BHDE-144 · June 2025 · हिन्दी

IGNOU BHDE-144 June 2025 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

BHDE-144

Structured previous year question paper for BHDE-144, June 2025 session (Hindi medium).

Questions: 9

Verified: 10 Aug 2026

मुद्रित पृष्ठों की संख्या : 5 BHDE-144

स्नातक उपाधि कार्यक्रम

[सामान्य/ऑनर्स (हिन्दी)]

सत्रांत परीक्षा

जून, 2025

बी. एच. डी. ई.-144 : छायावाद

समय : 3 घण्टे अधिकतम अंक : 100

नोट : कुल पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए। पहला प्रश्न अनिवार्य है।

Q1.निम्नलिखित काव्यांशों में से किन्हीं तीन की सन्दर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 3x12=36

(क) अरे अमरता के चमकीले पुतलो! तेरे वे जयनाद, काँप रहे हैं आज प्रतिध्वनि, बनकर मानो दीन विषाद। प्रकृति रही दुर्जेय, पराजित, हम सब थे भूले मद में, भोले थे, हाँ तिरते केवल सब, विलासिता के नद में।

(ख) परिचय राका जलनिधि का जैसे होता हिमकर से; ऊपर से किरणें आती मिलती हैं गले लहर से। मैं अपलक इन नयनों से निरखा करता उस छवि को; प्रतिभा डाली-भर लाता कर देता दान सुकवि को।

(ग) हँसता है तो केवल तारा एक गुंथा हुआ उन घुँघराले काले बालों से, हृदय-राज्य की रानी का वह करता है अभिषेक । अलसता की-सी लता किन्तु कोमलता की वह कली, सखी नीरवता के कंधे पर डाले बाँह, छाँह-सी अम्बर-पथ से चली। तोड़ प्रकृति से भी माया, बाले ! तेरे बाल जाल में कैसे उलझा दूँ लोचन ? भूल अभी से इस जग को! तजकर तरल तरंगों को, इन्द्रधनुष के रंगों को, तेरे भ्रू भ्रंगों से कैसे बिंधवा दूँ निज मृग सा मन ? (छः) नाश भी हूँ मैं अनन्त विकास का क्रम भी, त्याग का दिन भी चरम आसक्ति का तम भी, तार भी आघात भी झंकार की गति भी, पात्र भी मधु भी मधुप भी मधुर विस्मृति भी अधर भी हूँ और स्मित की चाँदनी भी हूँ!

Q2.छायावाद के उद्भव और विकास को रेखांकित कीजिए।

Q3.जयशंकर प्रसाद के युग परिवेश पर प्रकाश डालिए।

Q4.निराला-काव्य की अन्तर्वस्तु का विवेचन कीजिए।

Q5.“पंत एक शिल्प सजग कवि हैं।” इस कथन की समीक्षा कीजिए।

Q6.महादेवी वर्मा की काव्य-संवदेना और मूल्य-चेतना पर प्रकाश डालिए।

Q7.जयशंकर प्रसाद की इतिहास-दृष्टि और राष्ट्रीय चेतना का विवेचन कीजिए।

Q8.“जागो फिर एक बार' कविता का विवेचन करते हुए उसके महत्त्व को रेखांकित कीजिए ।

Q9.“भारतमाता' कविता का विश्लेषण करते हुए उसके वैशिष्ट्य पर प्रकाश डालिए।