BHDC-134 · December 2025 · हिन्दी

IGNOU BHDC-134 December 2025 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

BHDC-134

Structured previous year question paper for BHDC-134, December 2025 session (Hindi medium).

Questions: 8

Verified: 10 Aug 2026

मुद्रित पृष्ठों की संख्या : 5 BHDC-134

स्नातक उपाधि कार्यक्रम (सामान्य)

सन्रांत परीक्षा

दिसम्बर, 2025

बी.एच.डी.सी.-134 : हिंदी गद्य साहित्य

समय : 3 घण्टे अधिकतम अंक : 100

नोट: प्रथम प्रश्न अनिवार्य है। शेष में से किन्हीं चार प्रश्नों के

उत्तर दीजिए।

Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं तीन की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 3x12=36

(क) आज इस सारी वकालत के पैसे और बुद्धिमत्ता की प्रतिष्ठा के ऊपर बैठकर सोचता हूँ कि क्‍यों मुझसे तनिक मूर्ख नहीं बना गया ? इस सब रुपये को और प्रतिष्ठा को अब मैं पेट से बाँधकर कहाँ ले जाऊँ ? इस सबका मैं क्‍या करूँ, जबकि समय पर प्रेम के प्रतिदान से मैं चूक गया।

(ख) मासिक वेतन तो पूर्णासी का चाँद है, जो एक दिन दिखाई देता है और घटते-घटते लुप्त हो जाता है, ऊपरी आय बहता हुआ स्रोत है जिससे सदैव प्यास बुझती है। वेतन मनुष्य देता है, इसी से उसमें वृद्धि नहीं होती। ऊपरी आमदनी ईश्वर देता है, उसी से उसकी बरकत होती है, तुम स्वयं विद्वान हो तुम्हें क्या समझाऊँ। इस विषय में विवेक की बड़ी आवश्यकता है।

(ग) मुझे स्मरण है जब मैं छोटी थी, मेरे पिता नौकरी पर समुद्र में जाते थे। मेरी माता मिट्टी का दीपक बाँस की पिटारी में भागीरथी के तट पर बाँस के साथ ऊँचे टाँग देती थी। उस समय वह प्रार्थना करती, “भगवान मेरे पथ-श्रष्ट नाविक को अंधकार में ठीक पथ पर ले चलना।” और जब मेरे पिता बरसों घर लौटते तो कहते -“साध्वी तेरी प्रार्थना से भगवान ने संकटों में

(a) जिस स्थान पर कोई बहुत दिनों तक रह आता है उसे छोड़ते हुए उसे दुःख होता है। पशु और बालक भी जिनके साथ रहते हैं उन्हें परच जाते हैं। यह “परचना” परिचय से निकलता है। परिचय प्रेम का प्रवर्तक है। बिना परिचय के प्रेम नहीं हो सकता। यदि देश-प्रेम के लिए हृदय में जगह करनी है तो देश के स्वरूप से परिचित और अभ्यस्त हो जाओ। (ड) दुःख और सुख तो मन के विकल्प हैं। सुखी वह है जिसका मन वश में है, दुखी वह है जिसका मन परवश है। परवश होने का अर्थ है-खुशामद करना, दाँत निपोरना, चाटुकारिता, हाँ-हजूरी। जिसका मन अपने वश में नहीं है वही दूसरे के मन का छंदावर्तन करता है, अपने को छिपाने के लिए मिथ्या आडम्बर रचता है, दूसरों को फँसाने के लिए जाल बिछाता है।

Q2.हिंदी गद्य के विकासक्रम को स्पष्ट कीजिए।

Q3.हिंदी आलोचना के स्वरूप पर प्रकाश डालिए।

Q4.“त्यागपत्र' उपन्यास की संरचना और शिल्प की विवेचना कीजिए।

Q5.“नमक का दारोगा” कहानी के उद्देश्य को स्पष्ट कीजिए।

Q6.“कुटज' निबंध के वैचारिक पक्ष पर प्रकाश डालिए।

Q7.“सहस्र फर्णों का मणि-दीप' निबंध के शिल्प पक्ष पर प्रकाश डालिए।

Q8.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए :

(क) संस्मरण का स्वरूप

(ख) कहानीकार उषा प्रियंवदा

(ग) लोभ और प्रीति : विविध रूप

(घ) निबंधकार कुबेरनाथ राय