MHD-15 · June 2021 · हिन्दी

IGNOU MHD-15 June 2021 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

हिन्दी उपन्यास-2 (Hindi Novel-2)

Structured previous year question paper for MHD-15, June 2021 session (Hindi medium).

Questions: 6

Verified: 26 Jul 2026

हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)

सत्रांत परीक्षा

जून, 2021

एम.एच .डी.-15 : हिन्दी उपन्यास - 2

समय : 2 घण्टे अधिकतम अंक : 50

नोट; were yer after है । शेष ग्रसनों में से किन्हीं तीन अरनों के

उत्तर दीजिए /

Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं ढ्रों की सन्दर्भ और प्रसंग-सहित व्याख्या कीजिए : 2x10=20

(क) भई, जिसकी मैजोरिटी है, उसकी मिनिस्ट्री बनने दो । देखो तो वे कैसे सम्भालते हैं ? गवर्नर को यह कहने का क्या हक़ है कि मिनिस्ट्री में कौन हो और कौन न हो ! तुम हिन्दुस्तान को अब नहीं सम्भाल सकते तो दफ़ा हो जाओ ! तुमने बाँट कर जाने की ज़िम्मेवारी क्यों ले ली है । छोड़ो हिन्दुस्तानियों पर । उन्हें जैसे बाँटना होगा, ख़ुद कर लेंगे । खिजर से इस्तीफ़ा दिलाने की क्‍या ज़रूरत थी ? यूनियनिस्ट मिनिस्ट्री नागरिक शांति की रक्षा नहीं कर पाती थी । तीन महीने से उससे कहीं बुरी हालत है, रोज़ बिगड़ रही है । रेलवे वर्कशाप में जो बम फेंके गए थे, मिलिटरी के ग्रिनेट थे । आज घर-घर बन्दूकें, राइफलें पहुँच गयी हैं | यह क्या हो रहा है !

(ख) दोस्तों-यारों, दिल्‍ली में अपनी-अपनी प्रीतें-मोहब्बतें धारकर माई हीर को सलाम HU | A [...] (this portion is being re-verified) St हमारी इस मुजलिस में शामिल हैं । लोक आख्यान डालते हैं कि जितनी बार इस अलबेले जोड़े के प्रीति-प्यार के दुनिया में गाए जाएँगे, उतनी बार हुस्न के महताब चमकेंगे आशिकों के दिलों में ! माशूकों की आँखों में ! जितनी बार हीर के दरदीले सुर हवा में लहराएँगे उतनी बार हीर सयालों की, राँझा तख़्त हज़ारे का, अपनी रूहों से इन मजलिसों में शामिल होंगे ।

(ग) ख़ैर, तो माणिक मुल्ला बोले कि, “जब मैं प्रेम पर आर्थिक प्रभाव की बात करता हूँ तो मेरा मतलब यह रहता है कि वास्तव में आर्थिक ढाँचा हमारे मन पर इतना अजब-सा प्रभाव डालता है कि मन की सारी भावनाएँ उससे स्वाधीन नहीं हो पातीं और हम-जैसे लोग जो न उच्चवर्ग के हैं, न निम्नवर्ग के, उनके यहाँ रूढ़ियाँ, परम्पराएँ, मर्यादाएँ भी ऐसी पुरानी और विषाक्त हैं कि कुल मिलाकर हम सभी पर ऐसा प्रभाव पड़ता है कि हम यन्त्र-मात्र रह जाते हैं | हमारे अन्दर उदार और ऊँचे सपने ख़त्म हो जाते हैं और एक अजब-सी जड़ मूर्च्छना हम पर छा जाती है ।”

(a) आरोपों की खुली जाँच हो, इसके स्थान पर यह अधिक उत्तम है कि बैद्यजी जनता के सामने आदर्श उपस्थित कर दें । आदर्श की इमारत खड़ी करते ही सारे आरोप उसकी नींव के नीचे दब जाएँगे । अतः बैद्यजी को चाहिए कि वे मैनेजिंग डाइरेक्टर के पद से त्याग-पत्र दे दें । उनके विरुद्ध जो रिपोर्ट आयी हैं, उसका यही जवाब है । वे चाहें तो अपना त्याग-पत्र किसी स्थिति के विरोध में दें, चाहे किसी सहकर्मी को कमीना बताकर दें, चाहे किसी सिद्धांत की रक्षा के लिए दें । यदि वे त्याग-पत्र दे रहे हों तो उसका कारण ढूँढ़ने की उन्हें पूरी छूट रहेगी । पर त्याग-पत्र के साथ अगर-मगर न होना चाहिए । होना चाहिए तो केवल त्याग-पत्र होना चाहिए । नहीं तो कुछ न होना चाहिए । पर यदि कुछ हुआ, तो बहुत-कुछ हो जाएगा, जो कदाचित्‌ वैद्यजी को अच्छा न लगेगा ।

Q2.औपन्यासिक महाकाव्य के रूप में झूठा सर्चा का विश्लेषण कीजिए |

Q3.परिवेश चित्रण की दृष्टि से 'ज़िन्दगीनामा का मूल्यांकन कीजिए |

Q4.सूरज का सातवाँ घोड़ा' के औपन्यासिक शिल्प पर प्रकाश डालिए ।

Q5.व्यंग्यात्मक उपन्यास की विशेषताओं की दृष्टि से wT दरबारी' का मूल्यांकन कीजिए ।

Q6.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए :.. 96-10

(क) सूरज का सातवाँ घोड़ा' में मध्यवर्ग

(ख) झूठा सर्चा में अंकित जनजीवन

(ग) राग दरबारी' में चित्रित पुलिस-प्रशासन

(घ) अज़िन्दगीनामा' का केन्द्रीय चरित्र