MHD-15 · December 2021 · हिन्दी

IGNOU MHD-15 December 2021 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

हिन्दी उपन्यास-2 (Hindi Novel-2)

Structured previous year question paper for MHD-15, December 2021 session (Hindi medium).

Questions: 6

Verified: 26 Jul 2026

हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)

सत्रांत परीक्षा

दिसम्बर, 2021

एम.एच .डी .-15 : हिन्दी उपन्यास-2

समय : 2 घण्टे अधिकतम अंक : 50

नोट: प्रथम प्रश्न अनिवार्य है / शेष ग्रशनों में से किन्हीं तीन ग्रश्नों के

उत्तर दीजिए /

Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं को की संदर्भ-सहित व्याख्या कीजिए : 2x10=20

(क) लड़की से खामुजा नाराज हैं कि वह ज़िन्दगी भर की मुसीबत सहेड़ने से इन्कार कर रही है । माँ और बड़े भाई कर्त्तव्य पूरा न कर सकने के सामाजिक अपमान से डर रहे हैं । मेरी भी यह स्थिति थी । ... जो लड़कियाँ जीविका कमाने का साहस कर रही हैं वे अपना भाग्य दूसरों के हाथ में क्‍यों दे दें ? अब तो दिल्ली में लड़कियाँ सभी जगह काम करती दिखाई दे रही हैं ... विभाजन से पहले मैं नौकरी कर लेने की कल्पना करती थी तो खास साहस की आवश्यकता जान पड़ती थी पर अब तो साधारण बात

(ख) दोस्तो-यारो दिल्‍ली में अपनी-अपनी प्रीतें-मोहब्बतें धारकर माई हीर को सलाम करो । हीर और राँझा दोनों हमारी इस मुजलिस में शामिल हैं । लोक आख्यान डालते हैं कि जितनी बार इस अलबेले जोड़े के प्रीति-प्यार के दुनिया में गाये जाएँगे, उतनी बार हुस्न के महताब चमकेंगे आशिकों के दिलों में ! माशूकों की आँखों में । जितनी बार हीर के दरदीले सुर हवा में लहराएँगे उतनी बार हीर सयालों की, राँझा तख़्त हज़ारे का अपनी रूहों से इन मजलिसों में शामिल होंगे ।

(ग) प्रेम के विषय में बात करते समय वे कभी-कभी कहावतों को अजब रूप में पेश किया करते थे और उनमें से न जाने क्‍यों एक कहावत अभी तक मेरे दिमाग में चस्पां है, हालाँकि उसका सही मतलब न मैं तब समझा था न अब ! अक्सर प्रेम के विषय में अपने कड़वे-मीठे अनुभवों से हम लोगों का ज्ञानवर्धन करने के बाद खरबूजा काटते हुए कहते थे, “प्यारे बंधुओं ! कहावत में चाहे जो कुछ हो, प्रेम में खरबूजा चाहे चाकू पर गिरे चाहे चाकू खरबूजे पर, नुकसान हमेशा चाकू का होता है । अत: जिसका व्यक्तित्व चाकू की तरह तेज और पैना हो, उसे हर हालत में इस उलझन से बचना चाहिए ।”?

(घ) डिनर के बाद काफी पीते हुए, छके हुए अफसरों का ठहाका दूसरी ही किस्म का होता है । वह ज्यादातर पेट की बड़ी ही अन्दरूनी गहराई से निकलता है | उस ठहाके के घनत्व का उनकी साधारण हँसी के साथ वही अनुपात बैठता है जो उनकी आमदनी का उनकी तनख्वाह से होता है । राजनीतिज्ञों का ठहाका सिर्फ मुँह के खोखल से निकलता है और उसके दो ही आयाम होते हैं, उसमें प्राय: गहराई नहीं होती ।

Q2.झूठा-सर्चा को महाकाव्यात्मक उपन्यास क्‍यों कहते हैं ? अपने तर्क उदाहरण सहित प्रस्तुत कीजिए ।

Q3.>नज़िन्दगीनामा की कथावस्तु का विश्लेषण कीजिए ।

Q4.सूरज का सातवाँ घोड़ा में चित्रित स्त्री-पुरुष संबंधों का विवेचन कीजिए ।

Q5.स्वातन्त्योत्तर दौर में बदलते ग्रामीण यथार्थ के संदर्भ में राग दरबारी” का महत्त्व प्रतिपादित कीजिए ।

Q6.निम्नलिखित में से किन्हीं ढ्ो पर टिप्पणियाँ लिखिए: 96-70

(क) झूठा-सर्चा में विभाजन का यथार्थ

(ख) “ज़िन्दगीनामा' का औपन्यासिक शिल्प

(ग) सूरज का सातवाँ घोड़ा का परिवेश

(a) “राग दरबारी' के वैद्यजी