MHD-15 · June 2016 · हिन्दी
IGNOU MHD-15 June 2016 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
हिन्दी उपन्यास-2 (Hindi Novel-2)
Structured previous year question paper for MHD-15, June 2016 session (Hindi medium).
Questions: 6
Verified: 26 Jul 2026
हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)
सत्रांत परीक्षा
जून, 2016
एम.एच.डी.-15 : हिन्दी उपन्यास-2
समय : 2 घण्टे अधिकतम अंक : 50
we: ग्रथम अल अनिवार्य है । शेष अस्नों में से किन्हीं तीन के उत्तर
दीजिए ।
Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं ढ्वो की संदर्भ-सहित व्याख्या कीजिए : 2x10=20
(क) मैं क़ायदे आज़म के सामने हाथ जोड़कर दया और शान्ति के लिए प्रार्थना करूँगा । मैं उनसे कहँगा कि इस क़त्ल और ख़ून को बन्द कराएँ, अमन क़ायम कराएँ । हिन्दू भाई-बहनें फिर अपने घरों में लौटकर शान्ति से निर्भय रह सकें लेकिन उससे पहले यहाँ से गये मुसलमानों का लौट आना ज़रूरी है । जब तक दिल्ली और हिन्दुस्तान में मुसलमानों के लिए ख़तरा मौजूद है, मैं किस मुँह से पाकिस्तान गवर्नमेन्ट पर क़त्लो-खून और बदअमनी के लिए दोष लगा सकता हूँ, किस मुँह से उन्हें शान्ति क़ायम करने के लिए कह सकता हूँ ? मैं हिन्दुस्तान और पाकिस्तान दोनों जगह शान्ति और अमन क़ायम करने के लिए अपने प्राणों की बाज़ी लगा रहा हूँ ।
(ख) “नजीबे, वाज़िब सवाल है । होता यह है कि छोटी-बड़ी हकूमतें-सरकार अपने कारनामों-लड़ाइयों-फतेहयात्रियों को महफूज़ रखने के पूरे इंतज़ाम करती है । पूरा दफ़्तर रखती हैं । बाक़ी दमातड़-सायों के लिए यही काम उनकी मिरास कर लेती है । जिस ख़ानदान का कारण ढंग-पज्ज हुआ, मिरास उनकी सात पीढ़ियों तक नाम दोहरा लेगी ! सिलसिला चलता रहता है ।” कृपाराम बोले, “शाह जी मिरास भी कोई एक तो नहीं न ! खत्रियों के मिरासी शोहाला, ब्राह्मणों के मिरासी कमाछी, मीर मिरासी, राय मिरासी, सेवक क़व्वाल । ब्लोचों के . मिरासी अलग । शिया मिरासी अलग । अमीर हमजावाले लोरीं अलग |”
(ग) साधारण लोग अत्यंत साधारण हैं, मेरी प्रतिभा के स्तर से बहुत नीचे हैं, मैं उन्हें जिस तरह चाहूँ बहका सकता हूँ । मुझसे अपने व्यक्तित्व के प्रति एक अनावश्यक मोह, उसकी विकृतियों को भी प्रतिभा का तेज़ समझने का भ्रम और अपनी असामाजिकता को भी अपनी ईमानदारी समझने का अनावश्यक दम्भ आ गया था । धीरे-धीरे मैं अपने को ही इतना प्यार करने लगा कि मेरे मन के चारों ओर ऊँची-ऊँची दीवालें खड़ी हो गयीं और मैं स्वयं अपने अहंकार में बन्दी हो गया, पर इसका नशा मुझ पर इतना तीखा था कि मैं कभी अपनी असली स्थिति पहचान नहीं पाया ।
Q2.भाषा-प्रयोंग की दृष्टि से राग दरबारी' की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए ।
Q3.निम्नलिखित में से किन्हीं को पर टिप्पणियाँ लिखिए: 96-70
(क) झूठा सच! में युगीन अभिव्यक्ति
(ख) सत्ती का चारित्रिक वैशिष्ट्य
(ग). 'ज़िन्दगीनामा' की अंतर्वस्तु
(घ) रंगनाथ और रुप्पन
(घ) वे देश के पुराने सेवक थे । पिछले महायुद्ध के दिनों में जब देश को जापान से ख़तरा पैदा हो गया था, उन्होंने सुदूर-पूर्व में लड़ने के लिए बहुत से सिपाही भर्ती कराये । अब ज़रूरत पड़ने पर रातों-रात वे अपने राजनीतिक गुट में सैकड़ों सदस्य भर्ती करा देते थे । पहले भी वे जनता की सेवा जज की इजलास में जूरी और असेसर बनकर, दीवानी के मुक़दमों में जायदादों के सिपुर्ददार होकर और गाँव के ज़मींदारों में लम्बरदार के रूप में करते थे । अब वे को-ऑपरेटिव यूनियन के मैनेजिंग डाइरेक्टर और कॉलेज के मैनेजर थे । वास्तव में वे इन पदों पर काम नहीं करना चाहते थे क्योंकि उन्हें पदों का लालच न था । पर उस क्षेत्र में ज़िम्मेदारी के इन कामों को निभानेवाला कोई आदमी ही न था ।
Q4.देश के विभाजन पर लिखे गए हिन्दी के अन्य उपन्यासों का परिचय देते हुए उनमें 'झूठा सच के महत्त्व का निर्धारण कीजिए ।
Q5.परिवेश-चित्रण की दृष्टि से Bret’ a मूल्यांकन कीजिए ।
Q6.माणिक मुल्ला के माध्यम से धर्मवीर भारती ने निम्न मध्यवर्ग की प्रकृति के किन पहलुओं का उद्घाटन किया है ? विवेचन कीजिए ।