हीर को सलाम करो। हीर और राँझा दोनों हमारी इस मुजलिस में शामिल हैं। लोक आख्यान डालते हैं कि जितनी बार इस अलबेले जोड़े के प्रीति-प्यार के दुनिया में गाए जाएँगे, उतनी बार हुस्न के महताब चमकेंगे आशिकों के दिलों में |! माशूकों की आँखों में ! जितनी बार हीर के दरदीले सुर हवा में लहराएँगे उतनी बार हीर सयालों की, राँझा तख़्त हज़ारे का, अपनी रूहों से इन मजलिसों में शामिल होंगे।

(ग) जब मैं प्रेम पर आर्थिक प्रभाव की बात करता हूँ तो मेरा मतलब यह रहता है कि वास्तव में आर्थिक ढाँचा, हमारे मन पर इतना अजब सा प्रभाव डालता है कि मन की सारी भावनाएँ उससे स्वाधीन नहीं हो पातीं और हम जैसे लोग जो न उच्च वर्ग के हैं, न निम्न वर्ग के, उनके यहाँ रूढ़ियाँ, परम्पराएँ, मर्यादाएँ भी ऐसी पुरानी और विषाक्त हैं कि कुल मिलाकर हम सभी पर ऐसा प्रभाव पड़ता है कि हम यंत्र-मात्र रह जाते हैं। हमारे अंदर उदार और. ऊँचे सपने खत्म हो जाते हैं और अजब-सी जड़-मूर्च्छना हम पर छा जाती है।

(घ) वैद्यजी को तब बताया गया कि हमें जनता के सामने आदर्श उपस्थित करना चाहिए। ऐसा न हुआ तो जनता का आचरण बिगड़ जाएगा। वह बिगड़ा तो पूरा देश बिगड़ेगा, वर्तमान बिगड़ेगा और भविष्य बिगड़ेगा। राम ने क्या किया था? सीता का त्याग किया था कि नहीं तभी हम आज तक रामराज्य की याद करते हैं। त्याग द्वारा भोग करना चाहिए। यही हमारा आदर्श है। “तेन त्यक्तेन भुंजी था'-कहा भी गया है। आज भी सभी यशस्वी नेता यही करते हैं, भोग करते हैं, फिर उसका त्याग करते हैं, फिर त्याग द्वारा भोग करते हैं।

Q2.विभाजन की त्रासदी के संदर्भ में 'झूठा-सच' के महत्त्वका 10 प्रतिपादन कीजिए।

Q3.‘Sa wee गाँव” ही “ज़िन्दगीनामा' उपन्यास का नायक है। 10 इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं और क्‍यों ?

Q4... उपन्यास-कला की दृष्टि से 'सूरज का सातवाँ घोड़ा' उपन्यास 10 का विवेचन कीजिए।

Q5.“राग-दरबारी' उपन्यास में चित्रित विद्रूपता और व्यंग्य को ध्यान 10 में रखते हुए प्रमुख पात्रों का चारित्रिक विश्लेषण कीजिए। ,

Q6.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए :.. 2610

(ग) “राग-दरबारी' का ग्राम समाज

(घ) “सूरज का सातवाँ घोड़ा' में व्यक्त जीवन-दृष्टि