MHD-15 · December 2020 · हिन्दी
IGNOU MHD-15 December 2020 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
हिन्दी उपन्यास-2 (Hindi Novel-2)
Structured previous year question paper for MHD-15, December 2020 session (Hindi medium).
Questions: 6
Verified: 26 Jul 2026
मुद्रित पृष्ठों की संख्या : 6 MHD-15
हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम. ए, हिन्दी )
सत्रांत परीक्षा
दिसम्बर, 2020
एम.एच.डी.-15 : हिन्दी उपन्यास--2
समय / 2 घण्टे अधिकतम अक : 50
_बोट : प्रथम रन अनिवार्य है। शेष में से किन्हीं तीन
अरनों को उत्तर दीजिए।
Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन््हीं दो की सन्दर्भ और प्रसंग सहित व्याख्या कीजिए : 2x10=20
(क) परन्तु विवाह केवल भावात्मक सम्बन्ध नहीं होता, आप मानेंगे। विवाह केवल दो व्यक्तियों का ही सम्बन्ध भी नहीं होता। कम से कम हमारे समाज में, यह परिवारों का भी सम्बन्ध बन जाता हे। एण-॥ 2.1. 0. आप बुरा न मानें, मेरा विचार है कि आजीवन सब लोगों का विरोध या असहयोग झेलते रहना सुखद नहीं हो सकता। सीधी बात है, कनक आकर्षक लड़की है और कनक ही क्या, बहुत-सी शिक्षित और भावुक लड़कियाँ आपके प्रति आकर्षण अनुभव करेंगी। यह तो सब स्वाभाविक बात थी। साफ बात कहने में हर्ज क्या है! जीवन में आकर्षण के अवसर तो आते ही रहते हैं पर उसमें जीवन भर के लिए बँधते समय बहुत-सी बातों का ध्यान भी रखना पड़ता है। आप यह तो अनुभव कर रहे हैं कि मैं बहुत अधिक अधिकार जता रहा हूँ।
(ख) अड्डा पार कर काशीशाह बड़े भाई से बोले, “भ्राजी, कचहरियों की कानूनी और मुहर्रिरी झूठ-झँखाड़ ही समझो। वादी कुछ कहे, गवाह कुछ। हादसा कुछ, बयान कुछ। जुर्म किसका और सजा किसको। पुख्ता चीज तो एक ही अदालत में--अदालत और अदालत की कुर्सी।” शाह जी ने तीखी नजर भाई पर डाली--“काशीराम, इस बात पर मैं तुम्हारे साथ मुत्तफिक नहीं। अंग्रेज की कचहरी में इंसाफ होता है। वकील पढ़े-लिखे। कानून लिखत में दर्ज। इंसाफ का घर है कचहरी-अदालत लटठुम्मनों का डेरा नहीं कि जिसके जो मन में आया बोल दिया “आपके कहे मुताबिक तो मुकदमों की रुबकारी बिला रू-रियायत भुगत जाती है!” “बिला-शक काशीराम! आज का फैसला मद्देनजर रखकर क्या कहा जा सकता है कि मुंसिफ जज ने फैसला सही नहीं दिया!”
(ग) “हाँ, लेकिन जो इस नैतिक विकृति से अपने को अलग रखकर भी इस तमाम व्यवस्था के विरुद्ध नहीं लड़ते, उनकी मर्यादाशीलता सिर्फ परिष्कृत कायरता होती है। संस्कारों का अन्धानुसरण! और ऐसे लोग भले आदमी कहलाये जाते हैं, उनकी तारीफ भी होती है, पर उनकी जिन्दगी बेहद करुण और भयानक हो जाती है और सबसे बड़ा दुःख यह है कि वे भी अपने जीवन का यह पहलू नहीं समझते और बैल की तरह चक्कर लगाते चले जाते हैं। मसलन में तुम्हें तन्ना की कहानी सुनाऊँ ? तन्ना की याद है न ? वही महेसर दलाल का लड़का!”
(a) नौजवान डाक्टरों की तरह, इंजीनियरों, वैज्ञानिकों, अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति के लिए [...] (this portion is being re-verified) मनीषियों की तरह, जिनका चौबीस घण्टे यही रोना है कि वहाँ सबने मिलकर उन्हें सुखी नहीं बनाया, पलायन करो। यहाँ के झंझटों में मत अगर तुम्हारी किस्मत ही फूटी हो, और तुम्हें यहीं रहना पड़े तो अलग से अपनी एक हवाई दुनिया बना लो। उस दुनिया में रहो जिसमें बहुत-से बुद्धिजीवी आँख मूँदकर पड़े हैं होटलों और क्लबों में। शराबखानों और कहवाघरों में, चण्डीगढ़-भोपाल-बंगलौर ने नवनिर्मित भवतनों में, पहाड़ी आरामगाहों में, जहाँ कभी न खत्म होने वाले सेमिनार चल रहे हैं। विदेशी मदद से बने हुए नये-नये शोध-संस्थानों में, जिनमें भारतीय प्रतिभा का निर्माण हो रहा है। चुरुट के धुएँ, चमकीली जैकेटवाली किताब और गलत, किन्तु अनिवार्य अंग्रेजी की धुन्ध वाले विश्वविद्यालयों में। वहीं कहीं जाकर जम जाओ, फिर वहीं जमे रहो।
Q2.अपने युग की प्रामाणिक अभिव्यक्ति की दृष्टि से 'झूठा सच' का मूल्यांकन कीजिए।
Q3.“जिन्दगीनामा' उपन्यास के अंतर्वस्तु का विश्लेषण कीजिए।
Q4.'सूरज का सातवाँ घोड़ा' के भाषिक-शिल्प की विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
Q5.“राग दरबारी' के प्रमुख पात्रों की चारित्रिक विशिष्टताएँ बताइए।
Q6.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए :
(क) “राग दरबारी" में चित्रित न्याय व्यवस्था
(ख) माणिक मुल्ला का चरित्र
(ग) “जिन्दगीनामा' का शिल्प
(घ) यशपाल के उपन्यास