MHD-15 · June 2012 · हिन्दी
IGNOU MHD-15 June 2012 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
हिन्दी उपन्यास-2 (Hindi Novel-2)
Structured previous year question paper for MHD-15, June 2012 session (Hindi medium).
Questions: 6
Verified: 26 Jul 2026
co हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि ( एम.एच.डी. )
०0 .
+ सत्रांत परीक्षा ः
5 जून, 2012
एम.एच-डी.-15 : हिन्दी उपन्यास-2
समय : 2 घण्टे अधिकतम HH : 50
नोट: प्रथम प्रश्न अनिवार्य है। शेष में से किन्हीं तीन के उत्तर दीजिए।
Q1... निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं दो को संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 10x2=20
(क) दौलू मामा, तुम लाहौर की कितनी गलियों के कितने बच्चों के मामा थे। तुम उम्र भर रोजाना सैकड़ों बच्चों को + हँसा-हँसा कर आज उन्हें फूट-फूट कर रोते छोड़ गये हो। इन भोले बच्चों का खिलौना किस जालिम ने छीन लिया? मामा किसका दुश्मन था? मामा न यूनियनिस्ट मंत्रीमंडल से मतलब रखता था, न लीग की वजारत से। वह तो मानव था, केवल निरीह मानव। उसका खून मानवता का खून है। बेबस मानव का खून है। मानवता के खून की इस प्यास को कौन भड़का रहा है?
(ख) जब नौशेरखाँ का आखीरी वक्त आया तब उसने अपने बेटे हुरभुज़ से कहा, बेटा दिल से फकौरों-दरवेशों की हिफाजत कर। अपने आराम की फिक्र न रख। कोई भी अक्लमंद यह पसंद न करेगा कि चरवाहा पड़ा सोता हो और भेड़िया उसके गोल में रहे। होशियारी से दरवेशों मुहताजों का ख्याल रख। इसलिए कि रियाया की बदौलत ही बादशाह ताजदार होता है। रियाया जड़ की तरह और बादशाहा दरख्त की तरह और दरख्त जड़ से ही मजबूत होता है। ऐ मेरे बेटे! जहाँ तक बन सके, रियाया का दिल मत दुखाना और अगर तू ऐसा करेगा तो अपनी जड़ खोदेगा।
(ग) “जब मैं प्रेम पर आर्थिक प्रभाव की बात करता हूँ तो मेरा मतलूब यह रहता है कि वास्तव में आर्थिक ढाँचा हमारे मन पर इतना अजब-सा प्रभाव डालता है कि मन की सारी भावनाएँ उससे स्वाधीन नहीं हो पातीं और हम जैसे लोग जो न उच्च वर्ग के हैं, न निम्न वर्ग के, उनके यहाँ रूढ़ियाँ, परंपराएँ, मर्यादाएँ भी ऐसी पुरानी और विषाक्त हैं कि कुल मिलाकर हम सभी पर ऐसा प्रभाव पड़ता है कि हम यंत्र-मात्र रह जाते हैं। हमारे अंदर उदार और ऊँचे सपने खत्म हो जाते हैं और एक अजब-सी जड़- मूर्छना हम पर छा जाती है।”!
(घ) उन्होंने देखा कि प्रजातंत्र उनके तख्त के पास जमीन पर पंजों के बल बैठा है। उसने हाथ जोड़ रखे हैं। उसकी शक्ल हलवाहों जैसी और अंग्रेजी तो अंग्रेजी, वह शुद्ध हु हिन्दी भी नहीं बोल पा रहा है। फिर भी वह गिड़गिड़ा रहा है और वैद्यजी उसका गिड़गिड़ाना सुन रहे हैं। वैद्यजी उसे बार-बार तख्त पर बैठने के लिए कहते हैं और समझाते हैं कि तुम गरीब हो तो क्या हुआ, हो तो हमारे रिश्तेदार ही, पर प्रजातंत्र उन्हें बार-बार हुजूर और सरकार
Q2.“राग दरबारी' के प्रमुख पात्रों की चारित्रिक विशेषताओं का 10 विवेचन कीजिए।
Q3.“सूरज का सातवाँ घोड़ा” एक प्रयोगात्मक उपन्यास है।' इस 10 कथन के संदर्भ में उपन्यास के कथा-शिल्प की समीक्षा कीजिए।
Q4.“ज़िन्दगीनामा” उपन्यास की अंतर्वस्तु का विश्लेषण करते हुए. 10 उसका महत्त्व प्रतिपादित कीजिए। .
Q5.झूठा -सच' में निहित राजनीतिक परिप्रेक्ष्य का आलोचनात्मक 10 मूल्यांकन कीजिए।
Q6.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणी लिखिए : 5x2=10
(ख) “ज़िन्दगीनामा' के स्त्री-चरित्र
(ग) “सूरज का सातवाँ घोड़ा' का यथार्थ
(a) “राग दरबारी ' का प्रतिपाद्य