MHD-15 · December 2015 · हिन्दी
IGNOU MHD-15 December 2015 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
हिन्दी उपन्यास-2 (Hindi Novel-2)
Structured previous year question paper for MHD-15, December 2015 session (Hindi medium).
Questions: 6
Verified: 26 Jul 2026
हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)
144 5७4. सत्रांत परीक्षा
दिसम्बर, 2015
एम.एच.डी.-15 : हिन्दी उपन्यास-2
समय : 2 घण्टे अधिकतम अंक : 50
नोट: wer प्रश्न अनिवार्य है । शेष उरनों में से किन्हीं तीन के उत्तर
दीजिए ।
Q1.निम्नलिखित गचद्यांशों में से किन्हीं ढ्ञो की संदर्भ-सहित व्याख्या कीजिए : 2x10=20
(क) सब शासन व्यवस्थाओं की नींव सामयिक भूमि व्यवस्था पर ही होती है । किसानों की ओर से सरकार पर आते संकट को टालने का फ़िलहाल यही उपाय हो सकता है कि वे अपनी समस्या सांप्रदायिक झगड़ों में भूले रहें । यदि लीग और काँग्रेस आपस में नहीं लड़ेंगे तो अब सरकार के लिए इनमें से किसी एक को भी दबाना सम्भव नहीं रहा है.। जेकिन्स तो कैबिनेट मिशन को यह दिखा देना चाहता है कि हिन्दुस्तानियों को शासन का अधिकार सौंपना व्यावहारिक नहीं है । अगर यह योजना सफल हो जाए तो अंग्रेज़ गवर्नर की ज़रूरत ही नहीं रह जाएगी ।
(ख) अंग्रेज़ की कचहरी में इंसाफ़ होता है । वकील पढ़े-लिखे । कानून लिखत में दर्ज । इंसाफ़ का घर है कचहरी-अदालत, तटटठुम्मनों का डेरा नहीं कि जिसके जो मन में आया बोल दिया या फैसला दे दिया । “आपसे कहे मुताबिक़ तो मुकद्मों की रुबकारी बिला रू-रियायत भुगत जाती है ।” “बिला-शक काशीराम ! आज का फैसला मद्देनजर रखकर क्या कहा जा सकता है कि मुंसिफ़ जज ने फ़ैसला सही नहीं दिया !” काशीराम हँस दिए - “इस फ़ैसले का सेहरा तो आपके तजुरबे, मुस्तैदी और तारेशाह की बिछाई हुई बिसाते - शतरंज को है । जो चश्मदीद गवाह हमारी तरफ़ से पेश हुए उन्होंने मुकदमे का मुँह-माथा ही बदल दिया ।”?
(ग) वे बड़ी गंभीरता से बोले कि देखो, ये कहानियाँ वास्तव में प्रेम नहीं वरन् उस ज़िन्दगी का चित्रण करती हैं जिसे आज का निम्न-मध्यवर्ग जी रहा है । उसमें प्रेम से कहीं ज़्यादा महत्त्वपूर्ण हो गया है आज का आर्थिक संघर्ष, नैतिक विश्वृंखलता, इसीलिए इतना अनाचार, निराशा, कटुता और अँधेरा मध्यवर्ग पर छा गया है | पर कोई-न-कोई ऐसी चीज़ है जिसने हमें हमेशा अँधेरा चीरकर आगे बढ़ने, समाज-व्यवस्था को बदलने और मानवता के सहज मूल्यों को पुनःस्थापित करने की ताक़त और प्रेरणा दी है ।
(घ) शिक्षा के मैदान में भम्भड़ मचा हुआ था । अब कोई यह प्रचार करता हुआ नहीं दीख पड़ता था कि अपढ़ आदमी जानवर की तरह है । बल्कि दबी ज़बान से यह कहा जाने लगा कि ऊँची तालीम उन्हीं को लेनी चाहिए जो उसके लायक़ हों, इसके लिए स्क्रीनिंग! होनी चाहिए । इस तरह से घुमा-फिरा कर इन देहाती लड़कों को फिर से हल की मूठ पकड़ाकर खेत में छोड़ देने की राय दी जा रही थी । पर हर साल फ़ेल होकर, दर्जे में सब तरह की डाँट-फटकार झेलकर और खेती की महिमा पर नेताओं के निर्झरपंथी व्याख्यान सुनकर भी वे लड़के हल और कुदाल की दुनिया में वापस जाने को तैयार
Q2.अपने युग की प्रामाणिक अभिव्यक्ति की दृष्टि से 'झूठा सच! कहाँ तक सफल है ? विश्लेषण कीजिए ।
Q3.“ज़िन्दगीनामा' उपन्यास की अन्तर्वस्तु के विशेष घटकों पर विचार कीजिए ।
Q4.सूरज का सातवाँ घोड़ा' के औपन्यासिक शिल्प पर प्रकाश डालिए |
Q5.राजनीतिक पात्रों और घटनाओं के अभाव के बावजूद राग दरबारी' एक सशक्त राजनीतिक उपन्यास है ।” इस कथन की सोदाहरण व्याख्या कीजिए ।
Q6.निम्नलिखित में से किन्हीं को पर टिप्पणियाँ लिखिए :. 2265-70
(क) जयदेव पुरी का चरित्र
(ख) 'सूरज का सातवाँ घोड़ा” की अंतर्वस्तु
(ग) “ज़िन्दगीनामा' में परिवेश चित्रण
(घ) राग दरबारी' शीर्षक की सार्थकता